विशाखापत्तनम चुनौतियों को मौके में तब्दील करना और फिर उसके जरिए खुद की कामयाबी का रास्ता बनाना- यह बड़े खिलाड़ियों की खूबी होती है। और साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के पहले टेस्ट मैच में दो खिलाड़ियों ने कुछ ऐसा ही किया। और रविचंद्रन अश्विन। विशाखापत्तनम में भारत की 203 रनों की जीत में रोहित की दोनों पारियों में लगाए गए शतक और के 8 विकेटों की भूमिका अहम रही। वनडे और टी20 टीम टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा टेस्ट टीम का नियमित हिस्सा नहीं थे। वह वेस्ट इंडीज दौरे पर टीम के साथ थे लेकिन अंतिम 11 में उन्हें जगह नहीं मिली। विशाखापत्तनम टेस्ट से पहले जब यह चर्चा हुई कि रोहित को बतौर ओपनर उतारा जाएगा तो कई सवाल भी उठे। सवाल हालांकि उनकी तकनीक को लेकर भी थे लेकिन बड़ा सवाल यह था कि क्या लाल गेंद के प्रारूप में अपनी जगह पक्की करने के लिए रोहित के पास यह आखिरी मौका है। रोहित ने टेस्ट क्रिकेट में कभी पारी की शुरुआत नहीं थी। शायद रोहित को कभी इस बात का इल्म होगा कि यह किस्मत शायद उनके दरवाजे पर फिर दस्तक न दे। रोहित ने इस मौके को भुनाया और क्या खूब भुनाया। साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट की पहली पारी में रोहित ने 176 रनों की पारी खेली। दूसरी पारी में फिर सैकड़ा 127 रन। बतौर ओपनर पहले ही मैच में 300 से ज्यादा रन। रेकॉर्ड 13 छक्के। रोहित ने सब कुछ ठीक किया। शुरुआत में नजरें जमाने में वक्त लिया और एक बार टिकने के बाद विपक्षी खेमे पर धावा बोल दिया। बड़े खिलाड़ी अकसर ऐसा ही करते हैं। वह मौका हाथ में आने के बाद उसे यूं ही जाने नहीं देते। सीमित ओवरों में रोहित के नाम कई बड़े रेकॉर्ड हैं। वनडे में तीन डबल सेंचुरी। टी20 इंटरनैशनल में सबसे तेज शतक। और हाल ही में वर्ल्ड कप में लगाए पांच शतक। रोहित अपने बल्ले से कई बार यह बता चुके हैं कि जब वह रंग में हों तो उन्हें थामना आसान नहीं। लेकिन रोहित ने बता दिया कि अभी उन्हें चुका हुआ नहीं समझा जाना चाहिए। भारत को लंबा घरेलू सीजन खेलना है और शायद कुछ वक्त तक कौन बनेगा ओपनर के सवाल पर विराम लग गया है। वहीं अश्विन की बात करें तो इस साल यह उनका पहला टेस्ट मैच था। घरेलू धरती पर होने वाले मैचों में वह अहम रहे लेकिन विदेशी दौरों पर उन पर सवाल उठने लगे। यहां तक कि जब वह कैरेबियाई धरती पर गए लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं दिया गया। भारत का प्रीमियर स्पिनर उन धीमी और टर्न लेती विकेटों पर होने वाले मैचों में बेंच पर बैठा रहा। अश्विन को उन विकेटों पर गेंदबाजी माफिक आती लेकिन उन्हें इसका अवसर नहीं मिला। अनिल कुंबले जैसे दिग्गज स्पिनर ने अश्विन को मौजूदा दौर में भारत का बेस्ट स्पिनर कहा। लेकिन विंडीज के खिलाफ रविंद्र जडेजा को उन पर तरजीह दी गई। जब विशाखापत्तनम में उन्हें मौका मिला तो उन्होंने 8 विकेट झटक लिए। इसके साथ ही उन्होंने 66वें मैच में 350 टेस्ट विकेट पूरे लिए। मुथैया मुरलीधरन के साथ सबसे कम मैचो में इतने विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। अश्विन गेंदबाजी के अपने तरकश में नए तीर जोड़ते रहे हैं। कभी लेग स्पिन, तो कभी कैरम बॉल, कभी फ्लोटर- वह लगातार खुद को मांझने और निखारने की कोशिश करते रहे। और अब अश्विन टेस्ट क्रिकेट में 350 विकेट लेने वाले चौथे भारतीय गेंदबाज हैं। भारत की धीमी विकेटों पर अश्विन की फिरकी का कमाल अभी और देखने को मिल सकता है।
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