Monday, November 25, 2019

उम्र की सीमा नहीं लेकिन ‘कूलिंग ऑफ’ नियम में बदलाव जरूरी: धूमल

नई दिल्ली बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष ने सोमवार को कहा कि बोर्ड की आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में पदाधिकारियों के 70 साल की उम्र सीमा को बदलने के बारे में विचार नहीं किया जाएगा लेकिन कूलिंग ऑफ (दो कार्यकाल के बाद विश्राम का समय) के नियम को बदलने पर विचार किया जाएगा क्योंकि इससे अधिकारियों के अनुभव का सही फायदा होगा। सौरभ गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद पहली एजीएम के लिए जारी कार्यसूची में बोर्ड ने मौजूदा संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आधारित सुधारों पर असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित नए कानून के मुताबिक बीसीसीबाई या राज्य संघों में तीन साल के कार्यकाल को दो बार पूरा करने वाले पदाधिकारी को तीन साल तक ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ में रहना होगा। बीसीसीआई के नए पदाधिकारी चाहते है कि ‘कूलिंग ऑफ’ का नियम उन पर लागू हो जिन्होंने बोर्ड या राज्य संघ में तीन-तीन साल का दो कार्यकाल पूरा किया है यानी बोर्ड और राज्य संघ के कार्यकाल को एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। धूमल ने कहा, ‘हमने उम्र की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है। उसे पहले की तरह रहने दिया है। कूलिंग ऑफ पीरियड के मामले में हमारा मानना यह है कि अगर किसी ने राज्य संघ में काम का अनुभव हासिल किया है तो उस अनुभव का फायदा खेल के हित में होना चाहिए। अगर वह बीसीसीआई के लिए योगदान कर सकता है तो उसे ऐसा करना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘राज्य संघ में दो कार्यकाल पूरा करने के बाद अगर किसी का कूलिंग ऑफ पीरियड 67 वर्ष की उम्र में शुरू होता है तो इस अवधि के खत्म होने तक वह 70 साल का हो जाएगा और बीसीसीआई के लिए कोई योगदान नहीं कर सकेगा।’ बीसीसीआई चाहता है कि अध्यक्ष और सचिव को कूलिंग आफ से पहले लगातार दो कार्यकाल जबकि कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को तीन कार्यकाल मिलने चाहिए। गांगुली की अगुआई में वर्तमान पदाधिकारियों ने पिछले महीने ही पदभार संभाला था जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति का 33 महीने का कार्यकाल समाप्त हो गया था। उन्होंने कहा, ‘आप ने पिछले महीने बीसीसीआई के चुनावों में देखा होगा। निर्वाचन नामावली में शामिल 38 सदस्यों में सिर्फ चार या पांच के पास इससे पूर्व किसी बैठक में शामिल होने का अनुभव था। ऐसे में किसी ने अगर राज्य संघ में अनुभव हासिल किया है तो उस अनुभव का लाभ बीसीसीआई को मिलना चाहिए। आपने एक चाल में कई राज्यों में सभी पदाधिकारियों को अयोग्य करार दिया। (लोढ़ा समिति की सुधारों के मुताबिक)।’ धूमल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों में छूट दी है जिसमें एक राज्य, एक वोट शामिल है। उन्होंने कहा, ‘हम एजीएम में पारित हुए सभी संशोधनों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेंगे। कुछ चीजों में हम व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं जिसके बारे में उन्हें अवगत करायेंगे। अगर न्यायालय हमारे संशोधनों से सहमत होता है तो हम उसे लागू करेंगे।’ धूमल से जब पूछा गया कि अगर संशोधनों को मंजूरी मिल जाती है तो क्या लोढ़ा सुधार से समझौता किया जाएगा? तो उन्होंने कहा, ‘कई सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही हटा दिया। वे समझ रहे थे कि एक राज्य एक वोट के संबंध में तकनीकी कठिनाइयां है। हमारे पास अधिकतर सिफारिशों को लेकर कोई समस्या नहीं है, लेकिन कुछ के साथ तकनीकी दिक्कतें हैं।’


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