नई दिल्ली वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज माइकल होल्डिंग ने एक विवादास्पद बयान दिया है। होल्डिंग ने कहा है कि अगर वह यूके में बड़े हुए होते तो शायद आज जिंदा नहीं होते। अमेरिका में पिछले साल हुई जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से ही होल्डिंग रंगभेद को लेकर काफी मुखर रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि यूके ने अपने देश में नस्लवाद को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इंग्लैंड के अखबार टेलीग्राफ से बातचीत में होल्डिंग ने कहा कि अगर वह यूके में बड़े हुए होत तो अपने उग्र व्यवहार के चलते जवानी में ही उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती। इस महान तेज गेंदबाज ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि मैं आज जिंदा होता। जवानी में मैं थोड़ा उग्र था। मैंने न्यूजीलैंड में स्टंप को लात मारकर गिरा दिया था (1980) तो आप सोच सकते हैं कि एबनी रेनफर्ड ब्रेंट (इंग्लिश क्रिकेट कॉमेंटेटर) पर क्या गुजरी होगी? नहीं, मुझे लगता है कि मैं यह सब नहीं झेल पाता।' महिला क्रिकेटर एबनी इंग्लैंड के लिए खेलने वाली पहली ब्लैक महिला क्रिकेटर थीं। 2009 में 50 ओवर और 20 ओवर का वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं। अपने जवानी के दिनों को याद करते हुए होल्डिंग ने कहा कि जमैका में उन्हें नस्लवाद का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि 67 वर्षीय इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि जब भी वह उस स्थान से बाहर गए तो उन्हें इसका अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, 'जमैका में बड़े होते हुए, मुझे कभी नस्लवाद का सामना नहीं करना पड़ा। जब भी मैं जमैका से बाहर गया तो मुझे इसका अनुभव हुआ। हर बार जब मुझे इसका अनुभव हुआ तो मैंने खुद से यही कहा, 'यह तुम्हारी जिंदगी नहीं है, मैं जल्दी ही घर पहुंच जाऊंगा।' अगर मैंने कोई स्टैंड लिया होता तो मेरा करियर इतना लंबा नहीं होता जितना कि यह हुआ। मेरा टेलीविजन करियर भी इतना लंबा नहीं होता।' उन्होंने कहा, 'हमने इतिहास में देखा है कि ब्लैक लोग जो अपने अधिकारों के लिए खड़े हुए, जिन्होंने अन्याय और प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाई। ईश्वर कृपा करे, अगर मैंने भी कुछ बोला होता तो वे कहते, 'एक और गुस्से में ब्लैक मैन, इससे छुटकारा पाओ।' मैं एक और इनसान होता जो कूड़े के ढेर में पड़ा मिलता।'
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