नई दिल्ली पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड () के अध्यक्ष बन गए हैं। अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट और प्रथम श्रेणी के क्रिकेटरों की स्थिति में सुधार करने की बात कही है। गांगुली के भारतीय बोर्ड का मुखिया बनने के बाद अब यह देखना जरूरी हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) में की क्या स्थिति रहती है। जब से आईसीसी में बीसीसीआई प्रतिनिधि के रूप में एन श्रीनिवासन हटे हैं, तब से ही आईसीसी लगातार बीसीसीआई के खिलाफ कुछ ना कुछ करता रहा है। आईसीसी के चेयरमैन शंशाक मनोहर हैं, जो कि भारतीय हैं। इसके बावजूद उन्होंने आईसीसी में बीसीसीआई की ताकत को कम कर दिया है। आने वाले महीनों में गांगुली के सामने सबसे बड़ी चुनौती आईसीसी से बीसीसीआई को उसका वाजिब शेयर दिलाना है। गांगुली ने अध्यक्ष बनने के बाद वादा करते हुए कहा था, 'अगले पांच साल में बीसीसीआई को आईसीसी से 372 मिलियन डॉलर लेने हैं, जिससे हम विश्व कप की तैयारी कर सकें क्योंकि हमें दो वर्ल्ड कप का आयोजन करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि यह हमें मिले।' इस मामले की जानकारी रखने वाले एक नए अधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इन चीजों को संज्ञान में लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में जो कुछ हुआ है वह अब अतीत की बात है। हम कई सारे बैठकों के लिए बैठक आयोजित करेंगे और ध्यान केंद्रित करने वाले प्राथमिक क्षेत्र में से एक आईसीसी के संबंध में भारत की स्थिति होगी।' अधिकारी ने आगे कहा, 'सबसे पहले, काम करने वाले टीम के लिए आगे की राह पर एक फैसला देने के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है और अगर मनोहर को जारी रखना है फरवरी 2020 तक ग्राउंडवर्क शुरू हो जाएगा, जबकि मनोहर का कार्यकाल मई 2020 में समाप्त होगा।'
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