नई दिल्ली पूर्व भारतीय धुरंधर ओपनर साल 2017 में टीम इंडिया के कोच बनना चाहते थे, लेकिन को उन पर प्राथमिकता दी गई। सहवाग ने इस बार हेड कोच पद के लिए आवेदन ही नहीं किया। इसके पीछे के कारणों की जानकारी उन्होंने अब दी है। सहवाग ने कहा कि इस बार उन्होंने आवेदन नहीं किया। उन्होंने कहा , ‘2017 में मुझे बीसीसीआई सचिव और महाप्रबंधक क्रिकेट संचालन (दिवंगत) एमवी श्रीधर ने आवेदन करने के लिए कहा था, इसलिए मैंने आवेदन किया। इस बार किसी ने मुझे ऐसा करने को नहीं कहा इसलिए मैंने आवेदन ही नहीं किया।’ देखें, 40 वर्षीय सहवाग ने कहा कि उन्हें हितों का टकराव से जुड़े नियम समझ में नहीं आते। उन्होंने कहा, ‘मुझे समझ में आता है कि अगर मैं चयनकर्ता हूं तो मैं अकैडमी नहीं चला सकता, अगर मैं राष्ट्रीय कोच हूं तो मुझे समझ नहीं आता कि अकैडमी क्यों नहीं चला सकता।’ चीफ सिलेक्टर पद के लिए दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले के नाम की वकालत करने वाले सहवाग ने साथ ही कहा कि वह इस पद के लिए शायद ही राजी होंगे। उन्होंने कहा कि बोर्ड अध्यक्ष को अभी वार्षिक एक करोड़ रुपये का वेतन मिलता है। इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा, ‘जहां तक वेतन का सवाल है तो बीसीसीआई को इसमें इजाफा करना होगा। इसके बाद काफी खिलाड़ियों की इसमें रुचि हो सकती है।’ पढ़ें, यह पूछने पर कि क्या इस पद में उनकी रुचि होगी तो सहवाग ने कहा कि उन्हें काफी सीमाओं में बंधना पसंद नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मैं लेख लिखता हूं , कॉमेंट्री करता हूं और टीवी पर विशेषज्ञ के रूप में भी आता हूं और चयनकर्ता बनने काम मतलब है कि आपको काफी सीमाओं में बंधना होगा। मुझे नहीं पता कि मुझे इतनी रोक पसंद आएंगी कि नहीं।’
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