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अगर भारतीय किक्रेट फैन्स को 2021 टी20 वर्ल्ड कप में 2007 ODI वर्ल्ड कप का रिपीट दिख रहा है, तो उसकी कुछ वजह होगी। बड़े बेआबरू होकर हम तब भी निकले थे और जैसे हालात हैं, विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम हमें फिर से वही दौर दिखाएगी, यही लग रहा है। पाकिस्तान से 10 विकेट से पिटे, तो कह दिया गया कि कभी न कभी तो ऐसा होना ही था। चलो मान लिया कि पाक के खिलाफ एक बुरा दिन था, मगर वैसा ही प्रदर्शन न्यूजीलैंड के खिलाफ?और बात बस बल्लेबाजों के ढेर हो जाने या गेंदबाजों के विकेट न ले पाने भर तक सीमित नहीं है। कोहली समेत पूरी टीम की बॉडी लैंग्वेज ऐसी थी मानो सबकुछ खत्म हो चला है। टॉस के वक्त से लेकर कीवियों की जीत तक भारतीय खिलाड़ी निराश, हताश और थके नजर आए।
अगर भारतीय किक्रेट फैन्स को 2021 टी20 वर्ल्ड कप में 2007 ODI वर्ल्ड कप का रिपीट दिख रहा है, तो उसकी कुछ वजह होगी। बड़े बेआबरू होकर हम तब भी निकले थे और जैसे हालात हैं, विराट कोहली के नेतृत्व वाली टीम हमें फिर से वही दौर दिखाएगी, यही लग रहा है। पाकिस्तान से 10 विकेट से पिटे, तो कह दिया गया कि कभी न कभी तो ऐसा होना ही था। चलो मान लिया कि पाक के खिलाफ एक बुरा दिन था, मगर वैसा ही प्रदर्शन न्यूजीलैंड के खिलाफ?
और बात बस बल्लेबाजों के ढेर हो जाने या गेंदबाजों के विकेट न ले पाने भर तक सीमित नहीं है। कोहली समेत पूरी टीम की बॉडी लैंग्वेज ऐसी थी मानो सबकुछ खत्म हो चला है। टॉस के वक्त से लेकर कीवियों की जीत तक भारतीय खिलाड़ी निराश, हताश और थके नजर आए।

विराट कोहली मैदान पर जब टॉस के लिए आए, तभी से उनकी बॉडी लैंग्वेज बहुत कुछ बयान कर रही थी। एक बार फिर टॉस विरोधी टीम ने जीता। केन विलियमसन ने टी20 वर्ल्ड कप का ट्रेंड बरकरार रखते हुए पहले फील्डिंग चुनी। उसी वक्त यह लगने लगा था कि आज शायद करोड़ों भारतीयों के दिल टूटेंगे।
कोहली और विलियमसन की टीमें इस मैच से पहले एक ही पोजिशन पर थीं मगर विराट जहां थके दिख रहे थे, विलियमसन हमेशा की तरह धीर-गंभीर मगर समर्पित नजर आ रहे थे। विलियमसन से हाथ मिलाते हुए भी कोहली के चेहरे पर हताशा थी। मानों उन्हें यह पता हो कि आगे क्या होने वाला है। विराट ने टॉस के समय कहा भी अगर वे जीतते तो भी बोलिंग ही चुनते। क्यों? उसका जवाब अगली स्लाइड में।

टीम की मनोस्थिति का एक आइडिया तब मिला जब हमने ओपनर्स को मैदान में आते देखा। केएल राहुल तो थे मगर रोहित शर्मा नहीं दिखे, उनकी जगह ईशान किशन को भेजा गया। सोशल मीडिया पर बहुत से लोग इसी एक फैसले के लिए टीम मैनेजमेंट को लताड़ रहे हैं। बहरहाल, प्रयोग असफल रहा। पावरप्ले खत्म होते-होते टीम दो विकेट खो चुकी थी और स्कोरबोर्ड पर सिर्फ 35 रन थे। ईशान किशन (4) और केएल राहुल (18) रन बनाकर आउट हो गए।
रोहित शर्मा तीसरे नंबर पर आए और विराट कोहली के साथ मिलकर पारी को आगे बढ़ाया। मगर जल्द ही दोनों ने अपने विकेट खो दिए। शर्मा ने एक चौके और एक छक्के की मदद से 14 गेंदों पर 14 रन बनाए। कोहली बिना कोई बाउंड्री मारे 17 गेंदों में 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। भारत का स्कोर 14 ओवर में 70 रन था। 15वें ओवर में भारत को ऋषभ पंत के रूप में झटका लगा और पंत 12 रन बनाकर आउट हो गए।
पूरी पारी का एक बड़ा ड्रॉबैक रहा कि भारतीय टीम कभी कोई साझेदारी बनाने के मूड में नहीं दिखी। हालांकि इसमें न्यूजीलैंड की बेहतरीन गेंदबाजी को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। आखिरी ओवर्स में हार्दिक पंड्या और रवींद्र जडेजा ने मिलकर कुछ रन जरूर जोड़े। टीम का स्कोर 17 ओवर में 5 विकेट पर 86 रन था। इसके बाद पंड्या भी एक चौके की मदद से 24 गेंदों पर 23 रन बनाकर आउट हो गए। जडेजा (26) के नाबाद पारी के बदौलत भारत का स्कोर 110 रनों तक ही पहुंच सका।

जवाब में न्यूजीलैंड ने दिखा दिया कि इस पिच पर बल्लेबाजी कैसे करते हैं। पावर प्ले के बाद कीवी टीम का स्कोर 1 विकेट के नुकसान पर 44 रन था। मार्टिन गप्टिल 17 गेंदों पर 20 रन बनाकर जसप्रीत बुमराह का शिकार बने। इसके बाद विलियमसन और डैरिल मिचेल ने मिलकर बैटिंग मास्टरक्लास लगाई। दोनों के बीच 54 गेंदों में 72 रनों की मैच-जिताऊ साझेदारी हुई।
ऊपर की फोटो में डैरिल मिचेल के चौके पर विराट कोहली का यह रिएक्शन बतलाता है कि मैच हाथ से निकल चुका है, यह उन्हें समझ आ चुका था। विलियम्सन ने तीन चौके की मदद से 31 गेंदों पर 32 नाबाद रन बनाए और डेवोन कॉनवे 4 गेंदों में 2 रन बनाकर नाबाद रहे। इसी के साथ न्यूजीलैंड टीम की टूर्नामेंट में पहली जीत दर्ज हुई और भारत की लगातार दूसरी हार।

न्यूजीलैंड के कप्तान हर मायने में भारत के कप्तान पर भारी पड़े। फिर चाहे वह पिच के हिसाब से गेंदबाजी आक्रमण में बदलाव हो या बल्लेबाज के हिसाब से बेहतरीन फील्ड प्लेसमेंट। बतौर कप्तान विलियमसन टॉप पर थे तो कोहली बॉटम में। कोहली अपने रिर्सोसेज का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर सके और इसके लिए उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। विराट के पास सलाह के लिए मेंटोर एमएस धोनी और मैदान पर रोहित शर्मा जैसा टी20 का एक बेहतरीन कप्तान था, मगर न्यूजीलैंड के खिलाफ कुछ काम नहीं आया।

न्यूजीलैंड ने 111 रनों का टारगेट सिर्फ 14.3 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। कभी ऐसा नहीं लगा कि भारतीय गेंदबाज कीवी बल्लेबाजों पर हावी हो रहे हैं। बुमराह और चक्रवर्ती को छोड़ दें तो बाकी सब खूब कूटे गए। हालात ये रहे कि रवींद्र जडेजा, मोहम्मद शमी और शार्दुल ठाकुर की इकनॉमी 11 से ऊपर थी।

पाकिस्तान के खिलाफ बुरी तरह पिटी टीम इंडिया से लड़ाई की उम्मीद थी। ट्रोलिंग और तमाम बातों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करनी थी, मगर शायद टीम बिखर गई। लगा ही नहीं कि यह वही टीम इंडिया है जिसकी बेंच स्ट्रेन्थ भी इतनी मजबूत है कि वह कई देशों की फर्स्ट प्लेइंग 11 को हरा दे। टी20 वर्ल्ड कप में इतने घटिया प्रदर्शन के बाद सवाल तो उठेंगे और टीम को उन सवालों का सामना करना ही होगा। आखिर फैन्स भी समझते हैं कि खेल में हार-जीत लगी रहती है मगर आप इस तरह हारेंगे तो कोई आपके पीछे नहीं खड़ा होगा।

कोहली की छवि बेहद आक्रामक है, विलियमसन बेहद शालीन हैं। मैदान पर भी दोनों की बॉडी लैंग्वेज बिल्कुल जुदा रहती है। कोहली बेहद उत्साहित नजर आते हैं जबकि विलियमसन के व्यवहार में धोनी की झलक दिखती है। कोहली को अपना गेम या व्यवहार बदलने के लिए कोई नहीं कह रहा, मगर एक ही पोजिशन पर मौजूद दो टीमें किस तरह अपने कप्तान के भरोसे पर खेलती हैं, यह तो समझ ही सकते हैं। विलियमसन के लिए भी चुनौती उतनी ही बड़ी थी मगर उन्होंने दबाव में बिखर जाने के बजाय टीम को संभाला, कोहली ना ये कर पाए, ना ही उनका बल्ला बोला।
Why Shubman Gill practiced with 'special balls' | Exclusive Visuals from Colombo from Sports - Videos - The Times of India https:/...