Wednesday, November 17, 2021

2025 चैंपियंस ट्रोफी पाकिस्तान में होगी या नहीं यह उसकी 'हरकतें' तय करेंगी

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने मंगलवार को बड़े ऐलान किए। भविष्य की सीरीज को लेकर बोर्ड ने अपना प्लान बताया। भारत को तीन बड़े आईसीसी टूर्नमेंट्स की मेजबानी मिली वहीं USA में भी पहली बार टी20 वर्ल्ड के मैचों का आयोजन करवाने का फैसला किया गया। लेकिन एक खबर जिसने शायद सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा वह थी पाकिस्तान को आईसीसी टूर्नमेंट की मेजबानी मिलना। साल 1996 का वर्ल्ड कप फाइनल पाकिस्तान में खेला गया था। भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने मिलकर इस टूर्नमेंट की मेजबानी की थी। साल 2009 में लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर खिताब जीता था। लेकिन तब से लेकर अब तक रावी में काफी पानी बह चुका है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर पाकिस्तान अलग-थलग है। 1999 में लाहौर स्टेडियम के बाहर श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर आतंकी हमले के बाद दुनियाभर की टीमों ने वहां जाना बंद कर दिया। कुछ गिनती के मौकों को छोड़ दें तो पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय टीमें नहीं आईं। यूएई पाकिस्तान के लिए घर बन गया। पाकिस्तान टीम बीते एक दशक से अपने घरेलू मैच यूएई में खेलती रही है। इस साल की शुरुआत में तो हद हो गई। न्यूजीलैंड की टीम पाकिस्तान पहुंची। लेकिन सीरीज की शुरुआत हो इससे पहले ही टीम ने मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के लिए यह बड़ा अपमान था। न्यूजीलैंड की टीम के इस फैसले पर पाकिस्तान में कड़ी प्रतिक्रिया हुई। अभी इस झटके से पाकिस्तानी क्रिकेट उभरा भी नहीं था कि इंग्लैंड ने भी पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया। उसने पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। पाकिस्तान क्रिकेट के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था क्योंकि कोविड-19 के कारण जब इंग्लिश क्रिकेट परेशानी में था तब पाकिस्तान ने वहां का दौरा किया था। इस सीरीज ने इंग्लैंड को बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया था। इस दौरे के पीछे कहीं न कहीं शर्त यह थी कि इंग्लैंड भी पाकिस्तान का दौरा करेगा। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने हालांकि अगले साल पाकिस्तान जाने का वादा किया है। लेकिन यह सब भी पाकिस्तान के माहौल पर निर्भर करेगा। खिलाड़ियों को मिलने वाली सुरक्षा अलग बात है लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रमीज राजा आईसीसी के इस फैसले से काफी खुश नजर आए थे। उन्होंने कहा, ‘आईसीसी के अपने एलीट टूर्नामेंट का मेजबान पाकिस्तान को चुनने से मैं बेहद खुश हूं। बड़ी वैश्विक प्रतियोगिता के लिए पाकिस्तान को एलॉट करके आईसीसी ने हमारे प्रबंधन और संचालन क्षमता तथा कौशल पर पूरा भरोसा जताया है।’ एक अहम सवाल यह है कि पाकिस्तान को मेजबानी तो मिल गई है लेकिन उसके देश में खेलने जाएगा कौन। पाकिस्तान के कई पूर्व क्रिकेटर बार-बार यह बात कह चुके हैं कि उन्हें अब अपने देश में ही खेलना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं होगा तब तक युवा खिलाड़ियों को स्टार नहीं मिलेंगे। बेशक, पाकिस्तान में आईसीसी टूर्नमेंट की वापसी एक अच्छी खबर है लेकिन यहीं से पाकिस्तान की बड़ी जिम्मेदारी तय होती है। अगर इमरान खान अपने देश के माहौल को सुरक्षित नहीं बना पाते हैं तो फिर उनके लिए बहुत मुश्किल हो सकती है। इमरान की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि आईसीसी को ऐसा न लगे कि उन्होंने कोई गलती की है। पाकिस्तान को इसके साथ ही यह भी तय करना होगा कि वह भारत या अन्य किसी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में संलिप्त न हो। उसे ऐसा करके दिखाना होगा। वरना यह मेजबानी सिर्फ कागजों पर ही सीमित रह सकती है। पाकिस्तान अगर भारत के खिलाफ अपने रवैये में बदलाव नहीं करता है तो भारतीय टीम पाकिस्तान में खेलने से इनकार कर सकती है। मौजूदा हालात में ऐसा लगता नहीं कि भारतीय टीम यह टूर्नमेंट खेलने पाकिस्तान जाएगी। और अगर भारत नहीं जाता है तो आईसीसी के लिए पाकिस्तान में टूर्नमेंट करवाना असंभव ही है। ऐसे में हो सकता है कि टूर्नमेंट की मेजबानी पाकिस्तान के पास ही रहे लेकिन इसका आयोजन यूएई में हो। तो मेजबानी मिल तो गई लेकिन 2025 चैंपियंस ट्रोफी पाकिस्तान में होगी या नहीं यह उसकी हरकतों पर निर्भर करेगा।


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