गौरव गघते, नई दिल्लीभारत-चीन सीमा LAC पर तनाव से जहां भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड () इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और वीवो करार की रीव्यू करने के लिए मजबूर है तो दूसरी ओर उसका एक और करार खतरे में दिख रहा है। यहां बात हो रही है नाइकी (Nike) की। टीम इंडिया की जर्सी पर नाइकी का लोगो है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन की वजह से यह लोगो 14 वर्ष बाद जर्सी से हट सकता है। दरअसल, भारतीय क्रिकेट टीम जल्द ही इस जर्सी पार्टनर को बाय-बाय कह सकता है। इसकी वजह दोनों के बीच कॉन्ट्रैक्ट विवाद है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा डील सितंबर में खत्म हो रही है, जबकि नाइकी चाहता है कि बीसीसीआई करार को बढ़ाए, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से मैच रद्द हुए हैं, जिसकी वजह से उसे नुकसान हुआ है। यह नुकसान कोरोना वायरस की वजह से उसके बिजनस को भी हुआ है। उल्लेखनीय है कि नाइकी ने 4 साल के करार के लिए 370 करोड़ रुपये दिए थे, इसमें 85 लाख प्रति मैच फीस थी और साथ ही 12-15 करोड़ की रॉयल्टी शामिल थी। लॉकडाउन के दौरान टीम इंडिया के 12 इंटरनेशनल मैच रद्द हुए हैं, जिसमें साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज भी शामिल है। दूसरी ओर, उसका श्रीलंका और जिम्बाब्वे दौरा भी टल गया है। नाइकी कंपनी डील के मुताबिक भारतीय टीम को शूज, जर्सी अन्य सामान मुफ्त में देती है। यह डील 2006 में पहली बार डील हुई थी। उसके बाद से यह डील बरकरार है, लेकिन अब यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया है। एक अधिकारी ने कहा- बीसीसीआई को जानते हुए मुझे संदेह है कि वह एक अनुबंध विस्तार या एक छूट के लिए सहमत होगा। एक खेल मार्केटिंग विशेषज्ञ ने कहा- बीसीसीआई को अब हार्डबॉल नहीं खेलना चाहिए या यूं कह लें कि आर्थिक रूप से संघर्ष करने वाले प्रायोजकों नहीं देखना चाहिए। माना जा रहा है कि बीसीसीआई जल्द ही इसके लिए टेंडर जारी कर सकता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केट की मजबूरी को बीसीसीआई को समझना चाहिए और नाइकी को डील में रियायत देनी चाहिए।
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