रुचिर मिश्रा, इंदौर भारतीय क्रिकेट टीम में अब तक तेज गेंदबाजों का एक अच्छा पूल कभी साथ खेलते नहीं नजर आया। 1970 के दशक के अंत में कपिल देव का टीम में आना एक क्रांति की तरह था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य से हटने से पहले उन्हें कम ही समय के पेस बोलर के रूप में साझेदार मिले। पढ़ें, टीम इंडिया को 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप दिलाने वाले कपिल का मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। जवागल श्रीनाथ के उभरने से उम्मीदें जगीं लेकिन तब भी कोई तेज-गेंदबाजी पूल नहीं था। ऐसा तब भी देखने को मिला जब जहीर खान ने खेलना शुरू किया था। इशांत के आने से बदली स्थितियह समस्या तब तक बनी रही जब इशांत शर्मा 19 साल के हो गए। किस्मत ने बाजी मारी और आज इशांत इंटरनैशनल लेवल पर एक दिग्गज के रूप में विश्वस्तरीय तेज गेंदबाजों के साथ खेलते हुए नजर आते हैं। इशांत, मोहम्मद शमी, उमेश यादव और जसप्रीत बुमराह के रूप में भारत के पास ऐसा तेज गेंदबाजी आक्रमण है जो अधिकांश टीमों के लिए खतरा पैदा करता है। हर ओर से दबावसंभवत: पहली बार ऐसा हो रहा है जब भारत के तेज गेंदबाज, हर कोई अपने दम पर मैच जिताने का दम रखता है, विकेट और जिम्मेदारी साझा कर रहे हैं। अब हर विपक्षी टीम के लिए दोनों छोर से दबाव बना हुआ है और किसी तरह की कोई राहत नजर नहीं आती है। बांग्लादेश 3 दिन में ही हाराऐसी उम्मीद की जा रही थी कि अनुभवहीन बांग्लादेश उनके खिलाफ संघर्ष करेगा लेकिन उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी शानदार प्रदर्शन किया जिसमें स्पिनरों द्वारा 34 की तुलना में 26 विकेट लिए गए। साल 2015 के उलट, जब भारत ने स्क्वायर टर्नर पसंद किए, तो उन्होंने प्रतिस्पर्धी विकेट पर मैच खेले और फिर भी दक्षिण अफ्रीका को बड़े अंतर से हराया। कोच भी संतुष्टस्वाभाविक रूप से, टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच भरत अरुण इस प्रदर्शन से संतुष्ट होंगे। अरुण ने कहा, 'उनमें (भारतीय गेंदबाजों) कुछ अधिक करने की भूख नजर आती है। हमारा गेंदबाजी आक्रमण बेहद कुशल है। जब आप अनुशासन के साथ अपने कौशल का प्रयोग करते हैं तो यह बार-बार अच्छा प्रदर्शन करने का मौका देता है।' 38 बार विपक्षी ऑलआउटटीम इंडिया ने 2018 के बाद से सबसे अधिक, 38 बार, विपक्षी टीमों को ऑलआउट किया जो इस कहानी को खुद अच्छे से बताता है। इसके बाद इंग्लैंड का नंबर आता है जिसने ऐसा 30 बार किया। कप्तान को भी अपनी टीम के इन तेज गेंदबाजों पर गर्व है। विराट का ड्रीम बोलिंग कॉम्बिनेशनकैप्टन कोहली ने कहा, 'तेज गेंदबाज अपने खेल में टॉप पर हैं। पिच भी अलग तरह की नजर आती है जब वे गेंदबाजी करते हैं। फिलहाल, जसप्रीत टीम का हिस्सा नहीं हैं। जब वह वापस आएंगे तो यह और भी कमाल होगा। यह किसी भी कप्तान के लिए एक 'ड्रीम बॉलिंग कॉम्बिनेशन' है। यहां तक कि स्लिप फील्डर्स भी तैयार हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि गेंद कभी भी आ सकती है।' पढ़ें, पहले जैसे नजर नहीं आती टीम बांग्लादेश के कोच रसेल डोमिंगो ने 2015 में देखा कि भारत ने स्क्वायर टर्नर चुने जब वह साउथ अफ्रीका के साथ थे। चार साल बाद, विकेट पर काफी कुछ बदल गया है। उन्होंने कहा, 'पहले भारत ने स्पिन पिचों पर घरेलू मैदान पर मैच जीते। अब, इस तरह का नजर नहीं आता है।'
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