भारत की टीम शर्मनाक तरीके से टी20 वर्ल्ड कप का पहला मैच हारी, इसमें कोई शक नहीं। कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट ने भी गलतियां मानी हैं। पाकिस्तान के हाथों वर्ल्ड कप में पहली हार की टीस बड़ी गहरी है, मगर उसपर कुछ तथाकथित प्रशंसकों का व्यवहार बेहद घटिया है। विराट कोहली से गुस्सा है, रोहित शर्मा से गुस्सा है, केएल राहुल से गुस्सा है, हार्दिक पंड्या से गुस्सा है मगर मोहम्मद शमी से नफरत है। जी हां, नफरत। किसी खिलाड़ी को सिर्फ इस वजह से निशाना बनाना कि वह एक विशेष धर्म से है और मैच वाले दिन नहीं चला, सिर्फ नफरत है। पाकिस्तान ने पूरी भारतीय टीम को हराया है। 11 के 11 खिलाड़ी मिलकर भी शाहीन शाह अफरीदी, बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान से पार नहीं पा सके मगर जहर बुझी बातें केवल शमी के लिए कहीं जा रही हैं। तब कहां थे ये 'नफरती चिंटू'?जो लोग शमी को 'गद्दार, 'बिकाऊ', 'फिक्सर' जैसी गालियों से नवाज रहे हैं, यही लोग बस दो महीने पहले खूब तालियां पीट रहे थे। लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच के पांचवें दिन वो शमी और जसप्रीत बुमराह की जोड़ी ही थी जिसने हार के मुंह से बचाया था। 70 गेंदों पर 56 रनों की करियर बेस्ट पारी के दौरान शमी के हर शॉट पर सबको दिल बल्लियों उछल रहा था। 2018 का इंग्लैंड दौरा भी याद कीजिए। बाकी सारे भारतीय गेंदबाजों के मुकाबले शमी को खेलने में अंग्रेजों के पसीने छूट रहे थे। इतनी जल्दी भूल गए वो सारे मैच2019 का वर्ल्ड कप याद होगा। शमी ने अफगानिस्तान के खिलाफ हैट्रिक ली थी। बाद में इंग्लैंड के खिलाफ 5 विकेट भी झटके। पूरे वर्ल्ड कप में शमी बस चार मैच खेले थे मगर 14 विकेट उड़ा ले गए थे। शमी का दबदबा कुछ ऐसा था कि टूर्नमेंट के सारे गेंदबाजों में से सबसे बेहतरीन स्ट्राइक रेट (15.07) और औसत (13.78) शमी का ही था। इन सारे दिनों पर शमी आपके 'हीरो' थे क्योंकि अच्छा खेले थे। आज वो बस इसलिए 'गद्दार' कहे जा रहे हैं क्योंकि किसी मैच में ज्यादा रन लुटा बैठे? अगर एक दिन के प्रदर्शन पर लोग किसी खिलाड़ी को यूं अर्श से फर्श पर ले आते हैं शायद उन्होंने खेल को समझा ही नहीं। कोई विकेट नहीं ले सका, अकेले शमी पर सवाल क्यों?रविवार के मैच में बाबर आजम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया था। उसकी वजह यह थी कि वह दुबई की पिच में तेज गेंदबाजों के लिए जो कुछ भी था, उसे निचोड़ लेना चाहते थे और बाद में आसान लक्ष्य का पीछा करते। शाहीन शाह अफारीदी ने पहले ही ओवर में रोहित शर्मा, फिर तीसरे ओवर में केएल राहुल को आउट किया, उसी से साफ हो गया था कि पाकिस्तान का प्लान सही रास्ते पर है। विराट कोहली और ऋषभ पंत न होते तो भारत 20 ओवर में 151 रन का स्कोर भी न बना पाता। जब तक बाबर आजम और मोहम्मद रिजवान क्रीज पर उतरे, तब तक पिच बदल चुकी थी। ऊपर से भारतीयों की लाइन-लेंथ भी थोड़ी गड़बड़ रही। भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रवींद्र जडेजा... भारतीय टीम का कोई भी गेंदबाज आजम और रिजवान को परेशान करता नहीं दिखा। कोई भी उन दोनों को आउट नहीं कर सका फिर अकेले मोहम्मद शमी के खिलाफ नफरत फैलाने का क्या तुक है? सिर्फ इसलिए उनकी निष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि वे एक धर्म विशेष से ताल्लुक रखते हैं। वैसे शमी के लिए यह नहीं बात नहीं, वह पहले भी कुछ मौकों पर ऐसी ही जहरीली ट्रोलिंग का सामना कर चुके हैं। शमी ने रन लुटाए, विकेट नहीं लिए... इसके लिए जरूर उनकी आलोचना होनी चाहिए। हर एक खिलाड़ी से जवाब मांगना चाहिए मगर सिर्फ उसके खेल के आधार पर। उन्हें धर्मांधता का चश्मा पहनकर मत देखिए। यह खेल के लिए, समाज के लिए, देश की एकता के लिए ठीक नहीं है।
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