Monday, April 27, 2020

टीम से बाहर हुआ तो लगा तमाचा पड़ा है: अश्विन

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दो मैचों में खराब प्रदर्शन के बाद भारत के शीर्ष ऑफ स्पिनर () को पता चल गया था कि T20 में गेंदबाजी करना आसान नहीं होता। इस वास्तविकता ने उन्हें एक दशक पहले कड़ा सबक सिखाया था। क्रिकेटर से कॉमेंटेटर बने () के साथ ईएसपीएनक्रिकइन्फो के लिए पोडकास्ट में अश्विन ने बताया कि चेन्नै सुपरकिंग्स (CSK) की तरफ से खेलते हुए आईपीएल 2010 ने उन्हें किस तरह से प्रभावित किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की मुश्किल परिस्थितियों में खेलने पर बात की और बताया कि कि आखिर उनके स्पिन जोड़ीदार रविंद्र जडेजा 'क्यों नैसर्गिक खिलाड़ी' हैं। अश्विन ने आईपीएल 2010 को याद किया जब दो मैचों में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें सीएसके की टीम से बाहर कर दिया गया। यह उनके लिए कड़ा सबक था क्योंकि उन्हें लगता था कि स्टीफन फ्लेमिंग ने उनसे बात नहीं की और उन्हें टीम प्रबंधन का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला था। अश्विन ने कहा, 'लोग सोचते थे कि मैं खुद को बहुत अच्छा गेंदबाज मानता हूं लेकिन जब आईपीएल में खेलता हूं तो इस तरह से बुरा प्रदर्शन करता हूं। यह एक तमाचे की तरह था जैसे कोई बोल रहा हो कि तुम यहां के लायक भी नहीं हो।' उन्होंने कहा, 'मैं सोचता था कि प्रथम श्रेणी मैचों की तुलना में टी20 मैच में गेंदबाजी करना आसान होता है।' यह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) के खिलाफ मैच था, जिसमें रॉबिन उथप्पा और मार्क बाउचर ने उनकी गेंदों की जमकर धुनाई की थी। अश्विन ने कहा, 'रॉबिन उथप्पा और मार्क बाउचर ने मुझे कड़ा सबक सिखाया। मैंने 14वां, 16वां, 18वां और 20वां ओवर किया था। मैं युवा था और नहीं जानता था कि यह एक चुनौती है। मुझे लगा कि यह विकेट हासिल करने का अच्छा मौका है।' इस दिग्गज ऑफ स्पिनर ने कहा, 'मुझे विकेट तो मिला नहीं लेकिन मैंने 40 या 45 रन लुटाकर अपनी टीम को परेशानी में डाल दिया था। अगला मैच सुपर ओवर तक खिंचा और हम हार गए। मुझे टीम से बाहर कर दिया गया। मुझे लगा जैसे किसी ने मुझ पर करारा तमाचा जड़ दिया है।' ये वे दिन थे जब आईपीएल फ्रैंचाइजी घरेलू मैचों के दौरान होटल की लागत बचाने के लिए केवल शीर्ष 18 खिलाड़ियों को ही टीम में रखते थे। अश्विन को भी घर में बैठकर सीएसके के मैच देखने पड़े थे। उन्होंने कहा, 'मुझे बाहर कर दिया गया। मुझे होटल छोड़ना पड़ा और मैं घर में बैठ गया। मुझे लगा कि मैं इससे बेहतर का हकदार था क्योंकि मैं वेस्ट इंडीज में होने वाले विश्व टी20 के 30 संभावित खिलाड़ियों (अश्विन तब भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाए थे) में शामिल था। अश्विन ने स्वीकार किया कि फ्लेमिंग उनसे नाराज थे और इसलिए सीएसके के टीम प्रबंधन ने उनका पक्ष नहीं लिया। उन्होंने कहा, 'मैंने पहले तीन मैचों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। केवल दो मैचों में मेरा प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। असल में मेरे स्टीफन फ्लेमिंग से बहुत अच्छे संबंध नहीं थे और उन्होंने मुझसे बात तक नहीं की। इसलिए मैं घर में बैठकर सीएसके के मैच देख रहा था और वादा कर रहा था कि एक दिन मैं परिदृश्य बदल कर रहूंगा।' इसके बाद अश्विन ने लंबा सफर तय कर लिया है। इस 33 वर्षीय गेंदबाज ने अब 71 टेस्ट मैचों में 365 विकेट लिए हैं लेकिन साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में उनका रेकॉर्ड प्रभावशाली नहीं है। अश्विन ने कहा, 'मैंने इंग्लैंड में जितने मैच खेले उनसे मुझे यह अहसास हो गया कि एक स्पिनर के लिए विपरीत परिस्थितियों में गेंदबाजी करते हुए (घरेलू परिस्थितियों जैसा) रेकॉर्ड बरकरार रखने के लिए सही समय पर गेंदबाजी करने की जरूरत होती है। दूसरी बात आपको थोड़ा भाग्य की भी जरूरत पड़ती है।' अश्विन ने इसके साथ ही कहा कि उनके साथी स्पिनर जडेजा नैसर्गिक तौर पर फिट खिलाड़ी हैं, जिन्हें फिट रहने के लिए उनकी तरह अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर मैं दिन में दो बार भी अभ्यास करता हूं और फिर अच्छी कैलोरी वाला भोजन करता हूं तो मेरी फिटनेस गड़बड़ा जाएगी। कुछ लोगों को ईश्वर का आशीर्वाद होता है। मुझे इस मामले में रविंद्र जडेजा से तुलना करना पसंद है। उन्हें ईश्वर का आशीर्वाद है, वह शारीरिक तौर पर बेहद फिट खिलाड़ी हैं। जडेजा नैसर्गिक क्रिकेटर, नैसर्गिक गेंदबाज, नैसर्गिक बल्लेबाज हैं।'


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