Thursday, April 23, 2020

जब गेंदों की धुनाई के बाद वॉर्न ने लिया था ‘बर्थडे बॉय’ तेंडुलकर से ऑटोग्राफ

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों का शतक जमाने वाले सचिन तेंडुलकर () ने इनमें से एक शतक अपने जन्मदिन यानी 24 अप्रैल को भी बनाया था जिसमें उन्होंने (Shane Warne) की गेंदों की जमकर धुनाई करके इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज को ऑटोग्राफ लेने के लिए मजबूर कर दिया था। तेंडुलकर और वॉर्न के बीच द्वंद्व क्रिकेट जगत के सबसे चर्चित व्यक्तिगत मुकाबलों में शामिल रहा है लेकिन शारजाह में 24 अप्रैल 1998 को ऑस्ट्रेलिया का शातिर लेग स्पिनर भारतीय मास्टर ब्लास्टर के आगे नतमस्तक था। आखिर तीन दिन के अंदर दूसरी बार उनकी गेंदों की जमकर धुनाई हुई थी जिसे खुद वॉर्न ने भी स्वीकार किया था। कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अहम योगदान देने वाले चिकित्सकों, नर्सों, चिकित्सा सहयोगियों, पुलिसकर्मियों, सैन्यकर्मियों और सफाईकर्मियों के सम्मान में तेंडुलकर ने हालांकि कल अपना 47वां जन्मदिन नहीं मनाने का फैसला किया है। लेकिन आज से 22 साल पहले तेंडुलकर ने अपने 25वें जन्मदिन का भरपूर जश्न भी मनाया था और इस बीच उन्हें दो ‘अनोखे उपहार’ भी मिले थे। इसे भी पढ़ें- भारत ने तेंडुलकर के दम पर शारजाह में तब त्रिकोणीय श्रृंखला जीती थी। तेंडुलकर मैन ऑफ द सीरीज और फाइनल के मैन ऑफ द मैच बने थे लेकिन अपने जन्मदिन पर उन्हें सबसे बड़ा पुरस्कार किसी और ने नहीं बल्कि स्वयं वॉर्न ने दिया था। उन्होंने अपनी शर्ट निकाली और तेंडुलकर को उस पर आटोग्राफ देने के लिए कहा। यह उस टूर्नामेंट का यादगार क्षण बन गया था। तेंडुलकर को दूसरा बड़ा इनाम ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन कप्तान स्टीव वॉ (Steve Waugh) ने दिया था जिन्होंने पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान कहा था कि उनकी टीम को भारत ने नहीं बल्कि सचिन तेंडुलकर (Tendulkar) ने हराया। तेंडुलकर ने एक साक्षात्कार में इसका जिक्र करते हुए कहा था, ‘मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह विशेष बन गया था। स्टीव वॉ ने कहा था कि वे मुझसे हार गए। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने यह बात उस दिन कही थी जिस दिन मेरा 25वां जन्मदिन था। जन्मदिन पर इससे बेहतर कोई उपहार नहीं हो सकता था।’ ऑस्ट्रेलियाई टीम बेहतरीन फॉर्म में चल रही थी। सीरीज में उसने लीग चरण के सभी चारों मैच जीते। भारत और न्यूजीलैंड ने एक-एक मैच में एक-दूसरे को हराया था। भारत को अपना आखिरी लीग मैच 22 अप्रैल को खेलना था। उस दिन शारजाह में भयंकर तूफान आया था लेकिन मैदान पर तेंडुलकर तूफान लेकर आए थे। यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन दिन के अंदर खेली गयी उनकी दो शतकीय पारियों को क्रिकेट जगत में आज भी ‘डेजर्ट स्ट्रोम’ के नाम से जाना जाता है। भारत को फाइनल में पहुंचने के लिए आखिरी लीग मैच में जीत या कम अंतर से हारने की जरूरत थी। भारत के सामने 285 रन का लक्ष्य था और ऐसे में तेंडुलकर ने 143 रन की बेजोड़ पारी खेली थी जिसे आज भी वनडे की सर्वश्रेष्ठ पारियों में गिना जाता है। इसे भी पढ़ें- भारत करीबी अंतर से मैच हार गया था लेकिन तेंडुलकर ने इससे पहले उसे फाइनल में पहुंचा दिया था। फाइनल तेंडुलकर के 25वें जन्मदिन पर था। इस बार भारत के सामने 273 रन का लक्ष्य था। तेंडुलकर ने 134 रन बनाए और भारत को जीत दिलाई। मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद 25 हजार दर्शकों ने तेंडुलकर से वॉर्न पर छक्का जड़ने की मांग की तो इस स्टार बल्लेबाज ने आगे बढ़कर गेंदबाज के सिर के ऊपर से छक्का लगा दिया था। कॉमेंटेटर टोनी ग्रेग ने वॉर्न और फिर माइकल कास्प्रोविच पर लगाए गए तेंडुलकर के छक्कों को देखकर कहा था, ‘‘अगर कोई (डॉन) ब्रैडमैन के बेहद करीब है, तो यह छोटे कद का इंसान है।’


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