नई दिल्ली युवा बल्लेबाज ने खुलासा किया है कि उन्हें एक बार ऐसा लगा था कि श्रेयस बुरी संगत में फंस गए हैं। वनडे में बल्लेबाजी क्रम में नंबर-4 पर अपनी स्थिति को मजबूत कर लेने वाले श्रेयस के पिता संतोष अय्यर ने कहा, ‘जब श्रेयस चार साल का था तब हम घर में ही प्लास्टिक बॉल से क्रिकेट खेला करते थे। वह जिस तरह से बॉल को मिडल करता था उसे देखकर मुझे अंदाजा हो गया था कि इसमें असली टैलंट है। इसलिए हमने उसके टैलंट को निखारने के लिए जो कुछ हो सकता था वह सब किया।’ खो दिया था फोकससीनियर अय्यर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है जब श्रेयस मुंबई अंडर-16 टीम के लिए खेलते थे और उनके प्रदर्शन में लगातार गिरावट आ रही थी। एक कोच ने उनसे कहा कि उनके बेटे में फोकस की कमी है, जिससे वह चिंतित हो गए। श्रेयस के पिता ने कहा, ‘एक कोच ने जब मुझसे कहा कि आपके बेटे में टैलंट तो है, लेकिन वह अपना फोकस खो बैठा है, तो मैं चिंतित हो गया। मुझे लगा कि वह या तो प्यार में पड़ गया है या फिर किसी बुरी संगत में फंस गया है।’ मनोचिकित्सक के पास ले गए ऐसे हालात में अमूमन माता-पिता बच्चों के साथ कड़ाई से पेश आकर उन्हें समझाते हैं, लेकिन संतोष ने ऐसा नहीं किया। वह अपने बेटे को खेल मनोचिकित्सक के पास लेकर गए। उन्होंने बताया कि यह आज से करीब 8-9 साल पहले की बात है। उस वक्त खिलाड़ियों के मेंटल हेल्थ को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी। उन्होंने कहा, ‘आखिरकार मुझे कहा गया कि चिंता करने वाली कोई बात नहीं है, हर खिलाड़ी की तरह श्रेयस भी फिलहाल अपने बुरे दौर से गुजर रहा है और जल्द ही यह दौर खत्म हो जाएगा। और ऐसा ही हुआ। उसने जल्द ही फॉर्म हासिल कर ली और फिर पलटकर नहीं देखा।’
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