नई दिल्ली 'टी20 वर्ल्ड कप के बाद मैं इस फॉर्मेट में भारतीय टीम की कप्तानी से हट जाऊंगा। यह इस फॉर्मेट में बतौर कप्तान यह मेरा आखिरी टूर्नमेंट है।' विराट कोहली ने जब यह बयान दिया तो कई लोगों को बहुत हैरानी हुई। वहीं कुछ लोगों के लिए यह सोची हुई राह पर ही था। उनके लिए कोहली की कप्तानी को लेकर सवाल थे और उसका जवाब कुछ ऐसे ही आने की उम्मीद थी। कोहली के लिए बतौर कप्तान यह आखिरी टी20 टूर्नमेंट है और वहीं मुख्य कोच रवि शास्त्री का कार्यकाल भी इस विश्व कप के बाद समाप्त हो रहा है। टीम इंडिया के नए कोच की कवायद शुरू हो चुकी है। इसमें सबसे आगे राहुल द्रविड़ का नाम चल रहा है। शास्त्री और कोहली की कप्तानी में भारत ने कई उपलब्धियां हासिल कीं। ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतना हो या फिर भारत को लगातार नंबर टेस्ट टीम बनाए रखना। कोहली का कलेवर और तेवर महेंद्र सिंह धोनी से अलग था। धोनी कैप्टन कूल थे तो कोहली खुलकर अपनी भावनाओं का इजहार करने वाले। वह मैदान पर विपक्षी टीम से भिड़ने में गुरेज नहीं करते थे। टीम इंडिया विदेशी धरती पर लगातार अच्छा खेली। पहली एशियाई टीम बनी जिसने ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज हराई। एक बार नहीं बल्कि दो-दो बार। भारतीय टीम के आक्रामक खेल और जीत की भूख ने क्रिकेट जानकारों को भी हैरान किया। टीम इंडिया कोहली के रंग-ढंग में थी। फिटनेस पर जोर, करारे जवाब और मैदान पर दुश्मन की आंख में आंख डालकर जवाब देना। पहली बार देखा गया कि ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में स्लेज किया जा रहा था। लेकिन, एक चीज जिसकी कमी सभी ने महसूस की वह थी आईसीसी ट्रोफी। भारत ने कोहली की कप्तानी में आईसीसी का कोई खिताब हासिल नहीं किया। साल 2017 की चैंपियंस ट्रोफी के फाइनल में उसे पाकिस्तान से हारना पड़ा। 2019 के 50 ओवर वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड ने उसे मात दी। वह पहली आईसीसी टेस्ट चैंपियंस के फाइनल में भी उसे कीवी टीम ने हराया। तो, वैश्विक चैंपियनशिप में खिताब जीतना कोहली और शास्त्री की जोड़ी के लिए अभी तक सपना ही है। भारत ने आखिरी बार 2013 में कोई आईसीसी टू्र्नमेंट जीता था। तब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में फाइनल में इंग्लैंड को हराकर भारत ने टूर्नमेंट जीता था। उसके बाद से लगातार टीम इंतजार कर रही है। कोहली जरूर चाहेंगे कि अपने आखिरी टी20 वर्ल्ड कप बतौर कप्तान में वह अपने इस सूखे को दूर करें। वहीं शास्त्री भी 'हाई नोट' पर अलविदा कहना चाहेंगे। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली भी कह चुके हैं कि कोहली की टीम को आईसीसी ट्रोफी जीतनी चाहिए। शास्त्री चैंपियन ऑफ चैंपियंस हैं, एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले इकलौते भारतीय। शास्त्री ने नंबर 11 से लेकर सलामी बल्लेबाज तक हर भूमिका अच्छे से निभाई। बतौर स्पिनर भी बल्लेबाजों को छकाया। कॉमेंटेटर बने तो अपने अंदाज से मन मोह लिया। कोच के तौर पर भी कई मुकाम हासिल किए लेकिन मामला अटक गया है आईसीसी खिताब पर। शास्त्री जरूर इस मौके को चूकना नहीं चाहेंगे। वह एक हायर नोट पर ही अपने कोचिंग करियर को विराम देना चाहेंगे। आंकड़े कीवी टीम के पक्ष में भारतीय टीम ने टी20 वर्ल्ड कप में कभी न्यूजीलैंड को नहीं हराया है। वहीं इसके साथ ही आईसीसी टूर्नमेंट्स की बात करें तो भारतीय टीम ने आखिरी बार कीवी टीम को 2003 के वर्ल्ड कप में हराया है। तो न्यूजीलैंड को हराना आसान नहीं। पर कोहली और शास्त्री के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं। कीवी भी घायल हैं। मार्टिन गप्टिल फिट नहीं और कप्तान विलियमसन की फिटनेस पर भी सवाल हैं। चोट के चलते तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्युसन बाहर हैं। भारत को ख्याल रखना होगा कि न्यूजीलैंड की कमजोरी पर वार करे। वह न्यूजीलैंड को घायल शेर बनने का मौका नहीं दे सकता। सवाल कोहली और शास्त्री के सामने भी कई हैं। सबसे बड़ा सवाल टीम कॉम्बिनेशन को लेकर हैं। जब टीम हारती है तो कई सवाल उठते हैं। कोहली के सामने भी उठे। ईशान किशन और शार्दुल ठाकुर को बाहर रखने पर निशाना साधा गया। पर कप्तान ने अपने खिलाड़ियों पर भरोसा जताया। जताना भी होगा। पर साथ ही मौके के हिसाब से सही टीम चुनना भी एक चुनौती होगी। हालात थोड़े मुश्किल हैं लेकिन इन्हीं में एक कप्तान की परख होती है। और कोहली कप्तान के रूप में टी20 फॉर्मेट के अपने आखिरी टूर्नमेंट में एक विरासत छोड़ना चाहेंगे। एक ICC ट्रोफी जिस पर इंडिया लिखा हो...
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