नई दिल्ली पाकिस्तान के पूर्व कप्तान जावेद मियांदाद अपने खेल के साथ-साथ विपक्षी खिलाड़ियों पर मानसिक दबाव बनाने के लिए जाने जाते थे। मियांदाद की कोशिश रहती थी कि किसी तरह सामने वाली टीम को बैकफुट पर रखा जाए। बल्लेबाजी करते हुए वह अकसर विपक्षी टीम के गेंदबाजों की स्लेजिंग करते रहते थे। इसका उन्हें कई बार फायदा भी होता था लेकिन एक बार ऐसा हुआ कि यह दांव उन्हें उल्टा पड़ गया। 1989-90 में पाकिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही थी। सीरीज का दूसरा टेस्ट ऐडिलेड ओवल पर खेला जा रहा था। इस मैच में मियांदाद ने ह्यूज से पंगा लेने की सोची। उन्होंने ह्यूज के शरीर को लेकर उनका मजाक उड़ाया। मियांदाद ने कहा, 'तुम क्रिकेट खेलने के लिए बहुत मोटे हो, तुम्हें तो बस में ड्राइवर होना चाहिए।' जावेद बार-बार उन्हें मुंह से हॉर्न की आवाज निकालकर चिढ़ाते रहे। उनकी कोशिश थी किसी तरह ह्यूज की गेंदबाजी लय बिगाड़ी जाए। यह बात ह्यूज को बुरी लग गई पर उन्होंने इस पर जवाब देने के बजाय गेंदबाजी जारी रखी। पांच ओवर बाद ह्यूज ने राउंड द विकेट जाने का फैसला किया। टीम के साथी खिलाड़ी को लगा कि वह फुल लेंथ गेंद पर मियांदाद को फंसाना चाहते हैं। लेकिन ह्यूज का प्लान दूसरा था। उन्होंने एक तेज बाउंसर फेंकी। मियांदाद के पास उसका कोई जवाब नहीं था। गेंद उनके दस्ताने से लगी और गली में मार्क टेलर के हाथों में गई। अब बारी ह्यूज की थी। वह दौड़कर मियांदाद के पास गए और कहा, 'टिकट प्लीज।'
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