Sunday, September 15, 2019

किसकी गेंद पर बनाया ब्रैडमैन ने 100वां फर्स्ट क्लास शतक, सवाल 7 करोड़ का

अविजित घोष, नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज डॉनल्ड ब्रैडमैन को अपनी 100वीं फर्स्ट क्लास सेंचुरी बनाने से रोकने के लिए भारतीय कप्तान ने एक ऐसे खिलाड़ी को गेंद थमाई जो नियमित गेंदबाज नहीं था। वह बोलर कौन था। हो सकता है कि आपमें से कुछ लोगों को इस सवाल का जवाब मालूम हो। लेकिन क्या आप इसकी कीमत से वाकिफ हैं? जी, इस सवाल की कीमत है 7 करोड़ रुपये। शुक्रवार को एक गेम शो के दौरान प्रतिभागी से यही सवाल पूछा गया। सवाल था- किस गेंदबाज की गेंद पर ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन ने सिंगल लेकर अपनी 100वीं फर्स्ट क्लास सेंचुरी पूरी की थी? विकल्प थे (a) बाका जिलानी, (b) सी रंगाचारी, (c) जी (d) कंवर राय सिंह बिहार के जलालाबाद के रहने वाले सनोज राज को इसका सही जवाब- जी. कृष्णचंद- नहीं मालूम था। और उन्होंने शो छोड़ने का फैसला किया। अमिताभ बच्चन द्वारा पेश किए जाने वाला शो कौन बनेगा करोड़पति 2019 के इस एपिसोड में सनोज 1 करोड़ रुपये जीतकर लौटे। सनोज को तो आज दुनिया जान गई जब लाला अमरनाथ के इस फैसले से जुड़े कृष्णचंद के बारे में बहुत कम लोगों को पता था। सर डॉन को 100वीं फर्स्ट क्लास सेंचुरी लगाने से रोकने के लिए लाला अमरनाथ ने यह दांव चला था। 15 नवंबर 1947 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी मैदान पर डॉन ने यह शतक लगाया था। यह आधिकारिक टेस्ट मैच नहीं था बल्कि ऑस्ट्रेलियन XI और इंडियंस के बीच खेला गया मुकाबला था। आजादी के बाद यह भारतीय टीम का पहला विदेशी दौरा था। और दर्शकों में इस मैच को लेकर काफी रोमांच था। ब्रैडमैन ने अपनी आत्मकथा- 'फेयरवेल टु क्रिकेट' में लिखा है, 'यहां तक कि सबसे रोमांचक टेस्ट मैच के दौरान भी मैंने दर्शकों में इतना रोमांच नहीं देखा था। माहौल वाकई बहुत अच्छा था।' अपने पिता लाला अमरनाथ की आत्मकथा में उनके बेटे राजेंदर अमरनाथ ने लिखा है, 'हजारों लोग ब्रैडमैन को देखने पहुंचे थे। वह 100 फर्स्ट क्लास सेंचुरी लगाने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बनने वाले थे। इस अच्छे विकेट पर भारतीयों ने पहले बल्लेबाजी की। हर भारतीय विकेट पर लोग काफी उत्साहित हो रहे थे। बड़ी संख्या में लोग अपने हीरो को अच्छा प्रदर्शन करने देखने आए थे।' ब्रैडमैन ने उस लम्हे याद करते हुए कहा था, 'आखिर मेरा स्कोर 99 तक पहुंच गया। अमरनाथ ने कृष्णचंद को गेंदबाजी के लिए बुलाया। वह बाउंड्री पर फील्डिंग कर रहे थे। यह एक चालाकी भरा फैसला था क्योंकि वह ओवर कोई भी फेंक सकता था। लेकिन मैंने उन्हें पूरे सम्मान के साथ खेला। आखिर वह मौका आ गया जब मिड-ऑन पर सिंगल लेकर मैंने अपना शतक पूरा किया। ' कृष्णचंद ने उस मैच में सिर्फ वही एक ओवर फेंका। समाचार एजेंसी पीटीआई के पूर्व खेल संपादक के. जगनंदा राव को याद आता है कि उन्होंने अमरनाथ से पूछा था कि आखिर क्यों उन्होंने कृष्णचंद से गेंदबाजी करवाने का फैसला क्यों किया। तो लाला ने जवाब दिया, 'जब मुझे नहीं पता कि वह किस तरह की गेंदबाजी करते हैं, तो ब्रैडमैन को कैसे मालूम होगा?' ब्रैडमैन अपनी भावनाएं जाहिर नहीं करते ते। लेकिन उस वक्त वह भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाए। वह लिखते हैं, 'मेरे पूरी क्रिकेटीय जीवन में वह मेरे लिए मैदान पर सबसे ज्यादा तसल्ली पहुंचाने वाला लम्हा था। मैदान पर मौजूद सभी दर्शकों ने मुझे जो सम्मान दिया वह शानदार था।' 1947-48 का दौरा भारतीय टीम के लिए बहुत खराब रहा था। भारत को पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 4-0 से हार का सामना करना पड़ा था। लाला अमरनाथ की टीम ने दो टूर मैचों में से एक में जीत हासिल की थी। स्पिनिंग ऑल-राउंडर वीनू माकंड के 10 विकेट की बदौलत भारत ने चार-दिवसीय मैच में जीत हासिल की थी। उन्होंने दूसरी पारी में 84 रन देकर 8 विकेट लिए थे। लेकिन भारत की ओर से बैटिंग हीरो थे जी. कृष्णचंद ने 75 नॉट आउट और 63 नॉट आउट की पारियां खेली थीं। गोगुमल कृष्णचंद महाराजा ऑफ बड़ौदा के स्टाफ थे। उन्होंने अपने टेस्ट करियर में पांच टेस्ट मैच खेले थे। उनका सर्वोच्च स्कोर 44 रन था। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में कभी गेंदबाजी नहीं की। अपनी लेग-ब्रेक गेंदबाजी से उन्होंने 37 फर्स्ट क्लास विकेट लिए। उन्होंने प्रथम-श्रेणी क्रिकेट में 15 शतक भी लगाए।


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