विशाखापत्तनम भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान ने शुक्रवार को ऑफ स्पिनर के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करने को लेकर भारतीय टीम प्रबंधन की आलोचना की। अश्विन बीते दो साल में टीम के अंदर आते और बाहर जाते रहे हैं। गावसकर के मुताबिक भारत जब भी टेस्ट खेलता है, अश्विन को अंतिम एकादश में जगह मिलनी ही चाहिए। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच यहां जारी पहले टेस्ट मैच में कॉमेंट्री कर रहे गावसकर ने आधिकारिक प्रसारणकर्ता से कहा, 'अश्विन को टेस्ट टीम में हमेशा जगह मिलनी चाहिए। उनके साथ बीते कुछ सालों में अच्छा बर्ताव नहीं हुआ है। इससे उनके खेल पर भी असर हुआ है। जब आपका साथ देने वाला कोई नहीं होता है तो इसका सीधा असर आपके खेल और मनोबल पर पड़ता है।' इस ऑफ स्पिनर ने अपने 66वें टेस्ट मैच में उन्होंने 27वीं बार पारी में पांच विकेट अपने नाम किए।। इसके अलावा उन्होंने 111 वनडे और 46 टी-20 मैच भी खेले हैं। टेस्ट में अश्विन ने 347, वनडे में 150 और टी-20 में 52 विकेट लिए हैं। अश्विन भारतीय जमीन पर होने वाले मैचों में टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन के नियमित सदस्य रहे हैं हालांकि विदेशी दौरों पर उनकी जगह पक्की नहीं रही है। गावसकर का मानना है कि जब भारतीय टीम विदेश में खेलती है तो 33 वर्षीय अश्विन तुलना के शिकार बन जाते हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उन्हें तुलना के शिकार बन जाते हैं। जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में खेलती है तो उनकी तुलना नाथन लायन से होती है। कहा जाता है कि वह ऐसा कर रहे हैं, वैसा कर रहे हैं। इसी तरह इंग्लैंड में उनकी तुलना मोईन अली से होती है। मोईन ने छह-सात विकेट लिए, आप कहते हैं कि अश्विन को विकेट क्यों नहीं मिले। ऐसा हो सकता है।' उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि सिर्फ क्रिकेटीय कारणों से वह बैंच पर नहीं होते। जिस गेंदबाज के नाम लगभग 350 विकेट हों उन्हें नियमित रूप से ऐसे टीम से बाहर नहीं किया जा सकता जैसे अश्विन को किया जाता है।'
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