लंदन ओवल टेस्ट के बाद इंग्लैंड के कप्तान जो रूट के चेहरे पर निराशा के भाव पढ़े जा सकते थे। लंच के बाद जसप्रीत बुमराह ने जिस तरह खेल को पलटा, वह उनकी सोच से परे था। रूट ने माना कि भारत ने गेंद को रिवर्स स्विंग करवाया। और तेज गेंदबाजी के इसी हुनर ने मैच को भारत के पक्ष में मोड़ दिया। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने भी कहा कि जैसे ही गेंद रिवर्स स्विंग होने लगी बुमराह ने गेंदबाजी के लिए कहा। यह रिवर्स स्विंग थी। ऐसी स्विंग जिसमें गेंद हवा में सामान्य स्विंग के उलट घूमती है। कोरोना के इस दौर में जब गेंद पर स्लाइवा लगाने की इजाजत नहीं है। इसके साथ ही और भी तमाम तरह की पाबंदियां हैं। ऐसे में गेंद को रिवर्स स्विंग के लिए तैयार करना और भी चुनौतीपूर्ण है। इसके बाद इंग्लैंड की पिचें और मैदान। यहां पर गेंद को रिवर्स के लिए तैयार करना और भी मुश्किल काम है। इंग्लैंड की विकेट पर हालांकि घास बाकी विकेटों के मुकाबले कम थी। लेकिन इंग्लैंड के मैदानों पर घास काफी ज्यादा होती है और ऐसे में गेंद पुरानी नहीं होती और उसे रिवर्स स्विंग करवाना बेहद मुश्किल होता है। यूं तो रिवर्स स्विंग की यह कला दक्षिण एशियाई देशों की पिचों पर पैदा हुई। और शुरुआत से ही विवादों में रही। 2018 में जब ऑस्ट्रेलिया के तब के कप्तान स्टीव स्मिथ ने बॉल टैंपरिंग (जानबूझकर गेंद खराब करना) की बात को माना था। हालांकि गेंद को तैयार करना और गेंद को खराब करने में फर्क होता है। पुराने क्रिकेटरों ने कई बार खुलकर कहा है कि 'गेंद को तैयार' करना को हमेशा टैंपरिंग के संदर्भ में लिया जाता रहा है। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने तब हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा था कहा, 'हां, यह एक कला है। लेकिन ऐसे चोरी भी एक कला है। तो क्या आप चोर की तारीफ करेंगे या उसे जेल में डालेंगे। रिवर्स स्विंग एक कला है लेकिन बॉल से छेड़छाड़ बेईमानी है। गेंद से छेड़छाड़ किए बिना गेंद को रिवर्स स्विंग के लिए तैयार किए जाने के और भी तरीके हैं।' गेंद तैयार करने के कुछ ऐसे नियम भी हैं जो कानूनों का उल्लंघन नहीं करते। मैच अधिकारी इस बात पर नजर रखते हैं कि गेंद को कैसे थ्रो किया जा रहा है। इस बात पर नजर रखनी होती कि कितने थ्रो वन बाउंस फेंके जा रहे हैं। इसके साथ ही यह भी देखना होता है कि क्या गेंद नियमित रूप से एक या दो खिलाड़ियों को ही चमकाने के लिए दी जा रही है। क्या गेंद पर कुछ आपत्तिजनक तो नहीं लगाया जा रहा। कैसे बनाई जाती है गेंद रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए गेंद को बनाए रखना भी एक खूबी है। इसमें गेंद के एक हिस्से को चमकता रखा जाता है और पूरी कोशिश की जाती है कि दूसरे हिस्से पर किसी भी तरह की नमी न हो। तो क्या सिर्फ गेंद तैयार करने से मिल जाती है रिवर्सरिवर्स स्विंग सिर्फ गेंद को तैयार करने से ही हासिल नहीं हो सकती। इसमें गेंदबाज की तकनीक भी काफी अहम होती है। पाकिस्तान के धुरंधर गेंदबाजों ने कहा था वह किसी भी गेंदबाज को बॉल तैयार करके दे सकते हैं, इसके बाद वह चाहे तो गेंद को उसी हिसाब से रिवर्स करवा दे। उनका मानना था कि गेंद को रिवर्स करवाना तकनीकी मामला अधिक है। जानकार मानते हैं कि इसके अलावा मैदान, पिच और वातावरण भी काफी अहम होता है। गर्मी और पिच से मदद मिलने पर गेंद जल्दी रिवर्स होने लगती है। इंग्लैंड के बजाय अगर भारत की किसी शहर में मैच हो रहा हो 10-15 ओवर बाद भी गेंद को रिवर्स करवाया जा सकता है। क्यों कुछ लोग कहते हैं काला जादू? हालांकि कुछ लोगों ने इसे काला जादू भी कहा। रिवर्स स्विंग लंबे समय तक विवादों में रही। कई बार ऐसे मामले सामने आए जब गेंद को जानबूझकर खराब किया गया। कई खिलाड़ी अकसर नियमों की अवहेलना करके भी गेंद को रफ बनाने का काम करते रहे। बीते कई साल में ट्राउजर की जिप, वैसलीन, मिंट, जैलीबीन्स, हेयर जेल और सनस्क्रीन क्रीम का इस्तेमाल रिवर्स स्विंग हासिल करने के लिए किया जाता रहा था। सुल्तान ऑफ स्विंग ने मचाया था कहर रिवर्स स्विंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पाकिस्तानी जोड़ी वसीम अकरम और वकार यूनिस ने किया। हवा में उनके रफ्तार और उनका गेंदबाजी ऐक्शन ने इसे दोगुना प्रभावी बना दिया। भारतीय गेंदबाजों को मनोज प्रभाकर ने रिवर्स स्विंग सिखाया। हालांकि दुनिया के बाकी देशों को इसे सीखने में काफी समय लगा।
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