नई दिल्लीपूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni Retirement) ने शनिवार को इंटरनैशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया है। उन्होंने कप्तान के तौर पर वह सब कुछ हासिल किया, जिससे उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। आईसीसी की तीनों ट्रोफी भारत को दिलवाई और भारत को दुनियाभर में सम्मान दिलाया। रांची जैसी जगह से आने वाले धोनी को कप्तान बनाने में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर ( On ) की अहम भूमिका थी। उनकी सिफारिश पर ही बीसीसीआई ने धोनी को कप्तान बनाया था। अब सचिन ने खुलासा किया है कि उन्हें स्लिप में खड़े रहकर महेंद्र सिंह धोनी के क्रिकेटिया कौशल को अच्छी तरह से परखने का मौका मिला। उन्हें लगा कि वह भारतीय टीम कप्तानी के लिए तैयार हैं। 2007 में जब भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने उनसे सलाह मांगी तो इस स्टार बल्लेबाज ने इस विकेटकीपर का नाम सुझाया था। तेंडुलकर, सौरभ गांगुली और राहुल द्रविड़ ने उस साल पहले आईसीसी टी-20 विश्व कप में जूनियर खिलाड़ियों को मौका देने का निर्णय किया और बीसीसीआई ने तब मास्टर ब्लास्टर से कप्तानी के लिए अपनी पसंद बताने के लिए कहा था। स्लिप में फील्डिंग करते परखा टैलेंटतेंडुलकर ने हाल में संन्यास लेने वाले पूर्व भारतीय कप्तान के बारे में कहा कि मैं इसके विस्तार में नहीं जाऊंगा कि यह कैसे हुआ हां लेकिन जब मुझसे (बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों ने) पूछा गया तो मैंने बताया कि मैं क्या सोचता हूं। उन्होंने कहा, 'मैंने कहा था कि मैं दक्षिण अफ्रीकी दौरे पर नहीं जाऊंगा क्योंकि मैं तब कुछ चोटों से परेशान था। लेकिन तब मैं स्लिप कॉर्डन में फील्डिंग करता था और धोनी से बात करता रहता था और मैंने तब समझा कि वह क्या सोच रहे है, फील्डिंग कैसे होनी चाहिए और तमाम पहलुओं पर मैं बात करता था।' धोनी की यह सबसे अहम खूबी थी तेंडुलकर ने कहा, 'मैंने उनकी मैच की परिस्थितियों के आकलन करने की क्षमता देखी और इस नतीजे पर पहुंचा कि उनके पास बहुत अच्छा क्रिकेटिया दिमाग है इसलिए मैंने बोर्ड को बताया कि मुझे क्या लगता है। धोनी को अगला कप्तान बनाया जाना चाहिए। तेंडुलकर ने कहा कि वह धोनी की हर किसी को अपने फैसले के लिए मनाने की क्षमता से वह प्रभावित थे।' उस वक्त टीम में थे कई दिग्गजउन्होंने कहा कि मैं जो कुछ सोच रहा था और उनकी जो सोच थी, वह काफी हद तक मिलती जुलती थी। अगर मैं आपको किसी बात के लिए मना लेता हूं तो हमारी राय एक जैसी हो जाएगी और धोनी के साथ यह बात थी। हम दोनों एक तरह से सोचते थे और इसलिए मैंने उनके नाम का सुझाव दिया। धोनी को 2008 में तब टेस्ट कप्तानी सौंपी गई जबकि भारतीय टीम में तेंडुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंदर सहवाग, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे सीनियर क्रिकेटर शामिल थे। सचिन खुलकर किया था सपॉर्टतेंडुलकर से पूछा गया कि धोनी सीनियर खिलाड़ियों को कैसे साथ लेकर चलते थे तो उन्होंने कहा कि मैं केवल अपनी बात कर सकता हूं कि मेरी कप्तान बनने की कोई इच्छा नहीं थी। मैं आपसे यह कह सकता हूं कि मैं कप्तानी नहीं चाहता था और मैं टीम के लिए हर मैच जीतना चाहता था। उन्होंने कहा कि कप्तान कोई भी हो मैं हमेशा अपना शत प्रतिशत देना चाहता था। मुझे जो भी अच्छा लगता था मैं कप्तान के सामने उसे रखता था। उन्होंने कहा- फैसला कप्तान का होता था लेकिन उसके कार्यभार को कम करना हमारा कर्तव्य होता है। तेंडुलकर ने कहा कि अगर प्रत्येक खिलाड़ी अपनी भिन्न क्षमताओं से योगदान देता है तो कप्तान का भार कम हो जाता है। मुख्य विचार एक दूसरे की मदद करना था। जब 2008 में धोनी कप्तान बना तब मैं लगभग 19 साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बिता चुका था। इतने लंबे समय तक खेलने के बाद मैं अपनी जिम्मेदारी को समझता था।
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