मैनचेस्टरलंदन में हीथ्रो एयरपोर्ट के इमिग्रेशन डेस्क पर संडे देर शाम ड्यूटी करते हुए क्लारा थोड़ी भन्नाई हुई हैं। मेरा नंबर आने पर वह अनमने अंदाज में पूछती हैं, ‘आपके इंग्लैंड आने का मकसद?’ मैंने जवाब दिया, ‘इंडियन स्पोर्ट्स रिपोर्टर हूं और क्रिकेट वर्ल्ड कप कवर करने आया हूं।’ क्लारा के चेहरे की रंगत एकदम बदल जाती है और वह चहकते हुए पूछती हैं, ‘आप जर्नलिस्ट हैं, तो बताइए वर्ल्ड कप कौन जीतेगा? मैंने कहा, ‘इंडिया... और कौन!’ क्लारा अगला सवाल दागती हैं, ‘इंग्लैंड क्यों नहीं?’ मैंने कहा, क्योंकि टीम इंडिया ज्यादा मजबूत है। थोड़ी देर बाद क्लारा इधर-उधर देखते हुए हौले से कहती हैं, ‘सच कहूं तो मुझे भी लगता है कि कप इंडिया ही जाएगा। आपसे पहले बहुत से भारतीय मेरी डेस्क से होते हुए निकले हैं। सब अपनी टीम को सपोर्ट करने आए हैं। लगता है, पूरा इंडिया यहां आ गया है। इट्स क्रेजी! आप सबको गुडलक।’ पढ़ें: एयरपोर्ट से बाहर आने पर पता लगा कि मैनचेस्टर के लिए बस की सभी टिकटें बिक चुकी हैं। हेल्प डेस्क ने बताया कि 7.5 पाउंड की टिकट 55 पाउंड तक में बिकीं। मानो इंग्लैंड के सारे भारतीय मैनचेस्टर का रुख कर रहे हैं। यूरो रेल में कुछ ही टिकटें हैं और वह भी 100 पाउंड से ज्यादा की और 8 जुलाई देर शाम की। मैच के लिहाज से उसमें जाने का मतलब भी नहीं। मैंने मैनचेस्टर का सफर लीड्स होते हुए पूरा किया। वहां ओल्ड ट्रैफर्ड ग्राउंड के मेन एंट्रेंस पर बड़ा-सा बोर्ड दिखा- ‘सोल्ड आउट।’ मतलब मैच की सभी टिकटें बिक चुकी हैं। एक अन्य बोर्ड पर लिखा था, ‘नकली टिकट बेचने वालों से सावधान!’ गेट पर वेलकम करने वाले सिक्युरिटी स्टाफ ने बताया कि जिन भारतीयों को टिकट नहीं मिला, वह मुंहमांगी कीमत पर खरीदने को तैयार हैं। हमारा यही संदेश है कि नकली टिकट खरीदकर फंसने से बेहतर है कि आप मैनचेस्टर के स्पोर्ट्स बार में बड़ी स्क्रीन पर मैच का मजा लें।
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