नूर सुल्तान (कजाखस्तान) भारतीय कुश्ती के लिए बुधवार का दिन शानदार रहा क्योंकि ने यहां ब्रॉन्ज मेडल जीतने के साथ क्वॉलिफिकेशन हासिल किया जबकि पूजा ढांडा विश्व चैंपियनशिप में दूसरा पदक जीतने से केवल एक जीत दूर हैं। इससे पहले तीन विश्व चैंपियनशिप में विनेश पदक हासिल नहीं कर पाई थीं लेकिन उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में मारिया प्रेवोलाराकी को चित्त करके अंत में इस प्रतियोगिता में पदक के सूखे को समाप्त किया। विनेश ने पत्रकारों से कहा, ‘यह मेरा पहला विश्व चैंपियनशिप पदक है और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना बहुत बड़ी बात है।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने अपना वजन वर्ग बदला था और महज 10 महीनों में मैंने यह पदक हासिल किया। यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। यह अब तक मेरे करियर का सबसे बड़ा पदक है।’ पच्चीस साल की भारतीय को मुकाबले के शुरू में स्थिर होने के कारण एक अंक गंवाना पड़ा क्योंकि दो बार की पदकधारी मारिया के चेहरे पर कट लग गया था। विनेश ने फिर दो मूव बनाए लेकिन मारिया ने अच्छा बचाव कर ब्रेक तक मामूली बढ़त बनाए रखी। मारिया खड़े होकर दाव खेलने के लिए जोर लगा रही थी लेकिन भारतीय पहलवान ने पैर पर दोहरा आक्रमण किया। हालांकि मारिया ने इसका अच्छा बचाव किया। यूनानी पहलवान ने फिर विनेश के दाएं पैर को पकड़कर दबाव बनाया। कुछ क्षण बाद मारिया को दूसरी बार चोट का उपचार कराना पड़ा। फिर विनेश ने चार अंक की बढ़त बनाई और प्रतिद्वंद्वी को चित्त करने के बाद जीत हासिल की। विनेश इस तरह विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पांचवीं भारतीय महिला पहलवान बन गईं। उनसे पहले अलका तोमर (2006), गीता फोगाट (2012), बबीता फोगाट (2012) और पूजा ढांडा (2018) ने इसमें पदक जीता है। विनेश ने 53 किग्रा रेपेचेज के दूसरे दौर में दुनिया की नंबर एक अमेरिकी पहलवान सारा एन हिल्डेब्रांट पर 8-2 से जीत हासिल कर 2020 ओलिंपिक कोटा हासिल किया। विनेश अब भारत की सबसे सफल पहलवानों में से एक बन गई हैं, उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले हैं। पूजा ढांडा ने 59 किग्रा के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारतीय खेमे की खुशी बढ़ा दी, हालांकि यह वर्ग ओलिंपिक में शामिल नहीं है। बुडापेस्ट में 2018 विश्व चैंपियनशिप में 57 किग्रा में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली पूजा ने जापान की युजुका इंगाकी के खिलाफ पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 11-8 से जीत हासिल की। इसके बाद वह 2017 यूरोपीय चैंपियन रूस की लियूबोव ओवचारोवा से तकनीकी श्रेष्ठता से हार गयीं। अब वह विश्व चैंपियनशिप में दूसरे कांस्य पदक के लिए भिड़ेंगी। पूजा अब विश्व चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाली पहली महिला और दूसरी भारतीय पहलवान बन सकती हैं। भारत के पुरूष पहलवान बजरंग पूनिया ने ही सिर्फ विश्व चैंपियनशिप में दो पदक (2013 में ब्रॉन्ज मेडल और 2018 में सिल्वर मेडल) जीते हैं। अमेरिका की सारा ने कम से कम पांच बार विनेश के दाएं पैर को पकड़ने का प्रयास किया लेकिन भारतीय पहलवान ने बेहतरीन रक्षात्मक प्रदर्शन करते हुए उसे फायदा नहीं उठाने दिया और 53 किग्रा में रेपेचेज के दूसरे दौर में 8-2 से जीत हासिल की। विनेश ड्रॉ के दूसरे दौर में मौजूदा चैंपियनशिप मायू मुकेदा से हार गई थी। फिर रेपेचज के पहले दौर में उन्होंने यूक्रेन की यूलिया खालवाद्जी को आसानी से 5-0 से पराजित किया। विनेश ने ओलिंपिक क्वॉलिफिकेशन बाउट में शुरू में सारा पर दबाव बना दिया था और 2-0 से आगे हो गईं। अमेरिकी पहलवान ने पहले पीरियड में तीन बार और दूसरे पीरियड में दो बार विनेश के दाएं पैर को पकड़ा। लेकिन भारतीय पहलवान अपनी पूरी ताकत से डटी रहीं। इसी से विनेश जीत हासिल करने में सफल रहीं। जब भी मौका मिला विनेश ने आक्रमण करके विपक्षी को गिराकर अंक जुटाए। विनेश ने 50 किग्रा से 53 किग्रा वर्ग में खेलने के फैसले के तुरंत बाद सत्र के शुरू में बुल्गारिया में डान-कोलोव टूर्नमेंट में सारा को हराया था। रेपेचेज के पहले दौर में यूक्रेन की पहलवान ने सिर से सिर भिड़ा दिए लेकिन विनेश ने बचाव करने के साथ तेज आक्रमण किया और गिराकर अंक जुटाए। पूजा ने जापान की युजुका इंगाकी के खिलाफ 0-5 से पिछड़ते हुए शानदार वापसी की। उन्होंने मुकाबले में वापसी की लेकिन वह फिर भी 4-7 से पिछड़ रही थीं। इसके बाद भारतीय खिलाड़ी ने अच्छी चाल चली और जापानी पहलवान के नीचे से निकलकर पीछे जाकर नीचे गिरा दिया। महज 40 सेकंड बचे थे और पूजा फिर भी पीछे थीं। पर उन्होंने चार अंक जुटाकर बढ़त बना ली और इसे कायम रखा जिससे उनका सेमीफाइनल में स्थान सुनिश्चित हुआ। उन्होंने प्री क्वार्टरफाइनल में बेलारूस की कटसियारना हंचार को तकनीकी श्रेष्ठता के बूते पराजित किया था सीमा बिस्ला हालांकि 50 किग्रा में रेपेचेज के दूसरे दौर में रूस की एकेटरिना पोलेश्चुक से 3-11 से हारकर ओलिंपिक क्वॉलिफिकेशन से चूक गई। सरिता मोर से भी काफी उम्मीद थी क्योंकि ट्रायल्स में उन्होंने पूजा ढांडा को हराकर टीम में जगह बनाई थी लेकिन वह मुकाबले के दौरान आक्रामक नहीं दिखीं। मोलदोवा की अनास्तासिया निचिता के खिलाफ वह रक्षात्मक बनी रहीं जिससे 57 किग्रा के क्वॉलिफिकेशन मुकाबले में 1-5 से हार गईं। वह भी निचिता के हारने से बाहर हो गईं। वहीं 76 किग्रा वर्ग में किरण ने जर्मनी की अपनी प्रतिद्वंद्वी एलिने रोटर पर 4-0 से बढ़त बना ली थी लेकिन दूसरे पीरियड में वह पांच अंक गंवा बैठीं जिससे वह मुकाबले में 4-5 से हार गईं। इसमें उन्हें अति रक्षात्मक होना भारी पड़ा। जर्मनी की पहलवान भी सेमीफाइनल में हार गईं तो किरण का अभियान भी समाप्त हो गया। नवजौत कौर को भी 65 किग्रा के शुरूआती मुकाबले में अजरबेजान की एलीस मोनोलोवा से शिकस्त मिली जो बाद में सेमीफाइनल में हार गईं।
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