मुंबईभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने (Virat Kohli) की जगह (Rohit Sharma) को वनडे टीम का कप्तान नियुक्त किया है। यह इसलिए सही भी है, क्योंकि कोहली ने टी 20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था। उम्मीद थी कि उन्हें जल्द ही 50 ओवर की कप्तानी भी छोड़नी होगी, क्योंकि बीसीसीआई ने स्पष्ट कर दिया था कि सफेद गेंदों वाले फॉर्मेट में दो अलग-अलग कप्तान नहीं होंगे। भारतीय टीम के नए कोच राहुल द्रविड़ भी इस बात से सहमत थे। अब इसपर फैसला ले लिया गया है और बीसीसीआई ने ऐलान करते हुए कई मामलों पर से पर्दा उठा दिया। एक लाइन में उसने कहा कि रोहित शर्मा अब वनडे और टी-20 दोनों टीमों के कप्तान होंगे, जबकि टेस्ट टीम की उपकप्तानी भी करेंगे। इस पूरे मामलों की जानकारी रखने वालों का कहना है, 'यह ठीक है। रोहित का समय आ गया है और उन्हें कप्तान के रूप में पूरी तरह गार्ड लेना चाहिए। विराट को इसे स्वीकार करना चाहिए, लेकिन यहां गंभीर चिंता की बात यह है कि बीसीसीआई, खासकर (इसके अध्यक्ष) सौरभी गांगुली, ने किस तरह इस मुद्दे को हल किया।' आज से ठीक 16 साल और तीन महीने पहले गांगुली (तब टीम इंडिया के कप्तान) को लंबे समय तक चले बेहद खराब फॉर्म के बाद टीम से बाहर कर दिया गया था। तत्कालन कोच ग्रेग चैपल ने तीखे ईमेल लिखते हुए बीसीसीआई को बताया था कि कैसे गांगुली टीम का नेतृत्व करने के लिए फिट नहीं थे और कैसे उनका व्यवहार भारतीय टीम को नुकसान पहुंचा रहा था। इसके बाद राहुल द्रविड़ को कप्तानी मिली थी। संघर्ष और मुश्किल समय में उस वक्त गांगुली ने बीसीसीआई को अपने साथ खड़ा पाया। तब बोर्ड के अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्र ने संकट में गांगुली के समर्थन में मीडिया को एक बयान जारी किया और कहा कि कोच और क्रिकेटर को प्रफेशनल रिलेशन कायम रखना चाहिए। बोर्ड के समर्थन और जबरदस्त कोशिशों की वजह से दस महीने बाद गांगुली ने भारतीय टीम में वापसी की थी। कोहली के साथ ऐसा नहीं है। वह खराब फॉर्म, नहीं बल्कि एक एक ईमेल के माध्यम से कप्तानी से हटाए जाने की वजह से शर्मिंदा होंगे। बीसीसीआई और कोहली के बीच कप्तानी में बदलाव को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। चैपल और गांगुली मामले को देखते हुए यही कहीं से भी ऑफ द फील्ड अच्छा व्यवहार नहीं माना जा सकता है। इस मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है- फिलहाल कोहली को बीसीसीआई की जरूरत है। बोर्ड को जरूरत है कोहली की शर्मिंदगी को दूर करने, उनके गुस्से और हताशा को दूर करने की, जिससे वह गुजर रहे होंगे। अब सवाल उठता है कि क्या गांगुली (बीसीसीआई अध्यक्ष) अपने क्रिकेटर के साथ खड़े होंगे, जिस तरह से कभी बोर्ड उनके साथ खड़ा था। जिस तरह गांगुली को द्रविड़ की कप्तानी में खेलना था, जिनके साथ उन्होंने अपने करियर के टॉप पर रहते हुए अच्छे और बुरे संबंध रखे थे। इसी तरह अब कोहली को लिमिटेड ओवर्स की फॉर्मेट में रोहित शर्मा की कप्तानी में खेलना है। एक ओर जहां रोहित को अपने शानदार कप्तानी कौशल को दिखाने का मौका मिला है तो दूसरी ओर कोहली को बैटिंग पर फोस करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, यहां बोर्ड को दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच संबंधों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। कप्तानी में बदलाव की घोषणा करने से पहले बीसीसीआई अध्यक्ष और कोहली के बीच बातचीत हुई या नहीं, इसका पता नहीं चल पाया है। इस बारे में क्रिकेट विशेषज्ञों का सवाल है- सचिव जय शाह सहित BCCI के अन्य पदाधिकारी प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, लेकिन लेकिन गांगुली (भारत के कप्तान और 116 टेस्ट के अनुभवी) को क्रिकेट का गंभीर अनुभव है। क्या वह अपने अनुभवों को देखते हुए कोहली को फिर से फॉर्म में आने में मदद करेंगे? इसमें किसी के मन में कोई संदेह नहीं है कि कोहली (97 टेस्ट, 254 वनडे और 95 टी 20 अंतरराष्ट्रीय) इस दौर के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्हें मदद के लिए एक अनुभवी और प्रेरक खिलाड़ी की जरूरत है। इस काम के लिए गांगुली से बेहतर कौन है?
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