Sunday, November 3, 2019

दिल्ली में क्यों घुटता है विदेशी टीमों का दम?

अभिमन्यु माथुर, नई दिल्ली राजधानी दिल्ली और आसपास के शहरों में शुक्रवार को जब प्रदूषण का स्तर 'गंभीर प्लस' कैटिगरी को पार कर गया तो पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने दिल्ली-एनसीआर में हेल्थ इमर्जेंसी की घोषणा कर दी। इस इमर्जेंसी का सीधा मतलब यह है कि दिल्ली-एनसीआर में सांस लेने के लिए हालात सामान्य नहीं हैं और यहां हालात सामान्य होने तक स्कूल बंद हैं, निर्माण कार्यों पर रोक है और लोगों को भी सलाह दी गई है कि जितना संभव हो सके वह घरों से बाहर न निकलें। इस सबके बावजूद राजधानी दिल्ली में आज भारत और बांग्लादेश के बीच टी20 इंटरनैशनल मैच खेला जाएगा। इन हालात में यहां मैच को लेकर सवाल किए गए तो बीसीसीआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने गुरुवार को मीडिया से कहा था, 'हम यहां (बोर्ड में) 23 अक्टूबर को ही आए हैं और अब अंतिम क्षणों में अचानक से ही मैच का स्थान नहीं बदला जा सकता। भविष्य में जब हम मैचों को तय करेंगे, तब सर्दियों के दिनों में खासतौर से यह ध्यान रखेंगे कि उत्तर भार में मैच से पहले इन स्थितियों को भी परख लें।' इस सबके बीच बांग्लादेश के खिलाड़ी इस मैच से पहले कोटला मैदान पर ऐंटी पलूशन मास्क पहनकर अभ्यास कर रहे हैं। बांग्लादेश के कोच रसेल डोमिंगो ने इस प्रदूषित हुए माहौल में अभ्यास को लेकर कहा था, 'यह जरूर है कि हम लोग अपनी आंखों में कुछ तकलीफ (जलन और खुजली), गले में खराश जैसी समस्याएं अपनी ट्रेनिंग के दौरान और बाद में भी महसूस कर रहे हैं। लेकिन... यहां हालात ऐसे भी नहीं हैं कि कोई बीमार हो जाए या किसी की जान पर बन आए।' यह कोई पहला मौका नहीं है, जब दिवाली के बाद कोई टीम यहां दिल्ली के जहरीले हो चुके इस वातावरण का सामना कर रही हो। इससे पहले दिसंबर 2017 में भी श्रीलंका की टीम जब यहां टेस्ट मैच खेल रही थी, तब भी हालात ऐसे ही खतरनाक थे। तब मैच के दौरान श्रीलंकाई टीम को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते दो बार खेल रोकना पड़ा था। उसके खिलाड़ी यहां सांस लेने में समस्या और बीमार होने की शिकायत कर रहे थे। इस बीच कुछ खिलाड़ियों ने मैदान पर उल्टी भी कर दी थी और कुछ ड्रेसिंग रूम पहुंचकर गिर पड़े थे। तब उनके कोच निक पोथास ने ड्रेसिंग रूम में पहुंचे अपने खिलाड़ियों की हालत के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, 'हमारे खिलाड़ी मैदान से बाहर आ गए और ड्रेसिंग रूम में उल्टियां कर रहे थे। हमारे चेंज रूम में ऑक्सिजन सिलेंडर रखे गए थे। यह खिलाड़ियों के लिए सामान्य चीज नहीं थी कि वह खेलकर बीमार पड़ रहे थे।' हालांकि तब कई भारतीय फैन्स और यहां तक खेल से जुड़े प्रशासक यह मान रहे थे कि श्रीलंकाई खिलाड़ी बेवजह इसे तिल का ताड़ बना रहे हैं। तब बोर्ड के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने कहा था, 'अगर ऐसे ही माहौल में 20,000 लोग स्टैंड्स में बैठकर मैच देख सकते हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं है यहां तक टीम इंडिया के खिलाड़ियों को भी ऐसी कोई समस्या नहीं है तो फिर मुझे हैरानी है कि लंकाई टीम इसे इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना रही है।' लेकिन सच यह है कि भारतीय फैन्स और ज्यादातर भारतीय खिलाड़ी दिल्ली के इस दमघोंटू धुएं वाले इन हालात के आदी हो चुके हैं। इस बार जब टीम के बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ से- जो पंजाब के पूर्व क्रिकेटर भी हैं- यह पूछा गया कि भारतीय खिलाड़ी इस प्रदूषण से निपटने के लिए क्या खास इंतजाम कर रहे हैं। उन्होंने जवाब में बताया, 'मैं अपने पूरे जीवन भर उत्तरी भारत में ही खेला हूं। हम इन हालात के आदी हो चुके हैं। हम अक्सर ऐसी ही परिस्थितियों में खेलते रहे हैं। तो ऐसे इन हालात से रक्षा करने के लिए कुछ भी खास नहीं कर रहे हैं।' लेकिन यहां दौरा करने वाली विदेशी टीमें इन हालात से कहीं बेहतर हालात वाले शहरों में रहती हैं। ऐसे में हैरानी नहीं होनी चाहिए कि जो टीमें यहां आती हैं उन्हें यहां खेलना तो दूर सांस लेने में भी असहज महसूस होता है। यहां तक अगर हम राजकोट और नागपुर की भी बात करें, जहां इस सीरीज के बाकी दो मैच खेले जाने हैं वहां के हालात दिल्ली से कहीं ज्यादा बेहतर हैं। 2 नवंबर को राजकोट और नागपुर में हवा की गुणवत्ता (AQI) स्तर क्रमश: 91 और 143 था। इनकी तुलना दिल्ली के घातक स्तर 423 से करें तो यहां के हालात कहीं गुना बेहतर हैं।


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