शशांक शेखर, लीड्स एक दौर था, जब भारतीय टीम खराब फील्डिंग की वजह से मैच गंवा देती थी। कई बार ऐसा देखा गया कि टीम ने बल्ले और गेंद से अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन फील्डिंग में कोई कैच छूटने या रन आउट का मौका गंवाने के चलते जीत भारतीय टीम के हाथ से निकल जाती थी। टेस्ट क्रिकेट में भी फील्डिंग को ज्यादा महत्ता नहीं दी जाती थी। हालांकि सीमित ओवरों के खेल के बढ़ने के साथ-साथ फील्डिंग को लेकर नजरिया बदलने लगा। अब मैच जीतने के लिए अच्छी फील्डिंग होना जरूरी माने जाने लगा। अच्छी बात यह थी कि 80 और 90 के दशक में भारतीय टीम की कमान कपिल देव और मोहम्मद अजहरुद्दीन के हाथों में थी जो अपने आप अच्छे फील्डर थे। उन्होंने टीम के साथी खिलाड़ियों के लिए मापदंड तय किए। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए फील्डिंग में शानदार नहीं तो अच्छा बनने की अपेक्षा की जाने लगी। पढ़ें: हालांकि बैटिंग और बल्लेबाजी प्रदर्शन की तो चर्चा होती है लेकिन फील्डिंग को जरूरी पहचान नहीं मिल पाती लेकिन मैच पर उसका असर काफी अहम होता है। उदाहरण के लिए विश्व कप 2019 में भारतीय टीम ने सबसे कम कैच छोड़े हैं। टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाने में इसकी अहम भूमिका रही है। भारतीय टीम ने 8 में से सात मैच जीते हैं और वह अंक तालिका में अभी दूसरे स्थान पर है। हालांकि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सुधार की जरूरत है। , जो अब प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हैं, उन्हें बतौर आउटफील्डर सुधार करने की जरूरत है। एक शानदार फील्डिंग टीम में औसत फील्डिंग पर भी लोगों की नजर रहती है। पढ़ें: भारतीय टीम के फील्डिंग कोच आर श्रीधर भी इस बात को मानते हैं। उन्होंने बांग्लादेश मैच के बाद कहा था, 'उनके (पंत) साथ काफी काम करने की जरूरत है चूंकि उन्होंने अपनी थ्रोइंग तकनीक को सुधारना होगा साथ ही एक अच्छा आउटफील्डर बनने के लिए अधिक ऐथलेटिक होना पड़ेगा। लेकिन अभी हमें इसी से काम चलाना पड़ेगा और उन्हें सही पोजीशन पर इस्तेमाल करना होगा। देखें: विराट और धोनी इसी पर काम कर रहे हैं। वे पंत को सही समय पर सही स्थान पर इस्तेमाल करना चाहते हैं।' कोच ने हालांकि पंत की तारीफ भी की थी। उन्होंने कहा था कि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले में पंत ने पांच रन भी बचाए थे और कैच भी पकड़ा था, यह एक बोनस है। भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ तीन विकेटकीपर्स के साथ उतरी। धोनी, पंत और कार्तिक तीनों ही इस मैच में खेले थे। जब धोनी थोड़ी देर के लिए मैदान से बाहर थे, तब पंत ने विकेटकीपिंग की थी। कुछ लोगों को हैरानी हुई कि आखिर कार्तिक, जो कि बेहतर विकेटकीपर माने जाते हैं, स्ंटप्स के पीछे क्यों नहीं थे। इसका जवाब यह है कि कार्तिक बेहतर आउटफील्डर भी हैं। टीम के लिए आउटफील्ड में कार्तिक की मौजूदगी काफी अहम थी। पढ़ें: क्या तीन विकेटकीपर्स को मौका देने से फील्डिंग पर असर नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें आउट फील्ड में फील्डिंग की आदत नहीं होती। इसके जवाब में श्रीधर ने कहा, 'बेशक, असर पड़ता है लेकिन दिनेश कार्तिक शानदार आउटफील्डर हैं। ऋषभ को अपनी चेतना बढ़ानी होगी। तभी हम फील्डर्स को एक ही पोजशीन पर रखते हैं ताकि उन्हें समझ आना शुरू हो। इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने छोटी बाउंड्री का पूरा फायदा उठाया। उन्होंने दो भारतीय स्पिनर्स के 20 ओवरों में 160 रन जोड़े। भारत को उसी मैदान पर अपना सेमीफाइनल मुकाबला खेलना पड़ सकता है। आखिर टीम इतने कम वक्त में उस मैदान के आकार के साथ कैसे सामंजस्य बिठा पाएगी। श्रीधर ने कहा, 'एजबेस्टन कुछ-कुछ ईडन गार्डंस की तरह है। एक बार गेंद आपसे आगे निकल गई तो उसका पीछा करने का कोई फायदा नहीं। इससे अच्छा है कि ऐसे मैदानों पर आप ऐंगल कट करें।'
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