Sunday, September 5, 2021

बेटे जॉनी की तरह पिता भी थे इंग्लैंड के विकेटकीपर, तब ओवल टेस्ट में गावस्कर ने ठोका था दोहरा शतक

ओवल क्रिकेट में पिता-पुत्र जोड़ियां का मिलना कोई नई बात नहीं, लेकिन एक ही टीम के खिलाफ, एक ही मैदान पर एक ही रोल निभाना कभी हैरान करता है तो कभी रोमांचित। ये कहानी है इंग्लैंड टीम के विकेटकीपर जॉनी बेयरस्टो और उनके पिता डेविड बेयरस्टो की। बेटा जॉनी भारत के मौजूदा इंग्लैंड दौरे पर विकेटकीपर हैं तो 1979 में पिता डेविड यही जिम्मेदारी निभा रहे थे। तब ओवल में खेले गए आखिरी टेस्ट में गावस्कर ने दोहरा शतक ठोका था। आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाजी थे डेविड बेयरस्टो यॉर्कशायर की ओर से खेलने वाले डेविड बेयरस्टो ने इंग्लैंड के लिए 1979 में ही डेब्यू किया था। 459 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में लगभग 14 हजार रन बनाने वाले डेविड को इंग्लिश टीम में ज्यादा मौके नहीं मिले। चयनकर्ता उन्हें बॉब टेलर और पॉल डाउनटॉन से नीचे ही आंकते थे। टेस्ट से ज्यादा उन्हें वनडे क्रिकेट में मौके मिला। चार टेस्ट और 21 वनडे खेलने वाले इस विकेटकीपर बल्लेबाज का इंटरनेशनल करियर सिर्फ पांच साल का ही था। संन्यास के बाद वह रेडियो कमेंट्री करने लगे। डिप्रेशन में आकर की थी खुदकुशीयॉर्कशायर क्लब मैनेजमेंट से बहस और डिप्रेशन के चलते 1997 में उन्होंने गालियां खाकर अपनी जान देने की कोशिश की, लेकिन जान बच गई। कुछ हफ्ते बाद जब घर में कोई नहीं था तब फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। तब जॉनी बेयरस्टो सिर्फ आठ साल के थे। डेविड के दो बेटे थे। दोनों क्रिकेटर बने। पहली बीवी की संतान एंड्र्यू का करियर प्रथम श्रेणी से आगे नहीं बढ़ पाया तो दूसरी पत्नी से हुए जॉनी इंग्लैंड क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर हैं। उस मैच में गावस्कर ने खेली थी करियर की यादगार पारी जोस बटलर के पितृत्व अवकाश लेने के बाद चौथे टेस्ट में विकटकीपिंग की जिम्मेदारी जॉनी बेयरस्टो संभाल रहे हैं। 42 साल पहले जब भारत ने इंग्लैंड का दौरा किया था तब भी चौथे टेस्ट में सुनील गावस्कर ने दोहरा शतक जमाया था। चार टेस्ट मैच की सीरीज में 0-1 से पिछड़ रही टीम इंडिया को आखिरी मैच में जीत के लिए 12 ओवरों में 73 रन की जरूरत थी। मगर दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरने लगे। दिलीप वेंगसरकर, कोहली देव जल्दी-जल्दी आउट हो गए। भारत को जब 48 गेंद में 49 रन की दरकार थी तब 221 के निजी स्कोर पर गावस्कर पवेलियन लौटे। हार का खतरा मंडराने लगा तब करसन घावरी और भरत रेड्डी की जीवटता से मैच ड्रॉ हो पाया था। ऐसा था 1979 में भारत का इंग्लैंड दौरा
  • पहला टेस्ट, एजबेस्टन, बर्मिंघम, इंग्लैंड पारी और 83 रन से जीता
  • दूसरा टेस्ट, लॉर्ड्स, लंदन, मैच ड्रॉ
  • तीसरा टेस्ट, हेडिंग्ले, लीड्स, मैच ड्रॉ
  • चौथा टेस्ट, केनिंगटन ओवल, केनिंगटन, मैच ड्रॉ


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