नई दिल्ली इनमें से कुछ प्रतिभा के धनी थे, कुछ के खेल का अपना निराला अंदाज था तो कुछ खालिस मनोरंजन से मैदान में भीड़ खींचने की क्षमता रखते थे। हम बात कर रहे हैं 80 और 90 के दशक के भारतीय क्रिकेटरों की, जो इंडियन प्रीमियर लीग () जैसी ग्लैमर और चकाचौंध से भरे टूर्नमेंट का कभी हिस्सा नही बन पाए। उदाहरण के लिए कृष. श्रीकांत को ही देखिए, क्या वह बिना हेलमेट के पैट कमिंस के बाउंसर पर करारा शॉट लगा सकते थे? इसी तरह बेन स्टोक्स के बारे में क्या सोचेंगे? वह मनोज प्रभाकर की धीमी गति की गेंद को कैसे खेलते? अगर को 19वें ओवर में जसप्रीत बुमराह का सामना करना पड़ा होता तो मुंबई इंडियंस (MI) का यह गेंदबाज पूर्व भारतीय दिग्गज का कैसी गेंद डालता? यहां भारत के 10 पूर्व खिलाड़ियों की समीक्षा की रही है, जो से चूक गए थे, लेकिन अगर वह आज के दौर में सक्रिय होते तो अंबानी और शाहरुख खान जैसे टीम मालिकों को उन पर रकम लुटाने में कोई परेशानी नहीं होती। 1. कपिल देव शायद भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े ऑलराउंडर खिलाड़ी। भारत के सर्वश्रेष्ठ स्विंग गेंदबाजों में से एक और ऐसे बल्लेबाज जो बड़े छक्के लगाने मे माहिर हों। वह नई गेंद से गेंदबाजी की शुरुआत करने के बाद बीच के ओवरों और आखिरी ओवरों में भी गेंद डाल सकते थे। बल्ले से भी आखिरी ओवरों में गेंद को सीमा रेखा से पार पहुंचाने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती। किसी भी टीम को इस 'हरियाणा हरिकेन' के लिए चेक बुक पर अंकों की संख्या बढ़ाने में परेशानी नहीं होती। 2. कृष्णामाचारी श्रीकांतवह अपनी पीढ़ी से आगे के खिलाड़ी थे। उनकी आक्रामक शैली दर्शकों को मैदान तक खींच लाती थी। वह बिना हेलमेट के ऐंडी रोबर्ट्स की गेंद पर पुल शॉट खेल कर छक्का लगाते थे तो पैट्रिक पीटरसन पर हुक कर के गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाते थे। उस दौर (80 के दशक) में भी वह लगभग 100 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते थे। शायद चेन्नै सुपरकिंग्स (CSK) उन्हें टीम से जोड़ने के मामले में दूसरी फ्रैंचाइजियों को पीछे छोड़ देती। 3. विनोद कांबलीऐसा क्रिकेटर, जो आज के दौर के आईपीएल के लिए बना था। बल्लेबाजी कौशल के साथ युवाओं को आकर्षित करने वाला पहनावा उन्हें इस प्रारूप में सुपरहिट बनाता। 90 के दशक में वह हार्दिक पंड्या जैसे आज के क्रिकेटरों से 10 गुना अधिक आगे थे। स्पिनरों के खिलाफ बड़े शॉट खेलने की उनमें गजब की क्षमता थी। मुंबई इंडियन्स (MI) में वह सचिन तेंडुलकर के साथ बल्लेबाजी करते दिख सकते थे। 4. मोहम्मद अजहरुद्दीनकलाई के इस जादूगर को शुरुआती कुछ ओवरों के बाद मध्यक्रम में गेंद को क्षेत्ररक्षकों के बीच में खेलकर चौका लगाना या तेजी से दौड़कर से रन जुटाने में कोई परेशानी नहीं होती। स्पिनरों के खिलाफ कमाल का फुटवर्क उन्हें अलग श्रेणी में ले जाता है। फिटनेस और क्षेत्ररक्षण में हर मैच में 15 रन बचाने की क्षमता और नेतृत्व करने की काबिलियत उन्हें दूसरे से अलग बनाती। हैदराबाद (घरेलू टीम) या कोलकाता (पसंदीदा मैदान) की फैंचाइजियां को उन्हें टीम से जोड़ने में कोई परेशानी नहीं होती। 5. अजय जडेजामहेन्द्र सिंह धोनी से पहले देश के सबसे समझदार क्रिकेटर में से एक माने जाने वाले जडेजा के पास पारी का आगाज और आखिरी ओवरों बल्लेबाजी की शानदार क्षमता थी। वह धोनी की तरह मैच फिनिशर की भूमिका बखूबी ही निभा सकते थे। क्षेत्ररक्षण में सबसे फुर्तीले और जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी में भी हाथ आजमा सकने की क्षमता उन्हे इस प्रारूप की बेहतरीन क्रिकेटरों में से एक बनाती। वह दिल्ली की टीम के सही खिलाड़ी साबित होते। 6. मनोज प्रभाकरनई गेंद से स्विंग और आखिरी ओवरों में धीमी गति की गेंदबाजी उन्हें आईपीएल के लिए सटीक गेंदबाज बनाती है। बड़े शॉट खेलने की ज्यादा क्षमता नहीं थी लेकिन अगर दूसरे छोर से अच्छी बल्लेबाजी करने वाले का पूरा साथ निभाने की क्षमता थी। शायद राजस्थान रॉयल्स (RR) में इन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलता। 7. रॉबिन सिंहऐसे ऑलराउंडर जिन पर किसी भी फ्रैंचाइजी को पैसे की बारिश करने में समस्या नहीं होती। बड़े शॉट खेलने में माहिर और मध्यम गति से सटीक गेंदबाजी के साथ क्षेत्ररक्षण में गजब की चपलता उन्हें किसी भी कप्तान की चहेता खिलाड़ी बनाती। उनके लिए शायद सनराइजर्स हैदाराबाद (SRH) की टीम सबसे सटिक होती, जो हरफनमौला खिलाड़ियों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। 8. रवि शास्त्रीबाएं हाथ से धीमी गेंदबाजी और पारी का आगाज करने से लेकर किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। स्पिनरों के खिलाफ आसानी से छक्का लगाने की काबिलियत से वह इस प्रारूप के लिए चहेते क्रिकेटर होते। वह चेन्नै सुपरकिंग्स के कप्तान हो सकते थे। 9. मनिंदर सिंहजब बाएं हाथ का यह स्पिनर अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेल रहा था, तब उनकी गेंद की फ्लाइट सटीक होती थी और वह गेंद को सही जगह टप्पा खिलाते थे। आज के दौर की टी20 क्रिकेट में भी उनकी गेंदबाजी के खिलाफ रन बनाना मुश्किल होता। किंग्स इलेवन पंजाब (KXIP) को उन्हें टीम में जगह देने में कोई परेशानी नहीं होती। 10. जवागल श्रीनाथअपने समय में भारत के सबसे तेज गेंदबाज में से एक, जिनके पास गति के साथ उछाल और गेंद को अंदर लाने की क्षमता थी। वह किसी भी कप्तान के लिए चहेते गेंदबाज होते। वह शुरुआती ओवरों में टीम को विकेट दिलाते और बल्ले से भी कभी-कभी योगदान दे सकते थे। वह आरसीबी (RCB) के लिए सही चयन होते।
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