नई दिल्लीइंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के आगामी एडिशन में भी चीनी मोबाइल कंपनी से स्पॉन्सरशिप करार बरकरार रहेगा। यह फैसला की संचालन परिषद ने रविवार को लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विरोध जताया। जून में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेना के बीच हुई भिंड़त के बाद चीनी प्रायोजन बड़ा मुद्दा बन गया था। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने चीनी सामान का बहिष्कार करने की बात भी कही थी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इसके बाद करार की समीक्षा का वादा किया था लेकिन आईपीएल में भी इस कंपनी को बरकरार रखने का फैसला किया गया है। पढ़ें, विदेश मामलों के जानकार विष्णु प्रकाश ने लिखा, 'आईपीएल को करोड़ों भारतीय फैंस देखते हैं। हम चीन की ओर से हिंसा भी देख चुके हैं। ऐसे में को आईपीएल का स्पॉन्सर देखने की अनुमति देंगे?' उन्होंने आगे लिखा, 'बीजिंग हम सब पर हंसेगा। कौन हमें दुनिया में गंभीरता से लेगा? क्यों भारत का अपमान?' ट्विटर पर कई लोगों ने इस पर विरोध जताया और कुछ ने तो हैशटैग का इस्तेमाल किया, बीसीसीआई चाइनीज प्रचार बंद करो। एक अन्य यूजर ने लिखा कि आईपीएल का स्पॉन्सर अगर वीवो रहा तो यह फ्लॉप हो जाएगा। आईपीएल की संचालन परिषद ने रविवार को चीनी मोबाइल कंपनी वीवो सहित सभी प्रायोजकों को बरकरार रखने का फैसला किया। आईपीएल संचालन परिषद (जीसी) ने रविवार को हुई ‘वर्चुअल’ बैठक में फैसला किया कि टूर्नमेंट 19 सितंबर से 10 नवंबर तक खेला जाएगा। आईपीएल जीसी के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि हमारे सभी प्रायोजक हमारे साथ हैं। उम्मीद है आप समझ गए होंगे।’ बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा था, 'प्रायोजक अनुबंध यानी स्पॉन्सरशिप करार में कोई बदलाव नहीं होगा जिसकी जानकारी शनिवार को ही दे दी गई थी। मौजूदा वित्तीय कठिन परिस्थितियों को देखते हुए इतने कम समय में बोर्ड के लिए नया प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा।' (खेल और देश-दुनिया हर खबर अब Telegram पर भी। हमसे जुड़ने के लिए करें और पाते रहें हर जरूरी अपडेट)
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