Thursday, July 25, 2019

KXIP में अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं नेस वाडिया?

के.श्रीनिवास राव, मुंबई जिन लोगों ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में एक दशक से कुछ समय पहले निवेश किया था, वे जानते हैं कि अब उनके लिए मुनाफा कमाने का वक्त है। प्रसारण अधिकार और सेंट्रल पूल ऑफ स्पॉन्सरशिप में इजाफा हो गया है। अगली बार की नीलामी में इनमें और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। ऐसे में बीसीसीआई और फ्रैंचाइजी के बीच में दोनों के बीच 50-50 का करार है। और इसका अर्थ है आने वाले वक्त में कमाई बढ़ने की पूरी संभावना है। हालांकि का परिवार ऐसा नहीं सोचता। अगर लीग से जुड़े सूत्रों की बात मानी जाए तो वाडिया पर फ्रैंचाइजी छोड़ने का दबाव है। नेस आईपीएल की शुरुआत के साथ ही उससे जुड़े हुए हैं। वह टीम के चार मालिकों में से एक हैं। उनके पास टीम के 23 प्रतिशत शेयर हैं, अभिनेत्री प्रीति जिंटा के पास भी इतना ही हिस्सा है। डाबर के प्रमोटर बर्मन परिवार के पास सबसे ज्यादा 46 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं एक छोटे हिस्सेदार के पास बाकी 8 फीसदी शेयर हैं। बर्मन और जिंटा अपना हिस्सा नहीं बेचना चाहते। उद्योग जगत से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'सिर्फ नेस टीम से अलग होना चाहते हैं। इसके पीछे एक वजह उनके परिवार की ऐसी इच्छा है और दूसरा वह खुद भी ऐसा चाहते हैं।' फ्रैंचाइजी अब संभावित निवेशक तलाश रही है। हाल ही में यूके के एक बैंक से भी बातचीत हुई है। हालांकि यह बात कहां खत्म हुई इस पर कोई खबर नहीं है। डाबर के मोहित बर्मन ने भी इससे इनकार नहीं किया है। मोहित ने कहा, 'पिछले कुछ वक्त में कई लोगों ने हमसे बात की है।' वाडिया के बारे में उन्होंने कहा, 'मैं नेस के बारे में कुछ नहीं जानता, आपको उन्हीं से इस बारे में पूछना होगा।' यह सिर्फ कहानी का एक हिस्सा है। एक बात भी निकलकर आ रही है कि किंग्स इलेवन पंजाब को राजस्थान रॉयल्स के साथ एक ही पूल में रखा गया है। रॉयल्स भी काफी समय से हिस्सेदारी बेचने का प्रयास कर रही है। 'दोनों ही मामलों के तार ललित मोदी और उनके परिवार से जुड़ते हैं। और इसके चलते दोनों परिवारों को कई बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।' राजस्थान रॉयल्स में सबसे बड़ी हिस्सेदारी- 50 प्रतिशत से कुछ कम- सुरेश चेलाराम की बेटी की है। चेलाराम मोदी के साढ़ू हैं। वहीं किंग्स इलेवन में बड़ी हिस्सेदारी बर्मन परिवार की है, जहां मोहित के भाई गौरव मोदी के रिश्तेदार हैं। सूत्रों ने कहा, 'दोनों ही मामलों में हिस्सेदारी बेचने के लिए आईपीएल गर्वनिंग काउंसिल की अनुमति की आवश्यकता होगी। और असल बात यह है कि फिलहाल कोई गर्वनिंग काउंसिल नहीं है। तो अगर इनमें से किसी भी फ्रैंचाइजी की निवेशक से कोई बात तय होती है तो भी उसे बीसीसीआई के चुनावों का इंतजार करना होगा।' ऐसे में सिर्फ एक रास्ता बचता है कि फ्रैंचाइजी के सह-मालिक ही हिस्सा खरीद लें।


from Cricket News in Hindi, Cricket Updates, Live Scorecard, Schedules, Results, Teams and Points Table – Navbharat Times https://ift.tt/2Y8r7zO
Share:

0 comments:

Post a Comment

Blog Archive

Definition List

Unordered List

Support