लंदनग्रेग चैपल इस मुकाम को नहीं छू पाए और रिकी पॉन्टिंग व माइकल क्लार्क भी दो-दो मौके मिलने पर यह हासिल नहीं कर पाए। पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के कप्तान के पास इतिहास में दर्ज होने का मौका है। ऑस्ट्रेलियाई टीम अगर इंग्लैंड में गुरुवार से शुरू हो रहे टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ हार टाल देती है तो पेन इंग्लैंड में एशेज सीरीज जीतने वाले कप्तानों की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। 18 साल पहले की टीम ने इंग्लैंड को 4-1 से हराया था। उसके बाद कोई भी कंगारू टीम इंग्लैंड की धरती पर एशेज नहीं जीत पाई है। वॉ, चैपल, पॉन्टिंग और क्लार्क का नाम ऑस्ट्रेलिया के महान क्रिकेटरों और कप्तानों में शामिल होता है। कोई भी यहां तक कि खुद पेन भी खुद को उस श्रेणी में नहीं रखना चाहेंगे। और जिन हालात में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी मिली वह भी काफी असामान्य थे। परंपरागत रूप से ऑस्ट्रेलिया अपने सर्वश्रेष्ठ 11 खिलाड़ी पहले चुनती है और उसके बाद उसमें से एक को कप्तान नियुक्त किया जाता है। वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड में 'लीडरशिप क्वॉलिटी' पर काफी लंबे समय से काफी जोर है। वहां पहले कप्तान चुनने और फिर उसके साथ के बाकी 10 खिलाड़ी चुनने का चलन है। पेन का मामला अलग था। मार्च 2018 में बॉल टैंपरिंग मामला होने के बाद स्टीव स्मिथ को कप्तानी और टीम से हाथ धोना पड़ा। डेविड वॉर्नर जो उस समय टीम के उपकप्तान थे, टीम से बाहर कर दिए गए। इस 'सैंडपेपर कांड' के बाद दोनों पर 12 महीने का प्रतिबंध लगा। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों को ऐसे खिलाड़ी की जरूरत थी जो इस मुश्किल वक्त में टीम की कमान संभाल सके। साथ ही उस पर इन सब बातों का ज्यादा असर न हो। पेन ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्डस में साल 2010 में खेला। वर्ष 2017 में वह संन्यास लेने के काफी करीब पहुंच गए थे। इसके साथ ही उन्होंने खेल का सामान बनाने की कंपनी के साथ जॉब करने का भी इरादा कर लिया था। हालांकि टीम में दोबारा जगह बनाने के बाद एक साल के भीतर ही उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी गई। पेन को इसके बाद से ही 'ऐक्सिडेंटल' कप्तान के साथ-साथ टीम में उपयुक्त नहीं जैसे संबोधनों को झेलना पड़ता है। लेकिन हेडिंग्ले में एक विकेट की हार के बाद पेन ने बहुत परिपक्वता से काम लिया। इसके बाद रविवार को उन्होंने मैनचेस्टर में 185 रनों की जीत में टीम की अगुआई की। ऑस्ट्रेलिया अब सीरीज में 2-1 से आगे है और एशेज पर उसका कब्जा बरकरार है। पेन ने कहा था, 'वह हार (हेडिंग्ले) ऐसी थी जो अधिकतर टीमों को तोड़ दे, लेकिन हम नहीं टूटे।' 34 वर्षीय पेन ने सीरीज के इस नतीजे को निजी उपलब्धि के तौर पर लिया। उन्होंने कहा, 'मेरे सपना यहां आकर एशेज जीतने का था। बेशक मैंने एक कप्तान के रूप में आकर यह हासिल करने के बारे में नहीं सोचा था।'
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