वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में भारत और न्यू जीलैंड की टीमें मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर भिड़ने को तैयार हैं। इस मैच का पलड़ा भारतीय टीम के पक्ष में झुका हुआ जरूर नजर आ रहा है, लेकिन कीवी टीम को कहीं से भी हल्के में लेना हमें भारी पड़ सकता है। दोनों ही टीमों की तरफ से इस टूर्नमेंट कुछ शानदार परफॉर्मेंस दिखाई दिए हैं, तो वहीं दूसरी ओर चंद ऐसी कमजोरियां भी उजागर हुई हैं, जो उनके खिताबी जीत के सपने को चकनाचूर कर सकती हैं। इस मैच से पहले राहुल कुमार, रूपेश रंजन, रौशन झा और भाविन पंड्या ने भारत और न्यू जीलैंड की खूबियों और खामियों का आकलन किया है। बेमिसाल टॉप ऑर्डर रोहित शर्मा की रेकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी इस टूर्नामेंट में भारत का सबसे दमदार पहलू रहा है। हिटमैन पांच सेंचुरी और एक हाफ सेंचुरी समेत लीग राउंड तक 647 रन के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर हैं। कप्तान भले ही अब तक शतक से महरूम हैं, मगर लगातार अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं। वह पांच अर्धशतकों के साथ 442 रन बना चुके हैं। शिखर धवन की जगह लेने वाले केएल राहुल ने एक शतक और दो अर्धशतक समेत 360 रन जुटाकर ओपनिंग की चिंता दूर कर दी है। भारत के टॉप ऑर्डर के इन तीनों बल्लेबाजों का फॉर्म में होना टीम इंडिया के लिए बेहद शुभ संकेत हैं। कीवी गेंदबाज अगर इन पर लगाम नहीं लगा पाए तो टीम इंडिया फिर से अजेय साबित होगी। पढ़ें: पेसर भी हैं जोश में जसप्रीत बुमरा (8 मैच, 17 विकेट, ऐवरेज-19.52) हमेशा की तरह भारत के ट्रंप कार्ड साबित हो रहे हैं और डेथ ओवरों में उनकी सटीक गेंदबाजी विपक्षी बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोहम्मद शमी (4 मैच, 14 विकेट, ऐवरेज-13.78 ) देर से आए लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ हैटट्रिक मारकर जोरदार एंट्री की और उसके बाद हर मैच में विकेट दर विकेट झटका है। भुवनेश्वर कुमार ने हालांकि 5 मैचों में 7 विकेट ही लिए हैं, लेकिन बल्लेबाजों पर दबाव जरूर बनाया है। कीवियों के खिलाफ टीम मैनेजमेंट शमी या भुवी में से किसी एक को या फिर कंडीशन को देखते हुए दोनों को मौका दे सकता है। पढ़ें: युजवेंद्र रहे असरदार भारत के पास युजवेंद्र चहल के रूप में एक ऐसा स्पिनर है जिसने अहम मौकों पर विकेट चटकाकर जमी-जमाई जोड़ी को तोड़ने का काम बखूबी किया है। वह सात मैचों में 34.45 की औसत से 11 विकेट ले चुके हैं। फील्डिंग में एनर्जी टीम इंडिया ने खुद से कमजोर फील्डिंग साइड का टैग हटा लिया है और मौजूदा प्लेयर्स ने अपने ऐथलेटिसिज्म की छाप छोड़ी है। पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बाद तो खुद विपक्षी खेमे की तरफ से भारतीय प्लेयर्स की चुस्ती-फुर्ती की तारीफ की गई। पढ़ें- लचर मिडल ऑर्डर- चिंता की बात यहां असली दिक्कत है। रोहित, राहुल, विराट न चलें तो मध्यक्रम भरोसेमंद नहीं दिख रहा। कई अच्छी शुरुआत को टीम भुना नहीं पाई। मिडल ऑर्डर में धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पंड्या, दिनेश कार्तिक, विजय शंकर से लेकर ऋषभ पंत खेल चुके हैं, लेकिन उलझनें अब भी कायम हैं। खुद माही का स्लो स्ट्राइक रेट सवालों के घेरे में आ गया। इंग्लैंड के खिलाफ मैच में भी आखिरी ओवरों में टीम की यही कमजोरी दिखी। पांचवें गेंदबाज की चुनौती टीम को पांचवें गेंदबाज के दस ओवर के कोटे को लेकर दिक्कत पेश आई है। पांचवें गेंदबाज के रूप में हालांकि हार्दिक पंड्या से लगभग सारे ओवर डलवाए गए हैं और वे अब तक नौ विकेट भी ले चुके हैं। लेकिन, कई मैचों में देखा गया कि बीच के ओवरों में विपक्षी बल्लेबाजों के ऊपर से प्रेशर हट गया। पढ़ें: उम्दा तेज गेंदबाजी लॉकी फर्ग्युसन (7 मैच में 17 विकेट), ट्रेंट बोल्ट (8 मैचों में 15 विकेट) और जेम्स नीशम (8 मैचों में 11 विकेट) के रूप में कीवियों के पास खौफनाक तेज गेंदबाजों का ऐसा लाइनअप है जिससे भारतीय बल्लेबाजी क्रम को संभलकर रहना होगा। इंग्लिश कंडीशन में इनकी रफ्तार और स्विंग लीग मैचों में अपना असर दिखा चुकी है। विलियमसन का नेतृत्व ने अपने नेतृत्व और व्यक्तिगत प्रदर्शन से हमेशा की तरह इस वर्ल्ड कप में भी पूरे टीम के मनोबल को ऊंचा उठाया है। वह टीम की तरफ से टूर्नामेंट में सर्वाधिक सफल बल्लेबाज भी हैं जो 2 शतक और 1 अर्धशतक समेत 96.20 की ऐवरेज से अब तक 481 रन बना चुके हैं। केन के कंधों पर फिर से बल्लेबाजी का सबसे ज्यादा दारोमदार रहेगा। ऑलराउंडर्स देते हैं ताकत कीवी टीम के पास उम्दा ऑलराउंडर्स हैं जिससे उसकी बल्लेबाजी में गहराई बढ़ती है तो गेंदबाजी में ज्यादा विकल्प मिलते हैं। जेम्स नीशम, कोलिन ग्रैंडहोम, मिचेल सैंटनर सरीखे हरफनमौला खिलाड़ी भारत के खिलाफ अहम हथियार हो सकते हैं। बल्लेबाजी में हमसे कमजोर विलियमसन को छोड़ दें तो पूरे टूर्नामेंट ऐसा अन्य कोई बल्लेबाज नहीं है, जो कोई खास कमाल दिखा पाया है। अनुभवी रॉज टेलर (8 मैचों में 261 रन, 37.28) का बल्ला भी लगभग खामोश रहा है। कागज पर भारतीय बल्लेबाजी के पराक्रम के सामने कीवी टीम नहीं ठहरती। रोहित, विराट, राहुल, धोनी के सम्मिलित रेकॉर्ड के सामने कीवी बल्लेबाजों के आंकड़े कमजोर पड़ जाते हैं। 'एक्स' फैक्टर इंडिया के साथ मौजूदा टूर्नामेंट में लीग राउंड तक के खेल के लिहाज से भी टीम इंडिया का प्रदर्शन ज्यादा चमकदार नजर आ रहा है। इंग्लैंड के खिलाफ मैच को अपवाद मानें तो भारतीय टीम कुछ कमजोरियों के बावजूद काफी बढ़िया लय में दिख रही है। अंक तालिका में सर्वाधिक 15 अंक लेकर सेमी में उतर रहा भारत अगर अपनी कुछ कमजोरियों पर काबू पा ले तो 14 जुलाई को फाइनल खेलने की वह प्रबल दावेदार है। न्यूजीलैंड ने अपने पिछले तीनों मैच क्रमश: पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के हाथों गंवा दिए हैं, अलबत्ता उसने टूर्नामेंट की शुरुआत बेहद शानदार तरीके से की थी।
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