अरानी बसु, नई दिल्ली का कार्यकाल पूरा हो चुका है और उनकी जगह पूर्व क्रिकेटर सुनील जोशी टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता बन चुके हैं। पद छोड़ने के बाद 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कई मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने बताया कि उनकी सिलेक्शन कमिटी के सामने सीनियर स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और को वाइट क्रिकेट से ड्रॉप करना और पूर्व कप्तान का उत्तराधिकारी का चुनाव सबसे मुश्किल फैसला रहा। ये काम रहे सबसे चुनौतीपूर्ण उन्होंने बताया कि अश्विन और जडेजा को लिमिटेड ओवरों की टीम से बाहर रखना और धोनी का रिप्लसमेंट चुनना। ये दोनों ही फैसले हमारे लिए चुनौतीपूर्ण रहे। साथ ही उन्होंने वर्ल्ड कप हार के लिए नंबर-4 पर उपयुक्त बल्लेबाज नहीं होना सबसे बड़ा कारण होने से इनकार किया। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा नहीं लगता है कि नंबर-4 के बल्लेबाज की वजह से वर्ल्ड कप गंवाया। सेमीफाइनल तक हम टेबल पर टॉप पर थे। सिर्फ एक सेशन खराब होने की वजह से हार मिली।' ये था लक्ष्य युवराज सिंह और एमएस धोनी मामले से निपटने के बारे में उन्होंने कहा, 'धोनी और युवराज दोनों ही मान हैं और मुझे नहीं लगता कि किसी ने इन मामलों में टांग अड़ाई, लेकिन इसे सुलझाना मुकिश्ल था। हमारा लक्ष्य था कि हम टीम के लिए युवा टैलेंट खोजे और उन्हें तैयार करें। हमने एसा किया भी।' किसके साथ अधिक मजा आया कप्तान कोहली, शास्त्री और कुंबले में से किसके साथ काम करना अधिक पसंद है? सवाल पर उन्होंने कहा, 'सभी प्रफेशनल हैं। वे सभी अपना काम जानते हैं और उनके साथ काम करने में मजा आया। यह उचित नहीं होगा यदि मैं कप्तानों एमएसडी, विराट, रोहित और अजिंक्य के साथ-साथ कोच रवि, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ और उनके संबंधित टीम प्रबंधन को धन्यवाद देता हूं जिनके साथ मैंने पिछले 4 वर्षों से काम किया है।'
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