नई दिल्ली अपने दौर के बेहतरीन फील्डर्स में शुमार टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज () ने यो-यो टेस्ट (Yo Yo Test) की तुलना अपने समय से की है। मोहम्मद कैफ करीब 6 साल टीम इंडिया में खेले थे उस दौर में कैफ अपनी बल्लेबाजी के साथ-साथ अपनी फील्डिंग (Team India Fielding) के लिए भी जाने जाते थे। तब कैफ के बारे में यह कहा जाता था कि वनडे मैच में वह भारत के लिए 35 से 40 रन अपनी उम्दा फील्डिंग के दम पर बचाते हैं। कैफ से आज जब यो-यो टेस्ट पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनके दौर में सिर्फ दो या तीन खिलाड़ी ही यह टेस्ट पास कर पाते। साल 2000 में अपने टेस्ट डेब्यू से अपने इंटरनैशनल करियर की शुरुआत करने वाले कैफ भारत के 2003 वर्ल्ड कप टीम का अहम हिस्सा रहे। भारत को साल 2002 में नेटवेस्ट सीरीज जिताने वाले कैफ के दौर में भारतीय टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस पर आज जितना ध्यान नहीं दिया जाता था। लेकिन उस दौर में भी कैफ की फिटनेस लाजवाब होती थी। 39 वर्षीय कैफ आज सोशल मीडिया वेबसाइट हेलो पर अपने फैन्स से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान उनसे यो-यो टेस्ट पर सवाल किया गया कि अगर उनके दौर में यो-यो टेस्ट होता तो कौन-कौन उसे पास कर पाता। कैफ ने इस सवाल का बड़ा ही रोचक उत्तर दिया। उन्होंने कहा, 'अगर हमारे दौर में यह टेस्ट होता तो मुझे लगता है कि (लक्ष्मपति) बालाजी और मैं इस टेस्ट को पास कर जाते। इसके अलावा युवरास सिंह भी ऐसा कर सकते थे। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसके अलावा और कोई खिलाड़ी इस टेस्ट को पास कर पाते।' बता दें जिस दौर में मोहम्मद कैफ इंटरनैशनल क्रिकेट में सक्रिय थे। तब उस टीम के कप्तान थे। इसके अलावा सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, वीरेंदर सहवाग, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, जहीर खान, अजीत अगरकर और आशीष नेहरा जैसे खिलाड़ी टीम इंडिया में होते थे, जिन्होंने इस खेल पर अपनी खूब छाप छोड़ी है। इसके अलावा कैफ ने अपने कप्तान रहे सौरभ गांगुली की भी जमकर तारीफ की है। कैफ ने कहा, 'दादा साफ-साफ मुंह पर कहने वाली बात है। उन्होंने कम ही समय में बहुत सारे अच्छे निर्णय लिए हैं। वह बीसीसीआई के सिस्टम में और पारदर्शिता लेकर आएंगे। इसके लिए उन्हें एक और कार्यकाल की जरूरत होगी।'
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