Thursday, June 17, 2021

आज का दिन: विकेटों के पतझड़ के बीच कपिल देव की वह ऐतिहासिक पारी... और फिर हमेशा के लिए बदल गया भारतीय क्रिकेट

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट को बदलने वाली पारियों को जब जिक्र होगा तो कपिल देव की वह पारी इस लिस्ट में चोटी पर होगी जो उन्होंने आज ही के दिन खेली थी। आज से 38 साल पहले कपिल जब क्रीज पर उतरे तो भारतीय टीम संकट में थी। गहरे संकट में। यहां से हार का अर्थ होता वर्ल्ड कप से विदाई। बीते दो वर्ल्ड टीम के लिए यादगार नहीं थे। और यहां भी लोगों को ज्यादा उम्मीद नहीं थी। लेकिन कपिल आए और छा गए। उन्होंने इस मैच से भारतीय क्रिकेट को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। 18 जून, 1983 था। इंग्लैंड का ट्रेंटब्रिज वेल्स मैदान पर भारत और जिमबाब्वे की टीमें आमने-सामने थीं। 22 गज की पट्टी पर जो हुआ उसने भारतीय क्रिकेट को हमेशा-हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। यह दिन इतिहास में दर्ज हो गया। जिन्होंने इसे मैदान पर देखा उनके जेहन में आज भी ताजा होगा। लेकिन अफसोस इसे आप आज नहीं देख सकते। इस मैच की रिकॉर्डिंग मौजूद नहीं है। उस दिन बीबीसी की हड़ताल थी। मैदान पर कोई कैमरा नहीं था जो उन लम्हों को कैद कर सके। और वह पारी सिर्फ स्कोरबुक में दर्ज होकर रह गई। क्या हुआ था मैच में अपना पहला वर्ल्ड कप खेलने उतरी जिम्बाब्वे ने भारत को परेशानी में डाल दिया था। 9 रनों पर चार बल्लेबाज पविलियन लौट चुके थे। तब मैदान पर उतरे कप्तान कपिल देव निखंज। 17 के स्कोर पर भारत का पांचवां विकेट गिरा। विकेट बल्लेबाजी के लिए आसान नहीं था। लेकिन कपिल के इरादे अला थे। उन्होंने शुरुआत संयम के साथ की। मैदान पर गेंद को खिसका और सरकाकर रन बनाए। उनकी बैटिंग में एकाग्रता थी। संयम और धैर्य था। धीरज था और साथ ही आक्रामकता। उस पारी में कपिल ने 138 गेंदों का सामना किया। 16 चौके और छह छक्के लगाए। कपिल की पारी के दम पर भारत ने 266/8 का स्कोर खड़ा किया। कपिल ने 175 रनों की जो पारी खेली वह भारतीय वनडे इतिहास में पहले कभी नहीं खेली गई थी। यह वनडे इंटरनैशनल में भारत की ओर से पहला शतक था। इस पारी ने भारत को भरोसा दिया टूर्नमेंट में आगे बढ़ने का। कपिल को अपनी पारी के दौरान सैयद किरमानी का बहुत साथ मिला। किरमानी ने 24 रन बनाए। दोनों ने मिलकर नौवें विकेट के लिए रेकॉर्ड साझेदारी की। कपिल 49वें ओवर में अपनी सेंचुरी पर पहुंचे। अगले 11 ओवर में कपिल ने 75 रन और बनाए। भारतीय गेंदबाजों ने उस स्कोर को आसानी से डिफेंड कर लिया। मदन लाल ने 42 रन देकर तीन विकेट लिए। रवि शास्त्री के अलावा, जिन्होंने सिर्फ एक ओवर फेंका था, सबने विकेट लिए। कपिल ने नंबर 11 जॉन ट्रायस को आउट किया। भारतीय टीम ने इस जीत के बाद चैंपियन बनने तक का सफर तय किया। फाइनल में भारत ने वेस्टइंडीज को हराया था। इस जीत के बाद भारतीय क्रिकेट हमेशा के लिए बदल गया।


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