रूपेश सिंह, नई दिल्लीचीन से फैले घातक कोरोना वायरस के कारण कई देशों में जनजीवन पर बड़ा असर पड़ा है और खेल जगत भी इससे अछूता नहीं है। स्थानीय मैचों में अंपायरिंग और स्कोरिंग करने वालों की लॉकडाउन के दौरान मुसीबत बढ़ गई है। इनमें से बहुतेरे ऐसे हैं जिनकी आजीविका ही क्रिकेट मैचों से चलती है। एक तो खेल पूरी तरह बंद हैं दूसरे दिल्ली ऐंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन () ने पिछले साल सितंबर से इनका मेहनताना नहीं दिया है। लॉकडाउन बढ़ने और खेलों के लंबे समय तक स्थगित रहने से इनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। पर इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। देखें, मैच बंद, कमाई बंदशहर में कई टूर्नमेंट और मैच होते रहते हैं और ये अंपायर और स्कोरर उन मैचों में ड्यूटी करके प्रति दिन अधिकतम 1500 रुपये तक की कमाई कर लेते हैं। शहर के एक प्रतिष्ठित अंपायर ने बताया, ‘40 प्रतिशत ऐसे हैं जिनकी कमाई का जरिया सिर्फ स्कोरिंग या अंपायरिंग ही है और उनकी कमाई भी इतनी नहीं थी कि वह कुछ ज्यादा बचत भी कर सकें।’ स्थानीय टूर्नमेंट में मिलते हैं 800-1500 रुपयेअंपायर्स को लोकल टूर्नमेंट से 800 से 1500 रुपये तक प्रतिदिन मिलता है। इसी तरह स्कोरर्स को 500 से 800 रुपये तक का पेमेंट होता है। एक सामान्य अंपायर महीने में 20 हजार रुपये तक कमा लेता है। जब सीजन चलता है तो दिल्ली-एनसीआर के तकरीबन 50 ग्राउंड्स पर दो-दो मैच भी खेले जाते हैं। फिलहाल सब बंद है। सितारे भी नहीं पूछ रहेमुंबई में आजीविका के लिए पूरी तरह से क्रिकेट पर निर्भर इस तरह के लोगों की मदद के लिए राज्य क्रिकेट संघ और कुछ पूर्व अंपायरों ने मिलकर फंड तैयार किया है। अन्य कई जगह भी बड़े क्रिकेटर्स व अधिकारियों ने अपने स्तर पर मदद का प्रयास किया है। दिल्ली में भी कई नामी-गिरामी क्रिकेटर्स हैं, लेकिन मदद के लिए अभी तक कोई भी आगे नहीं आया है। एक अंपायर ने कहा, ‘मैंने खुद कई लोकल मैचों में भी अंपायरिंग की है और ये आज के सितारे उन मैचों में खेले भी हैं। कई को मैंने अपने स्कूटर से मैदान तक पहुंचाया है। ये बच्चे भी दिल्ली क्रिकेट की मदद को आगे नहीं आ रहे हैं।’
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