गौरव गुप्ता, लंदन तीन साल पहले ब्रिटेन में जब इस बात को लेकर जनमत संग्रह हुआ कि उसे यूरोपीय समुदाय (ईयू) से बाहर निकल आना चाहिए या नहीं, तो ब्रिटेन की जनता ने यह फैसला सुनाया कि वह यूरोपीय समुदाय से बाहर आना चाहती है। इसके बाद ब्रिटेन को 29 मार्च 2019 को तक इस समुदाय से बाहर होना था, जो बढ़कर अब 31 अक्टूबर हो गई है। इस समाजिक-राजनीतिक परिवर्तन के दौर में इंग्लैंड क्रिकेट टीम अपना पहला वर्ल्ड कप खिताब जीतने के मुहाने पर खड़ा है। अगर रविवार को लॉर्ड्स में खेले जाने वाले खिताबी मुकाबले में इंग्लिश टीम न्यू जीलैंड को हराकर खिताब पर कब्जा लेती है तो यह जीत इस देश में खेलों के नजरिए से बड़ी गेम चेंजर साबित हो सकती है। पढ़ें: इंग्लैंड की ओर से रविवार को लॉर्ड्स के मैदान में जो कप्तान उतरेंगे वह इयोन मॉर्गन मूल रूप से आयरिश हैं। इंग्लिश दल की कप्तानी एक ऐसा कप्तान कर रहा है, जिसने इंग्लैंड के राष्ट्रीय गान को भी नहीं गाया होगा 'गॉड सेव द क्वीन' हालांकि वह आयरलैंड के राष्ट्र गान का गायन भी नहीं करते, (मॉर्गन कहते हैं कि यह व्यक्तिगत विषय है)। 32 वर्षीय यह कप्तान मॉर्गन कभी आयरलैंड की ओर से इंग्लैंड के खिलाफ भी खेला करते थे लेकिन फिलहाल वह इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में उसे वर्ल्ड कप का पहला खिताब दिलाने के लिए सबसे जुनूनी व्यक्ति हैं। पढ़ें: 2015 वर्ल्ड कप में जब इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया में खेले गए वर्ल्ड कप से बाहर हुआ था, तो उसने अगले वर्ल्ड कप के लिए कमर कसना तभी से शुरू कर दिया। उसके बाद से इंग्लैंड ने सफेद बॉल से रिस्की, भयमुक्त, आक्रामक और निडर क्रिकेट की शुरुआत की। मॉर्गन ने अपनी इस नई टीम का आगे आकर नेतृत्व किया और अपने साथी खिलाड़ियों को भी प्रेरणा दी कि वे अपनी सीमाएं और बढ़ा लें। उन्होंने कई-कई खुद भी इसके उदाहरण रखे। हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए वर्ल्ड कप मुकाबले में मॉर्गन ने 71 बॉल में 148 रन की पारी खेलते हुए रेकॉर्ड 17 छक्के बरसाए। पढ़ें: इंग्लैंड की इस टीम में मॉर्गन ही एकमात्र विदेशी खिलाड़ी नहीं हैं। उनके अलावा बारबाडोस के जोफ्रा आर्चर भी हैं, जो अंतिम क्षणों में इंग्लैंड की वर्ल्ड कप टीम में शामिल हुए। यहां इंग्लैंड के लेफ्ट आर्म सीम बोलर डेविड विले चोटिल हुए तो उन्हें इंग्लिश टीम में मौका मिल गया। हालांकि टीम में उनके चयन पर कई सवाल भी खड़े किए गए क्योंकि वह अंडर 19 स्तर पर वेस्ट इंडीज के लिए भी खेल चुके हैं। लेकिन आर्चर ने अपने प्रदर्शन से अब सभी को जवाब दे दिया है। उन्होंने वर्ल्ड कप में अब तक 10 मैच खेलकर 19 विकेट अपने नाम किए हैं। इतना ही नहीं आर्चर ने अपनी घातक बोलिंग से वेस्ट इंडीज के पूर्व फास्ट बोलिंग की यादें ताजा कर दीं। उनके सिंपल से बोलिंग ऐक्शन से करीब 150 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार निकलती है और उन्होंने इस वर्ल्ड कप में दो बल्लेबाजों के हेल्मेट पर बॉल मारकर अपनी स्पीड की एक अलग ही छाप छोड़ी है। पढ़ें: वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में उनकी गेंद हाशिम अमला के हेल्मेट पर लगी थी। इसके बाद अमला को मैदान छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में इस बोलर ने इस बार एलेक्स कैरी के जबड़े पर प्रहार कर दिया। कैरी को बैंडेज लगाकर अपनी बाकी की बल्लेबाजी करनी पड़ी। आर्चर के बाद बात करें, तो विदेशी खिलाड़ियों में उनके जादुई ऑलराउंडर बेन स्टोक्स का नाम आता है। स्टोक्स का जन्म न्यू जीलैंड में हुआ था। नंबर 5 पर बैटिंग करने वाले स्टोक्स ने यहां 54.42 के औसत से 381 रन बनाए हैं, जिसमें 4 हाफ सेंचुरी भी शामिल हैं। इनमें से 2 हाफ सेंचुरी उन्होंने तब बनाईं, जब इंग्लिश टीम विरोधी टीमों के सामने बैकफुट पर थी। भले इंग्लैंड ने वे दोनों ही मैच गंवा दिए हों, लेकिन स्टोक्स का संघर्ष की तारीफ सभी ने की। इसके बाद इंग्लैंड के तूफानी ओपनर जैसन रॉय की बात करें, तो रॉय भी साउथ अफ्रीकी हैं, लेकिन वह 10 साल की उम्र में इंग्लैंड आ गए। रॉय ने यहां वर्ल्ड कप में अब तक 7 मैच खेले हैं और 71 की औसत से 426 रन अपने नाम किए हैं, इनमें 4 हाफ सेंचुरी और एक शतक शामिल है। 117.03 का उनका स्ट्राइक रेट देखें, तो फिर वह 1996 वर्ल्ड कप के दौरान सनथ जयसूर्या की याद दिलाते हैं, जिन्होंने लंका को चैंपियन बनाने में यादगार भूमिका निभाई थी। इसके बाद इंग्लैंड के स्पिन आक्रमण की बात करें, तो यहां नाम मोईन अली और आदिल रशीद का आता है। इन दोनों खिलाड़ियों का जन्म भले इंग्लैंड में हुआ हो, लेकिन इनके माता-पिता पाकिस्तान से यहां आए थे। इंग्लैंड की टीम ने हमेशा से ही विदेशी खिलाड़ियों का अपनी टीम में स्वागत किया है। इंग्लिश क्रिकेट इतिहास को उठाकर देखें, तो हमेशा से ही इंग्लिश क्रिकेट को आगे बढ़ाने विदेशी क्रिकेटरों की भूमिका भी अहम रही है। चाहे ग्राहम गूच हो, रॉबिन स्मिथ हों या फिर ग्रेम हिक। अब जब ब्रिटेन यूरोप से बाहर हो रहा है, तो भी उनकी टीम क्रिकेट का यह सबसे बड़ा खिताब अपने नाम करने जा रही है। भले इंग्लैंड यूरोपीय संघ से खुद को अलग कर रहा हो लेकिन जब-जब उसके क्रिकेट बोर्ड और फैन्स की बात आती है, तो वे कभी बैक्जिट में भरोसा नहीं करते दिखते। यहां इंग्लिश ड्रेसिंग रूम में सभी का स्वागत है।
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