Saturday, May 8, 2021

आज का दिनः- कैरी पैकर वर्ल्ड सीरीज से हटा था पर्दा, क्रिकेट की दुनिया में आज गया था भूचाल

नई दिल्ली क्रिकेट कई बदलावों से गुजरा है। टाइमलेस से लेकर 20-20 तक। कई पड़ाव इसने देखे हैं। लेकिन एक पड़ाव या दौर ऐसा आया जिसने भद्रजनों के इस खेल को हमेशा-हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। एक ऐसा वक्त जिसने क्रिकेट की दुनिया में भूचाल ला दिया। दुनिया के सबसे ताकतवर बोर्ड भी हिल गए। कई बड़े खिलाड़ी इस बदलाव का हिस्सा बने। और फिर क्रिकेट वैसा कभी नहीं रहा जैसा हुआ करता था। आज के दौर में क्रिकेट में जो रंग आप देख रहे हैं उसकी शुरुआत आज ही हुई थी। जी, आज बात करते हैं कैरी पैकर की वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट की। इस ऑस्ट्रेलियाई बिजनसमैन ने क्रिकेट में कई रंग भर दिए। बात 9 मई 1977 की। आज ही के दिन कैरी पैकर के वर्ल्ड सीरीज के प्लान से पर्दा हट गया था। ऑस्ट्रेलियाई टीम ऐशेज की तैयारी कर रही थी। इंग्लैंड के खिलाफ क्रिकेट की दुनिया की यह इस सबसे पुरानी प्रतिस्पर्धा से पहले ही भूचाल आ गया। पता चला कि 17 में से 13 सदस्य कैरी पैकर की सीरीज का हिस्सा बन चुके हैं। पत्रकार जॉन एर्लाट जैसे शुद्धतावादी उसे 'पैकर की सर्कस' कहते थे। पैकर ऑस्ट्रेलिया के बड़े टीवी नेटवर्क चैनल 9 के मालिक थे। वह ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट मैच अपने चैनल पर दिखाना चाहते थे। इसके लिए वह मोटी रकम चुकाने के लिए तैयार थे। पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनका यह ऑफर ठुकरा दिया। यह बात 1976 की है। पैकर को यह चुभ गया। उन्होंने अपनी सीरीज शुरू करने का फैसला किया। लेकिन खुलकर नहीं। सब कुछ चुपचाप किया गया। उन्होंने दुनियाभर के बड़े खिलाड़ियों के साथ अनुबंध साइन करने शुरू किए। इसमें इंग्लैंड के तब के कप्तान टोनी ग्रेग, वेस्टइंडीज के क्लाइव लायड, विवियन रिचर्डस, ऑस्ट्रेलिया के ग्रेग और इयान चैपल और पाकिस्तान के इमरान खान जैसे खिलाड़ी शामिल थे। टोनी ग्रेग ने पैकर की सीरीज में खिलाड़ियों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। खबर आई कि ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज से उन्होंने कुल 35 चोटी के खिलाड़ी अपने साथ जोड़ लिए थे। ग्रेग को पैकर का साथ देने के लिए कप्तानी गंवानी पड़ी। शुरुआत में आईसीसी इससे दूर रहा लेकिन बात बढ़ती देख 23 जून को उसने पैकर से मुलाकात की। पैकर के मैचों को उसने अनाधिकृत घोषित कर दिया। साथ ही उसमें खेलने वाले खिलाड़ियों को बैन करना शुरू कर दिया। पैकर इसके खिलाफ कोर्ट गए। कोर्ट ने फैसला दिया कि पैकर अपने मैचों को टेस्ट मैच नहीं कह सकते और न ही खिलाड़ी अपने देशों के नाम से खेल सकते हैं। पैकर ने टेस्ट को सुपरटेस्ट कहा और टीम को डब्ल्यूएससी ऑस्ट्रेलिया इलेवन नाम दिया। वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने कई प्रयोग किए। उनमें से ज्यादातर आज तक देखे जा रहे हैं। डे-नाइट क्रिकेट काफी कामयाब हुआ। इसके बाद सीमित ओवरों के खेल को बहुत लोकप्रियता मिली। लंबे शॉट लगाने वाले बल्लेबाज, तेज गेंदबाज, शोर मचाते दर्शक, फील्डिंग लगाने को लेकर नए प्रयोग, रंगीन कपड़े, दूधिया रोशनी। क्रिकेट ने यह सब पहले नहीं देखा था। पैकर को मैदान नहीं मिले तो फुटबॉल के मैदानों पर ड्रॉप इन पिचों पर खेलना शुरू किया। कैरी पैकर की वर्ल्ड सीरीज सिर्फ 17 महीने चली। पैकर को ब्रॉडकास्टिंग के अधिकार मिल गए और इसके बाद उन्होंने इस सीरीज को खत्म करने का फैसला किया। जानकार मानते हैं कि पैकर की विरासत बहुत बड़ी है। उनके बिना रंगीन कपड़े, दूधिया रोशनी ने वनडे क्रिकेट को हमेशा के लिए बदल दिया। उनके बिना खेल आज ऐसा नहीं होता जैसा हम देख रहे हैं।


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