धर्मशाला साउथ अफ्रीका के खिलाफ धर्मशाला में खेले जाना वाला पहला टी20 मैच बारिश की भेंट चढ़ गया। लेकिन इससे के कप्तान को यह सोचने के लिए दो दिन का समय और मिल गया है कि टी20 वर्ल्ड के लिए अपनी टीम तैयार कर रहे विराट साउथ अफ्रीका के खिलाफ कौन सा कॉम्बिनेशन लेकर मैदान पर उतरें। टीम इंडिया की अगली चुनौती है, जो अगले साल अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित होगा। लेकिन इस मैच के धुलने का एक मतलब यह भी है कि भारतीय टीम से अपनी योजनाएं परखने का एक मौका कम हो गया। वेस्ट इंडीज में टी20 सीरीज में 3-0 की जीत ने टीम की नई दिशा की खूबसूरत झलक जरूर पेश की थी, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम की फाइनल तस्वीर शायद नहीं होगी। टीम के पास अपनी रणनीति परखने की कई योजनाएं होंगी। हमारे सहयोगी 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने भारत के टी20 वर्ल्ड कप 2020 मिशन से पहले उन पहलुओं पर रोशनी डाली है, जिसे टीम इंडिया को आने वाले समय में सुलझाना होगा। देखें टीम इंडिया के लिए क्या हैं ये मसले... शिखर धवन की फॉर्महर टी20 मैच में रोहित शर्मा के साथ शिखर धवन ही पारी की शुरुआत करने उतरें, यह कोई पक्का नहीं है। मैच के दिन कोच रवि शास्त्री ने शिखर धवन के साथ नाश्ता किया और इसकी तस्वीर ट्वीट की। धवन उस फ्रेम में 'गब्बर' नहीं दिख रहे थे। टेस्ट टीम से ड्रॉप किए जाने के बाद से धवन की फॉर्म पर कड़ी नजर है। हालिया कुछ वक्त से उनकी किस्मत भी साथ नहीं दे रही है। वर्ल्ड कप में वह चोटिल होकर टीम से बाहर हो गए और उसके बाद से वेस्ट इंडीज में बल्ला उनसे रूठा हुआ है। वेस्ट इंडीज में खेले गई सीरीज में उन्होंने 19 के औसत से रन बनाए। वहीं टी20 सीरीज भी उनके माकूल नहीं रही। उनका औसत सिर्फ 9 का रहा और स्ट्राइक रेट 96.42 का। सर्वोच्च स्कोर रहा 23। धवन मैच-विनर रहे हैं लेकिन केएल राहुल को सिर्फ एक मौके की दरकार है। श्रेयस अय्यर या मनीष पांडे!मिडल ऑर्डर में कौन सा बल्लेबाज अधिक फिट है? क्वींस पार्क में खेले गए वनडे इंटरनैशनल में अय्यर ने 41 गेंदों पर 65 रनों की पारी खेली। अपनी इस पारी में उन्होंने पांच छक्के लगाए। मुश्किल हालात में खेली गई इस पारी ने उन्हें टी20 टीम के लिए दावेदार बना दिया है। पांडे ने कैरेबियाई धरती पर हुई वनडे सीरीज में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी की। ऋषभ पंत को नंबर चार पर आजमाया गया। पांडे को अय्यर के मुकाबले टी20 में भी ज्यादा अवसर दिए गए हैं। पांडे ने जहां 31 T20I खेले हैं वहीं अय्यर को 6 मैचों में ही मौका मिला है। पांडे के 31 में से 24 में भारत को जीत मिली है। उनका बल्लेबाजी औसत 39.20 और स्ट्राइक रेट 121.5 का रहा है। T20I में बहुत शानदार नहीं है अय्यर का रेकॉर्ड अय्यर का टी20 रेकॉर्ड बहुत शानदार नहीं कहा जा सकता। पांच पारियों में उन्होंने 16.6 के औसत से रन बनाए हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 30 रहा है। लेकिन वह अच्छी फॉर्म में हैं तो क्या वह पंत को बैटिंग ऑर्डर में नीचे कर खुद नंबर चार की पोजिशन पर कब्जा कर सकते हैं? और क्या अगर वह पांडे के स्थना पर खेलते हैं और ऋषभ पंत अगर फेल हो जाते हैं तो उनकी जगह पर क्या असर पड़ेगा? यहीं से हमारा अगला सवाल शुरू होता है। नंबर चार पर पंत को कितने मौके? हर कोई जानता है कि ऋषभ पंत में कुछ बड़ा करने की काबिलियत है। अगस्त की शुरुआत में वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेली गई टी20 इंटरनैशनल सीरीज के एक मैच में उन्होंने 42 गेंदों पर 65 रनों की पारी खेली थी। इस मैच में भारत ने सात विकेट से जीत हासिल की थी। इस मैच से कुछ उम्मीदें तो जगीं थीं। कोहली ने तब कहा था, 'उन्हें खुद को थोड़ा वक्त देना होगा। यह मैच जीतने और खत्म करने की बात है।' सवाल यह है कि क्या पंत इस तरह का प्रदर्शन निरंतर दोहरा सकते हैं। कोच रवि शास्त्री भी पंत को लेकर इशारा कर चुके हैं कि वह समय रहते खेल की अहमियत को समझ लें वरना उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। लाख टके का सवाल- माही रणनीति का हिस्सा हैं या नहीं! फिलहाल महेंद्र सिंह धोनी को लेकर कई सवाल उठ रहे है। धोनी की पहेली अभी सुलझी नहीं है। क्या वह अगले साल होने वाले वर्ल्ड टी20 को लेकर बन रही योजनाओं का हिस्सा हैं? और अगर नहीं हैं तो कोई इस बात को बोलता क्यों नहीं? विराट कोहली का हाल ही में दिया गया बयान दिया था कि धोनी जब तक टीम के लिए खुद को 'उपलब्ध' बताएं तब तक वह टीम के लिए बहुत उपयोगी हैं, लेकिन यह बात तस्वीर का रुख बहुत साफ नहीं कर पाती। नए स्पिन बोलिंग ऑलराउंडर्स कोहली चाहते हैं कि निचले क्रम के खिलाड़ी भी बल्ले से उपयोगी पारियां खेलें। तो कई फिंगर-स्पिनर बोलिंग ऑलराउंडर्स के साथ ही राहुल चाहर जैसे लेग स्पिनर को भी लेकर भी भविष्य की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वे भी 'कुल्चा' की तरह प्रभावी हो पाएंगे? कौन देगा बुमराह का साथ? कोहली जब चाहेंगे बुमराह टीम का हिस्सा होंगे लेकिन सवाल बाकी तेज गेंदबाजों को लेकर है। भुवनेश्वर ? नवदीप सैनी? या दोनों? क्या दीपक चाहर ऑस्ट्रेलिया में असरदार होंगे? या फिर खलील जरूरत पड़ने पर अपने खेल को नए आयाम पर पहुंचाएंगे? और दूसरी तरह से सोचें तो क्या सिर्फ तेज गेंदबाजों के साथ वर्ल्ड टी20I में जाया जा सकता है? यहां कोहली और शास्त्री को कई चीजों पर नजर रखनी है। लेकिन अच्छी बात यह है कि उनके पास चुनने के लिए कई विकल्प हैं।
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