नई दिल्लीश्रीलंका के पूर्व क्रिकेट कप्तान () ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ () आंदोलन के संबंध में विश्व को एक कड़ा संदेश दिया है, जो कि पिछले कुछ समय से दुनिया भर में चल रहा है। मई में अमेरिका के मिनोपोलिस शहर में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में हुई मौत के बाद खिलाड़ी भी नस्लवाद पर बोलने लगे हैं। यहां तक कि क्रिकेट भी इससे अछूटा नहीं है क्योंकि पिछले कुछ समय से इस मामले पर कई खिलाड़ी बोलने लगे हैं। इसके अलावा, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के क्रिकेटरों के साथ-साथ उनकी शर्ट के कॉलर पर भी लोगो के खेल में ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान शुरू हो गया है। श्रीलंका के पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने कहा कि मूल्यों के बिना शिक्षा से भेदभाव नहीं रुकेगा। संगकारा ने कहा कि बदलाव तभी आ सकता है जब वास्तविक इतिहास की शिक्षा दी जाए और इसमें कुछ तथ्यों को छिपाया नहीं जाए। कई गलत काम तो शिक्षितों को करते देखा है ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ अभियान पर अपने विचार रखते हुए संगकारा ने कहा, ‘यह मायने नहीं रखता कि आप शिक्षित हो या नहीं। मैंने कुछ ऐसे भी कृत्य देखे हैं जिन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षा पाने वाले लोगों ने किया था।’ उन्होंने ‘क्रिकबज’ से कहा, ‘अगर आपकी शिक्षा मूल्यों पर आधारित नहीं है और इसमें नैतिकता नहीं है तो आप मुश्किल में होंगे। शिक्षा आपके पक्षपात को नहीं हटा पाएगी, बल्कि यह आपको अच्छी तरह से बहस करने में मदद करेगी।’ भेदभाव के लिए केवल त्वचा का रंग ही आधार नहीं होता संगकारा ने कहा कि नस्लवाद के विभिन्न प्रकार है और भेदभाव के लिए केवल त्वचा का रंग ही आधार नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘अगर आप ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ (अश्वेतों का जीवन भी मायने रखता है।), दुनिया में नस्लवाद और भेदभाव की बात करो तो मुझे लगता है कि सबसे अहम चीज है कि अपने बच्चों को इतिहास पढ़ाओ, जस का तस, जैसा इसे होना चाहिए, न कि इसका कोई छुपा हुआ संस्करण। हमें अच्छी, बुरी और बदसूरत चीजों पर ध्यान दिलाने की जरूरत है।’
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