नई दिल्लीइतिहासकार ने भारतीय क्रिकेट में सुपरस्टार कल्चर की जमकर आलोचना की है। अपनी नई किताब ‘द कॉमनवेल्थ ऑफ क्रिकेट’ को लेकर क्रिकइन्फो को दिए इंटरव्यू में गुहा ने साथ ही कहा कि टीम इंडिया के कैप्टन को इतनी शक्ति कैसे मिल सकती है कि वह बताएं- कोच कौन होगा और कौन नहीं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से बीसीसीआई का कामकाज देखने के लिए पूर्व में नियुक्त गई प्रशासकों की समिति (सीओए) के सदस्य रहे गुहा ने पूर्व क्रिकेट कप्तान बिशन सिंह बेदी की तारीफ की लेकिन विनोद राय की अध्यक्षता वाली सीओए को विराट के खिलाफ ना बोलने के लिए आड़े हाथों लिया। पढ़ें, गुहा ने कहा, ‘एक बार बेदी ने एक इंटरव्यू में कुछ कह दिया था तो उन्हें 1974 बेंगलुरू टेस्ट में बैन कर दिया गया। खिलाड़ियों को ज्यादा ताकत चाहिए थी, उन्हें अच्छे से वेतन मिलना चाहिए था, जिसमें काफी लंबा समय लगा। बेदी और सुनील गावसकर की पीढ़ी को उनके करियर के अंत तक ज्यादा पैसा नहीं मिलता था।’ 62 वर्षीय गुहा ने भारतीय कप्तान को मिली शक्तियों पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘... लेकिन अब उन्हें भगवान और आइकन बना देना एक अलग चीज है। मैं कोहली और अनिल कुंबले के बीच के विवाद की बात कर रहा हूं। कोहली को यह शक्ति कैसी मिल सकती है कि वह इस बात का चुनाव करें कि टीम का कोच कौन होगा कौन नहीं। यह किसी भी टीम में नहीं होता है, कहीं भी नहीं।’ पढ़ें, गुहा ने सीओए की उस बैठक का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी को केंद्रीय अनुबंध की ग्रेड में बदलाव करने की बात कही थी क्योंकि वह टेस्ट से संन्यास ले चुके थे। उन्होंने कहा कि सीओए के बाकी सदस्य ऐसा करने से डर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘धोनी ने फैसला कर लिया था कि वह टेस्ट नहीं, केवल वनडे खेलेंगे। मैंने कहा था (सीओए में) कि उन्हें ग्रेड-ए का अनुबंध नहीं मिलना चाहिए। साफ बात है, यह अनुबंध उन खिलाड़ियों के लिए है जो तीनों फॉर्मेट खेलते हों। वह टेस्ट नहीं खेलना चाहते यह उनका फैसला है।' पद्मभूषण से सम्मानित इस इतिहासकार ने आगे कहा, 'तब सीओए में कहा गया कि धोनी को ए से बी में लाने में डर लगता है। बोर्ड से ज्यादा सुप्रीम कोर्ट की सीओए जिसका अध्यक्ष सीनियर आईएएस था और वह डरी हुई थी। मुझे लगा कि यह बड़ी समस्या है। इसलिए मैंने इसका विरोध किया। जब मैं कुछ कर नहीं सका तो मैंने इसके बारे में लिखा।’ गुहा ने बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरभ गांगुली के बारे में कहा कि वह हथियार डाल चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘गांगुली ने हथियार डाल दिए हैं। कुछ ऐसी चीजें हैं जो उन्हें नहीं करनी चाहिए। वह जो कर रहे हैं वह हितों का टकराव है। गांगुली जिस तरह के उदाहरण सेट कर रहे हैं, काफी खराब है। मैं इसे दुख के साथ कह रहा हूं क्योंकि मैं गांगुली को काफी मानता था, एक क्रिकेटर के तौर पर और एक कप्तान के तौर पर।’ पूर्व स्पिनर बेदी को शानदार इंसान बताते हुए गुहा ने कहा, ‘वह शानदार शख्सियत हैं। कभी टाल-मटोल नहीं करते, कभी बहाने नहीं बनाते। जो होता है, वह कहते हैं।’
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