के श्रीनिवास राव, मुंबई वेस्ट इंडीज दौरे पर भारतीय टीम ने अपनी पूरी क्षमता के साथ जाने का फैसला किया है। इसके पीछे कई कारण हैं। पहला, हालांकि हाल ही में समाप्त हुआ है लेकिन ज्यादातर क्रिकेटर सीमित ओवरों के खेल से ब्रेक नहीं लेना चाहते हैं। दूसरा, चैंपियनशिप की शुरुआत होते ही टेस्ट सीरीज भी काफी महत्वपूर्ण बन गई है। तीसरा, जहां तक अगले दो साल के क्रिकेट कैलेंडर की बात है उसे देखते हुए सीनियर खिलाड़ियों का टीम के साथ होना जरूरी है। पढ़ें, मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, 'सीधी सी बात है, हर टेस्ट सीरीज महत्वपूर्ण होने वाली है। जहां तक सीमित ओवरों के खेल की बात है तो हमें 2020 और 2021 में लगातार वर्ल्ड टी20 खेलना है। तो उसके लिए काम अभी से शुरू करना होगा।' अब सवाल पूछे जा रहे हैं कि वेस्ट इंडीज दौरे के लिए चुने गए खिलाड़ियों को लेकर इतना संशय क्यों है। किसे चुना गया, किसे ड्रॉप किया गया या किसे नजरअंदाज किया गया, इस सबका आकलन किया जा रहा है। एमएसके प्रसाद की अध्यक्षता वाली चयनसमिति सीधे निशाने पर है। एक सूत्र ने कहा, 'जब आप चयन समिति की कार्यप्रणाली को देखते हैं तो आपके दिमाग में सिर्फ एक शब्द आता है- गुप्त।' देखें, अंबाती रायुडू वर्ल्ड कप नहीं गए, शुभमन गिल को वेस्ट इंडीज दौरे के लिए नहीं चुना गया, दिनेश कार्तिक को ड्रॉप किया गया, वर्ल्ड कप के लिए चुने गए विजय शंकर और मयंक अग्रवाल जगह नहीं बना पाए। ऋषभ पंत बतौर विकेटकीपर पहली पसंद बने। श्रेयस अय्यर और मनीष पांडे को पहले टीम में चुना गया, फिर ड्रॉप किया गया, फिर चुना गया, फिर ड्रॉप किया गया, और अब फिर वेस्ट इंडीज के खिलाफ उन्हें टीम में चुना गया है। केदार जाधव को एक बार फिर 50 ओवरों के प्रारूप के लिए टीम में चुना गया है, हालांकि वर्ल्ड कप के आखिरी मैचों में उन्हें टीम से ड्रॉप किया गया था। यह लिस्ट बहुत लंबी है। क्रिकेट जगत में लोग अब नजरिए और रोड मैप को लेकर सवाल पूछने लगे हैं। टीम पर गहरी नजर रखने वाले एक सूत्र ने कहा, 'गिल को लेकर मैं समझ सकता हूं। संभव है कि चयनकर्ता उन्हें घरेलू सीरीज में पहला मौका देना चाहते हों। कुछ अच्छे डिजर्विंग खिलाड़ी टीम में वापस आ चुके हैं, जो अच्छा है। लेकिन कुछ फैसले चौंकाने वाले हैं, और इन सभी में एक जैसा पैटर्न नजर आ रहा है। एक बड़ा सवाल यह है कि क्या चयनकर्ताओं ने पिछले 24 महीनों में इन खिलाड़ियों से बात की है? क्या उन्हें अपनी योजनाओं के बारे में बताया है।' पढ़ें, जसप्रीत बुमराह के लिए यह जानना कोई मुश्किल नहीं कि आखिर उन्हें टीम में क्यों चुना गया। रोहित शर्मा को भी यह मालूम है कि वह भारत के लिए सीमित ओवरों में खेलते रहेंगे। यह समझना भी आसान है कि हार्दिक पंड्या टीम के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। चयनकर्ताओं का काम खिलाड़ियों को चुनना या उन्हें बैक करना नहीं होता। खिलाड़ी यहां अपनी प्रतिभा से हैं। उनका काम उन खिलाड़ियों से बात करना है जिनकी जगह पक्की नहीं है। जिन्हें हर दूसरे मैच या सीरीज में या तो टीम में चुना जाता है या फिर बाहर कर दिया जाता है। चयनकर्ताओं का काम है उन खिलाड़ियों को बताना है कि क्या सही चल रहा है और किसमें सुधार किया जा सकता है। और ऐसा होता नहीं लग रहा है। 2018 में भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान मुरली विजय का ही उदाहरण लीजिए। उन्हें दूसरे टेस्ट मैच के बाद ड्रॉप कर दिया गया और वह भारत आकर घरेलू क्रिकेट खेलने लग गए। वापस आने के बाद उन्होंने कहा, 'चयनकर्ताओं से कोई बात नहीं हुई है।' कुछ अन्य खिलाड़ियों ने विजय की तरह खुलकर अपनी बात नहीं की। ने चयनकर्ताओं के लिए खिलाड़ियों से बात करना जरूरी नहीं बना रखा है। पूर्व चयनकर्ताओं ने माना है, 'सभी खिलाड़ियों से बात करना कई बार काफी मुश्किल होता है और ऐसा कर पाना संभव नहीं होता।' ऐसे में बड़ा सवाल है कि यह काम अब कौन करेगा।
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