Tuesday, November 16, 2021

नए युग की शुरुआत: नंबर्स और मनोदशा के 'द्रविड़ प्लान' के जरिए टीम इंडिया का संवरेगा भविष्य

नई दिल्ली साल 2021 की पहली छमाही में भारतीय क्रिकेट की गहराई नजर आई। ऋषभ पंत, वॉशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज और ईशान किशन जैसे युवा खिलाड़ियों ने टीम को बड़ी और अहम जीत दिलाईं। इनमें से ज्यादातर हीरो राहुल द्रविड़ स्कूल ऑफ क्रिकेट से निकले हैं। सब नैशनल क्रिकेट अकादमी से ताल्लुक रखते रहे। इससे यह तो साफ हो गया कि भारतीय क्रिकेट की लंबे सफर के लिए तैयार है। साल 2016 की बात है। द्रविड़ अंडर-19 टीम के कोच रूप में थे। टीम वर्ल्ड कप खेलकर आई थी। उन्होंने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था, 'एक कोच के रूप में मुझे अहसास हुआ है कि मैं उन्हें वैसे कोचिंग नहीं दे सकता जैसी कोचिंग मुझे मिली है। मैं उसे बदला और यही सबसे मजेदार बात है। मुझे अपनी ही सोच को चुनौती देने की जरूरत है।' अब इसी साल अगस्त में आते हैं। लॉर्ड्स में भारत ने अपनी दूसरी पारी घोषित कर इंग्लैंड को बल्लेबाजी का न्योता दिया ओवर बहुत कम बचे थे। लेकिन द्रविड़ के खास और टीम इंडिया के नए बोलिंग कोच पारस महाम्ब्रे ने दावा किया था, 'यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि हम अलग-अलग खिलाड़ियों के साथ जो प्रक्रिया अपना रहे थे, वह सही रास्ते पर थी। हम पहले उन्हें फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तैयार करना चाहते थे। हम चाहते थे कि वह पहले खुद को यहां स्थापित कर लें और फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जाएं।' भारतीय क्रिकेट में 'प्रोसेस' यानी प्रक्रिया शब्द को बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। बीते दो दशकों में इसे कई बार जरूरत से ज्यादा भी बोला गया है। लेकिन द्रविड़ ने खास तौर पर ऐसे व्यक्ति के तौर पर काम किया है जो टीम इंडिया के लिए सप्लाई लाइन को बनाए रखे। यह सिर्फ तकनीक, वर्क एथिक्स और खेल की समझ की बात नहीं है। कोचिंग स्टाफ की यह नई टीम एक टीम को तैयार करने में अधिक अकादमिक तरीके अपनाएगी। नंबर्स और खिलाड़ियों के मन को बराबर तवज्जो दी जाएगी। महाम्ब्रे ने हमें अगस्त में बताया था, 'हमने एनसीए में इंडिया-ए और अंडर-19 में खिलाड़ियों को उनके डाटा और आंकड़ों के साथ ही उनकी ताकत पर भी बात करते हैं। हम उन्हें तैयार करने में यकीन रखते हैं। इन सब चीजों पर स्पष्टता होनी बहुत जरूरी है। राहुल खिलाड़ियों के साथ बैठेंगे और उन्हें बताएंगे कि आखिर उनके लिए कोई खास फैसला क्यों लिया गया है।' उन्होंने आगे कहा था, 'उनसे उनके आंकड़ों के बारे में बात कीजिए। यह मैच और ओवर की बात ही नहीं है। बल्कि यह भी ध्यान रखना है कि एक बोलर या बल्लेबाज का प्रैक्टिस में कितनी गेंद फेंकता है या खेलता है। ऐसे बहुत से उदाहरण सामने आए हैं कि फॉर्म में चल रहे कई खिलाड़ियों ने खुद को बचाने के लिए इंडिया-ए के मैचों से खुद को अलग कर लिया।' महाम्ब्रे ने आगे कहा था, 'हमारे लिए यह जरूरी है कि हम खिलाड़ियों पर भरोसा करें। तो हम हल्की-फुल्की बातों पर ज्यादा तवज्जो देते थे। हम सिर्फ क्रिकेट ही नहीं बल्कि थोड़ा बहुत परिवार और बैकग्राउंड की भी चर्चा होती थी। हम खिलाड़ियों की मनोदशा के साथ ही वह किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं को समझने का प्रयास करते थे। हमें ऐसा करने की जरूरत थी ताकि हमारा संदेश सभी तक पहुंच सके। खिलाड़ियों के लिए क्या काम करेगा यह जानने के लिए आप उन्हें विकल्प दीजिए, खिलाड़ी सही ऑप्शन तक पहुंच जाएंगे।' द्रविड़ ने कोच बनने के अगले दिन से ही खिलाड़ियों की मनोदशा को समझने का प्रयास शुरू कर दिया है। उन्होंने खिलाड़ियों को बुलाया उनसे बात की। उनकी राय सुनी और इसके बाद जयपुर में अपने पहले मुकाबले के लिए टीम तैयार करने बैठे। पेसर्स के लिए प्लान पेसर्स के लिए प्लान तैयार किया जा चुका है। महाम्ब्रे ने कहा, 'यह देखना दिलचस्प होगा कि ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी जैसे सीनियर तेज गेंदबाज कब तक खेलते हैं। युवा खिलाड़ियों को अनुभव हासिल करने के लिए कितने वक्त की जरूरत है। सिराज और शार्दुल को कुछ मौके मिले हैं। फिर आवेश खान, नवदीप सैनी, दीपक चाहर भी हैं। हमें हर सीरीज में ऐसे कॉम्बिनेशन की तैयारी करनी है कि युवा गेंदबाज सीनियर गेंदबाज के साथ खेल रहा हो ताकि वे अनुभव हासिल कर सकें।' ऑलराउंडर्स पर भरोसा कपिल देव के बाद से भारतीय टीम एक फास्ट बोलिंग ऑलराउंडर की तलाश कर रहा है। हार्दिक पंड्या के उस स्तर पर नहीं पहुंच पाने से निराशा पनपी है। उन्होंने आगे कहा, 'यह तलाश हमेशा चलती रहेगी। टीम का संतुलन तैयार करना हमेशा एक चुनौतीपूर्ण मकाम होता है। पर यह काफी हद तक खिलाड़ियों पर निर्भर करता है। गेंदबाजी और बल्लेबाजी- दोनों करने वाले खिलाड़ी शायद आपको कई बार अपेक्षित आकंड़े नहीं दे पाएं। फिर इसके बाद चोट का भी खतरा रहता है। लेकिन आपको उनका भरोसा हासिल करना होता है और बताना होता है कि उनका खास ख्याल रखना होगा। उन्हें यह अहसास दिलाना होगा कि फास्ट बोलिंग ऑलराउंडर होना बहुत बड़ी बात है।' इस मुश्किल वक्त में द्रविड़ और महाम्ब्रे खुद को चुनौती देना चाहेंगे और उम्मीद करेंगे कि उनकी मेहनत रंग लाए।


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