Wednesday, December 8, 2021

Video: स्टोक्स ने फेंके लगातार 4 नो-बॉल, अंपायर ने एक भी नहीं दिए... मचा बवाल

ब्रिस्बेनएशेज सीरीज के पहले ही मुकाबले में नया बवाल होता दिख रहा है। दरअसल, ऑस्ट्रेलियाई पारी के एक ओवर में बेन स्टोक्स ने लगातार 4 नो-बॉल की, लेकिन अंपायर की नजर एक पर भी नहीं पड़ी। चौथी गेंद पर डेविड वॉर्नर बोल्ड हुए तो नो-बॉल चेकी गई तब असलियत सामने आई। इसके बाद सभी 4 गेंदों के नो-बॉल होने की बात सामने आई। इस पर पूर्व अंपायर साइमन टफेल और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग काफी भड़के नजर आए। पहले समझते हैं हुआ क्या था...पारी का 13वां करने आए बेन स्टोक्स, जो उनका पहला ओवर था, ने चौथी गेंद पर डेविड वॉर्नर को बोल्ड कर दिया। इंग्लैंड खेमे में काफी खुशी थी। हालांकि स्टोक्स के चेहरे पर दिख गया था कि कोई चूक हो गई है। उन्होंने, सेलिब्रेट नहीं किया। जी, स्टोक्स का पैर क्रीज से आगे था। यह एक नो-बॉल थी। यह अच्छी इनस्विंग बॉल थी। वॉर्नर डिफेंस में चूक गए। गेंद उनके पैड से लगकर स्टंप से जा टकराई। वॉर्नर को रुकने के लिए कहा गया यह चेक करने के लिए कहीं यह नो-बॉल तो नहीं थी। और ऐसा ही हुआ। बिग स्क्रीन पर रीप्ले आने से पहले, स्टोक्स अपने गेंदबाजी मार्क पर चले गए थे। पूर्व बॉलर ट्रेंट कोपलैंड भड़के, बोले- बड़ी चूकचैनल 7 पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाज ट्रेंट कोपलैंड ने स्टोक्स की पहले की नो-बॉल नहीं देने की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'यदि आप नहीं जानते कि यह हो रहा है तो आप पूरी तरह से विफल हैं। अगर विकेट गिरने पर नहीं जांचा जाता तो इसका पता भी नहीं चलता। इसका सीधा मतलब है कि तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।' दयनीय अंपायरिंग: रिकी पोंटिंगऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने इसे दयनीय अंपायरिंग बताया। उन्होंने कहा, 'अगर कोई ऊपर से इनकी जांच कर रहा है और उन्होंने यह तय नहीं किया है कि उनमें से कोई भी नो-बॉल है तो जहां तक मेरा संबंध है, यह सिर्फ दयनीय अंपायरिंग है।' इस तरह की गलती समझ से परे: साइमन टॉफेलपूर्व अंपायर साइमन टॉफेल ने कहा, 'खेल की स्थिति और तकनीक प्रक्रिया के अनुसार उन्हें हर गेंद की जांच करनी चाहिए। मैं वास्तव में यह नहीं समझा सकता कि उन्हें क्यों नहीं जांचा गया। तीसरे अंपायर के पास तकनीकी छमता है। उन्हें हर गेंद की जांच करनी चाहिए' इसलिए मैदानी अंपायर नहीं जिम्मेदारहैरान करने वाली बात यह रही कि पिछली 3 गेंदें भी नो-बॉल थीं, लेकिन थर्ड अंपायर से चूक हुई। इसके लिए मैदानी अंपायर जिम्मेदार नहीं थे। दरअसल, नो-बॉल जांचने का काम तीसरे अंपायर को सौंपने का फैसला अगस्त, 2019 में किया गया था। इस सिस्टम को पहली बार 2106 में इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हुई वनडे सीरीज में प्रयोग किया गया था।


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