Tuesday, February 23, 2021

गंभीर की दो टूक, पहले आंतकवाद खत्म करे पाकिस्तान, फिर क्रिकेट के बारे में सोचे

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर और वर्तमान में लोकसभा सांसद (Gautam Gambhir) ने भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को फिर से शुरू करने के विचार का कड़ा विरोध किया है। गंभीर का मानना है कि जब तक पाकिस्तान जम्मू एवं कश्मीर में सीमा पर आतंकवाद को बंद नहीं कर देता, तब तक भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए। आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में गंभीर ने यह बात कही। वर्ष 2007 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टी-20 विश्व कप फाइनल और 2011 के भारत-श्रीलंका वनडे विश्व कप फाइनल के स्टार गौतम गंभीर ने कहा, आखिरकार, क्रिकेट कोई मायने नहीं रखता, बल्कि हमारे सैनिक रखते हैं। हालांकि इंटरनैशनल दबाव का सामना कर रहे पाकिस्तान का दावा है कि उसने अपने देश में पनप रहे आतंकी समूहों पर शिकंजा कसा है, लेकिन उसने जम्मू-कश्मीर में हथियारबंद आतंकवादियों को भेजना जारी रखा है। पिछले कुछ हफ्तों में नव निर्मित केंद्र शासित प्रदेश में नागरिकों और सुरक्षा बलों के खिलाफ आतंकी हमले भी बढ़े हैं। 2019 के संसदीय चुनावों में दिल्ली में भाजपा की कमान संभालने वाले नेशनल आइकन गंभीर ने तर्क दिया कि भारतीय क्रिकेटरों को देश के लिए खेलने के लिए अच्छा-खासा भुगतान किया जाता है, लेकिन सैनिक देश की निस्वार्थ रूप से रक्षा करते हैं। 'मैंने देश के लिए खेलते हुए और जीतकर किसी पर कोई उपकार नहीं किया' बकौल गंभीर, 'मैंने देश के लिए खेलते हुए और जीतकर किसी पर कोई उपकार नहीं किया है। लेकिन किसी ऐसे व्यक्ति को देखें, जो सियाचिन या पाकिस्तान सीमा पर हमारा बचाव कर रहा है और थोड़े से पैसे लेकर ही अपनी जान जोखिम में डाल रहा है। असल में तो वही हमारे देश के सबसे महान नायक हैं।' गंभीर बचपन से ही भारतीय सेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जब वह स्कूल में थे और उन्होंने घरेलू स्तर पर खेली जाने वाली प्रतिष्ठित रणजी ट्रोफी में खेलना शुरू किया तो उनके माता-पिता ने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए खेलने के लिए मनाया था। लोकसभा में पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले गंभीर ने उस बात को याद करते हुए कहा, यह देश के लिए खड़े होने का एक और तरीका था, इसलिए मैं सहमत हो गया। हालांकि सेना और भारतीय सेना की वर्दी के लिए उनका प्यार बरकरार है, लेकिन उन्होंने भारत में नागरिकों के लिए बनी प्रादेशिक सेना में शामिल होने के लिए किसी भी मानद पेशकश को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। गंभीर ने सैनिकों की वर्दी को पवित्र बताते हुए कहा कि इसे पहनने वाले सैनिक अपना खून बहाते हैं, देश की रक्षा करते हुए अपने जान का भी बलिदान दे देते हैं। उन्होंने कहा, ऐसा कोई व्यक्ति, जो इस कदर बलिदान नहीं देता है, तो फिर उसे इस वर्दी नहीं पहनना चाहिए। गंभीर ने जोर देते हुए कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को नहीं रोकता है, तब तक भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए।


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