Tuesday, June 15, 2021

WTC Final India vs New Zealand: ड्राइविंग की तरह होती है बल्लेबाजी, गेंद स्विंग हो तो गियर बदल लें बैट्समैन: तेंडुलकर

नई दिल्ली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल से पहले इस बात को लेकर काफी चर्चा है कि अगर इंग्लिश कंडिशन में गेंद स्विंग होती है तो फिर न्यूजीलैंड के पास ऐसे बोलर हैं जो इसका लाभ उठाना जानते हैं। वैसी हालत में भारतीय बल्लेबाजों की चुनौतियां बढ़ जाएंगी। हालांकि, भारत रत्न का ऐसा नहीं मानना है। उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाजी सामने वाली टीम के मुकाबले बेहद मजबूत है और अगर गेंद स्विंग होती है तो भारत के पास भी इतने अनुभवी बोलर हैं जो न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के लिए मुश्किल बढ़ा देंगे। यह वनवे ट्रैफिक वाली बात नहीं है। NBT से एक्सक्लूसिव बातचीत में सचिन ने कहा कि बल्लेबाजों को यह जरूर ध्यान रखना होगा कि कब गियर बदलना है। ड्राइविंग की तरह है बैटिंग गेंद स्विंग होने की स्थिति में कैसे बैटिंग करनी चाहिए, इस पर सचिन ने बड़ी दिलचस्प अंदाज में अपनी राय रखी। दो सौ टेस्ट मैच खेल चुके इस दिग्गज ने कहा, 'ये गाड़ी चलाने के बराबर है। जब आपको लाल सिग्नल दिखे तो गाड़ी रोकनी पड़ती है। गाड़ी को न्यूट्रल में डालना पड़ता है और फिर वापस पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे गियर बदलने पड़ते हैं। ये बल्लेबाजों को भी जानना बहुत जरूरी है कि कब चौथे गियर में जाना है और कब पहले, दूसरे गियर में रहना है। क्योंकि बोलर्स भी आकर अच्छी बोलिंग करेंगे कभी न कभी। तब आपको पहले या दूसरे गियर में चुपचाप रहना है, विकेट नहीं खोना है उस समय और जब धूप निकलती है तो आप गाड़ी को चार नंबर पर डाल दीजिए और फिर चौके मारिए। बल्लेबाजों को ये जानना बहुत जरूरी होगा।' साउथैम्पटन का अनुभव सचिन अपने करियर में कई बार इंग्लैंड दौरे पर गए लेकिन वह साउथैम्पटन के रोज बाउल में 2007 में केवल एक वनडे मैच में खेले हैं। इस मैदान की अलग तरह की बनावट और लोकेशन को देखते हुए कहा जाता है कि यहां पल-पल हवा का रुख बदलता है और तब खेल का रुख भी बदल जाता है। सचिन ने इस पर कहा, 'मुझे यह भी पता है कि अगर धूप खिली हो और हवा इतनी नहीं चल रही हो तो वहां पर बड़े चौके भी लगते हैं। इंग्लैंड में खेलते समय आपको मौसम की भी अच्छी जानकारी रखनी होती है। आसमान में बादल हैं कि नहीं, हवा किस तरफ चल रही है। इनका बहुत ध्यान रखना पड़ता है। तापमान का असर पिच पर भी पड़ता है। उसके बाद आपको निर्णय लेना होता है कि अभी जो पिच दिख रही है उस पर मैं ऑन द राइज शॉट मार सकता हूं या नहीं।' इलेवन के लिए तीन विकल्प भारतीय टीम को किस इलेवन के साथ उतरना चाहिए, इस पर सचिन की राय है, 'जो हमारी एक सेटल टीम है वही खेलनी चाहिए। मुझे ज्यादा बदलाव दिखता नहीं क्योंकि टीम का भी एक संतुलन होता है। मुझे लगता है वही टीम होनी चाहिए। वैसे मुझे तीन तरह के ऑप्शंस दिखते हैं। पहला तीन फास्ट बोलर और एक स्पिनर। दूसरा ऑप्शन है कि चार फास्ट बोलर ले लें और एक स्पिनर। तीसरा ऑप्शन है तीन फास्ट बोलर और दो स्पिनर। हमारे बोलर्स भी बैटिंग कर पाते हैं। पार्टनरशिप बना सकते हैं। मुझे लगता है कि टीम मैनेजमेंट ये जरूर सोच रहा होगा तो हमारे बोलर्स थोड़े रन बनाते हैं तो एक बोलिंग ऑप्शन बढ़ सकता है। हमें यह भी देखना है कि मैच जीतने के लिए 20 विकेट निकालने होंगे। अच्छी बैटिंग भी जरूरी है क्योंकि यहां दुनिया की दो टॉप टीम खेल रही हैं।' पिच अगर फास्ट और बाउंसी हो साउथैम्पटन के क्यूरेटर ने कहा है कि वह ऐसी पिच तैयार कर रहे हैं जिस पर पेस, बाउंस और कैरी होगा और आखिर में स्पिनर्स का भी रोल हो सकता है अगर कंडिशन ड्राई रहता है तो। ऐसी पिच बनती है तो फिर क्या भारत को एडवांटेज मिलेगा? सचिन इस पर कहते हैं, 'ये तो अच्छी बात है क्योंकि मुझे हमेशा लगता था कि जब मैं बैटिंग कर रहा हूं और पिच पर पेस और बाउंस हो तो फास्ट बोलर्स के लिए उनका गुडलेंथ स्पॉट उतना ही छोटा बन जाता है। क्योंकि जब वो गेंद थोड़ी भी छोटी करते हैं तो आपके पास बैकफुट पर जाकर शॉट खेलने का और एक ऑप्शन बढ़ जाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर गेंद थोड़ा आगे भी डाल दें तो आप शॉट खेल सकते हैं। मैं समझता हूं तो पेस और बाउंस इतनी चिंता की बात नहीं है मगर लेकिन गेंद जब स्विंग करने लगती है तब बल्लेबाजों को तकलीफ होती है।' सौ इंटरनैशनल सेंचुरी बना चुके सचिन ने कहा कि अगर हम बैटिंग की तुलना करें तो हमारी बैटिंग बहुत ज्यादा मजबूत नजर आती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। कॉन्वे का भी है तोड़ न्यूजीलैंड के डेवोन कॉन्वे ने लॉर्ड्स टेस्ट में डेब्यू करते हुए इंग्लैंड के खिलाफ 200 रन की इनिंग्स खेली और फिर दूसरे टेस्ट में भी 80 रन बनाए। क्या वह भारतीय बोलर्स के लिए चुनौती बनने वाले हैं? सचिन ने इस पर कहा, 'न्यूजीलैंड के दोनों ओपनर अच्छे हैं। कॉन्वे अभी जरूर आए हैं लेकिन वह काफी समय से फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल रहे हैं। उनके पास खासा अनुभव है। इनको आउट करने के लिए एक स्लॉट में बोलिंग करनी होगी। हमारे साथ अच्छी बात है कि हमारे पास ऐसे बोलर्स हैं जिनको मालूम है कि लेफ्ट हैंडर्स के विकेट कैसे निकालते हैं। ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमरा को भी काफी तजुर्बा है। यहां तक कि शार्दुल ठाकुर और मोहम्मद सिराज को भी जानकारी है। उनको पास यह जानकारी है कि कौन सी लाइन पर बॉल डालनी है। अगर उनके पास अनुभव है तो हमारे बोलर्स के पास भी तमाम तरह की गेंदें हैं। खुला मुकाबला होगा लेकिन वनवे ट्रैफिक नहीं है कि आराम से आकर वो रन बना लें।' उस जीत से फर्क तो पड़ेगा न्यूजीलैंड ने इस फाइनल से पहले मेजबानों से टेस्ट सीरीज जीती है जो कि उसे लंबे अर्से बाद इंग्लैंड में मिली है। क्या इसका असर भी होगा फाइनल पर? सचिन का कहना था, 'इसका तो असर जरूर होगा। कोई भी टीम जब जीतती है तो उनका माइंडसेट चेंज होता है। इससे आपका कॉन्फिडेंस लेवल काफी बढ़ता है। इसके बाद कठिन परिस्थितियों में भी आप कोई हल निकाल लेते हैं। जब टीम का प्रदर्शन ठीक नहीं हो रहा होता है तब अच्छी पोजिशन से भी कभी-कभी आप मुश्किल में घिर जाते हैं। रिजल्ट आपके मन मुताबिक नहीं होता है। जीतने का यही असर होता है। अगर आप जीत रहे हैं तो इसका असर काफी पॉजिटिव होता है।'


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