नई दिल्ली दो साल पहले भारतीय टीम को पता चल गया था कि उसे लगातार दो साल एक के बाद दो टी20 वर्ल्ड कप खेलने हैं। टीम प्रबंधन को इस बात का अहसास हुआ कि उसे इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के अंदाज का क्रिकेट खेलने की जरूरत है। यानी पहली ही गेंद से आक्रामक बल्लेबाजी। इसके बाद पारी के अंत में जादुई करिश्मे की अहमियत भी थी। विक्रम राठौड़ ने बतौर बल्लेबाजी कोच अपनी भूमिका कुछ इस तरह समझी कि उन्हें एक निडर होकर खेले और उस पर किसी तरह की बंदिश न हो। दो साल बाद भारतीय टीम पहले टी20 वर्ल्ड कप 2021 के पहले दो मैचों में सात विशेषज्ञ बल्लेबाजों के साथ उतरी है। और इसमें से एक भी ऐसा बैकअप बल्लेबाज नहीं है जो पारी के अंत में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर मैच को खत्म कर सके। दो हिटर्स अपने रंग में नहीं हैं। रविंद्र जडेजा और हार्दिक पंड्या नंबर 6 और नंबर 7 पर उस भूमिका को अच्छे से नहीं निभा पाए। उनसे पहले के बल्लेबाज पारी बनाने में लगे रहे। शायद यही कारण था कि भारतीय बल्लेबाजों की जरूरत से ज्यादा सावधानी भरी पारी से टीम टूर्नमेंट से बाहर होने की कगार पर खड़ी है। राठौड़ ने अफगानिस्तान के खिलाफ मैच की पूर्व संध्या पर कहा, 'हमारी टीम में रविंद्र जडेजा भी है। फिर हमारे पास सूर्यकुमार यादव हैं, विराट कोहली हैं। हमारे पास ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो मैच खत्म कर सकते हैं। उन्होंने पहले भी ऐसा किया है।' हालांकि, हकीकत यह है कि टॉप चार में चुने गए बल्लेबाज, विराट कोहली, रोहित शर्मा और केएल राहुल के अलावा सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन ऐस बल्लेबाज के तौर पर देखे जाते हैं जो डेथ ओवर्स में आकर पावर-हिटिंग नहीं कर सकते। अगला नंबर ऋषभ पंत का आता है लेकिन वह अकसर नंबर 5 पर आकर पारी को बनाने में लगे रहते हैं। राठौड़ ने कहा, 'किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीम को इस दौर से गुजरना पड़ता है। जब आप राज्य या फ्रैंचाइजी के लिए खेलते हैं तो आप हमेशा टॉप चार में बल्लेबाजी करते हैं। पर जब आप भारतीय टीम के लिए खेलते हैं तो आपको कुछ बैटिंग ऑर्डर के हिसाब से खेलना पड़ता है। एक प्रफेशनल क्रिकेटर होने के नाते आपको कहीं भी बल्लेबाजी करने के लिए तैयार होना चाहिए।' अगर चीजों को उस नजरिए से देखें तो ज्यादातर आईपीएल टीमों के पास विदेशी खिलाड़ी पावर-हिटर्स की भूमिका में थे। और वे खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय टीम में भी इस किरदार को अच्छे से निभाते हैं। आंद्रे रसल, कायरन पोलार्ड, मार्कस स्टॉयनिस, शिमरॉन हेटमायर, ग्लेन मैक्सवेल, मोईन अली, ड्वेन ब्रावो, सैम करन जैसे कुछ उदाहरण हैं। जडेजा अकेले भारतीय बल्लेबाज हैं जो इस भूमिका को निभा रहे हैं और जो अच्छे फॉर्म में हैं। शार्दुल ठाकुर फैली हुई फील्ड का तोड़ नहीं निकाल पा रहे हैं। हालांकि वह टेस्ट मैचों में ऐसा कर लेते हैं। तो, कुल मिलाकर टीम की तैयारी सिर्फ आईपीएल थी। उनके पास टीम के खिलाड़ियों को उनकी भूमिका बताना और खिलाड़ियों को उसके लिए तैयार होने देने का वक्त ही नहीं था। इन खिलाड़ियों ने इस साल सिर्फ पांच टी20 इंटरनैशनल मैच खेले हैं और वह भी करीब 8 महीने पहले। राठौड़ हालांकि इसे समस्या नहीं मानते। उन्होंने कहा, 'कोई भी तैयारी, अच्छी तैयारी होती है। टीम की समस्या रणनीति को सही तरीके से अमल में नहीं ला पाना है, न कि तैयारी।' राठौड़ ने आगे कहा, 'एक अन्य मुद्दा यहां की पिच हैं। जब आप इन पर पहले बल्लेबाजी करते हैं तो स्ट्राइक बदलना एक समस्या होता है। यह सभी टीमों के साथ हुआ है। दुर्भाग्य से हम बड़े शॉट नहीं खेल पाए।'
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