नई दिल्ली आज मुथैया मुरलीधरन का जन्मदिन है। क्रिकेट के इतिहास के सबसे कामयाब गेंदबाज। आज ही के दिन यानी 17 अप्रैल को साल 1972 में मुथैया का जन्म हुआ। श्रीलंका के इस महान स्पिनर का जन्म कैंडी में हुआ। मुरली के नाम टेस्ट क्रिकेट में 800 और वनडे इंटरनैशनल में 534 विकेट हैं। दोनों प्रारूपों में वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बोलर हैं। हालांकि उनके ऐक्शन को लेकर काफी विवाद रहा। 1995 में उनके गेंदबाजी ऐक्शन को नो-बॉल तक करार दिया जाने लगा। 800 नहीं 80 पर थम जाता सफर 1995 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के दौरान अंपायर डेरल हेयर लगातार मुरली की गेंदों को नो-बॉल करार दे रहे थे। मेलबर्न में खेले गए इस मैच में कप्तान अर्जुन राणातुंगा ने उनका काफी साथ दिया। 'सीमेंट के मैदान पर भी स्पिन करा सकते हैं गेंद' श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिलीप मेंडिस मुरलीधरन से काफी प्रभावित थे। उन्होंने मुरली की तारीफ करते हुए कहा था कि वह सीमेंट के मैदान पर भी गेंद को स्पिन करा सकते हैं। मुरली अपनी कलाई को काफी जोर से घुमाते थे। मुरलीधरन ने सबसे ज्यादा 67 बार टेस्ट की एक पारी में 5 या इससे ज्यादा विकेट लिए हैं। इतना ही नहीं टेस्ट में उन्होंने मैच में 22 बार 10 या उससे ज्यादा विकेट लिए। ड्रॉ-हारे टेस्ट मैचों में सर्वाधिक विकेट 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले मुरलीधरन ड्रॉ और हारे हुए टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में टॉप पर हैं। मुरलीधरन ने 800 में से 362 विकेट हारे और ड्रॉ रहे टेस्ट मैचों में लिए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने 10 बार तो वनडे में 5 या इससे ज्यादा विकेट झटके। प्रज्ञान ओझा बने थे 800वें शिकार मुरलीधरन ने साल जुलाई 2010 में अपने करियर का आखिरी टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेला और उन्होंने प्रज्ञान ओझा को 800वां टेस्ट शिकार बनाया। ऐसा रहा मुरली का करियर मुरली ने करियर में 133 टेस्ट मैच खेले और कुल 800 विकेट झटके। उन्होंने इस फॉर्मेट में एक अर्धशतक भी लगाया। वहीं, वनडे में उन्होंने 350 मैचों में कुल 534 विकेट अपने नाम किए। वनडे और टेस्ट में उनका सर्वाधिक विकेटों का वर्ल्ड रेकॉर्ड आज भी बरकरार है। उन्होंने 12 टी20 इंटरनैशनल मैच भी खेले और 13 विकेट लिए।
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