नई दिल्ली भारतीय टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने हाल ही में बताया कि कैसे पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी के लिए मदद की थी। हालांकि सहवाग उस समय बुरे फॉर्म से गुजर रहे थे। अपने फेसबुक पेज पर जारी किए गए एक वीडियो में सहवाग ने जिक्र किया कि कैसे उन्हें 2007-08 के ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम में चुना गया। घरेलू क्रिकेट में सहवाग का फॉर्म अच्छा नहीं था। उन्होंने बताया कि कैसे इस अहम सीरीज में अनिल कुंबले ने उनका नाम आगे बढ़ाया। सहवाग ने कहा कि उनके स्थान पर आकाश चोपड़ा या गौतम गंभीर को जाना चाहिए। ऐसा इन खिलाड़ियों की घरेलू क्रिकेट में फॉर्म की वजह से होना चाहिए था। हालांकि कुंबले की योजनाएं अलग थीं। उनका मानना था कि टॉप ऑर्डर में एक ऐसा खिलाड़ी होना चाहिए जो ऑस्ट्रेलिया के सामने, उसके घरेलू मैदानों पर आक्रामक क्रिकेट खेल सके। सहवाग ने बताया, 'जब मैं अनिल कुंबले के साथ ऑस्ट्रेलिया जा रहा था, तो मैंने उनसे पूछा कि आपने मुझे क्यों चुना? आपके पास अन्य विकल्प थे। उन्होंने कहा, वसीम जाफर, दिनेश कार्तिक, आकाश चोपड़ा और राहुल द्रविड़ सब एक ही कैटगिरी के खिलाड़ी हैं। वे 200 गेंद खेलकर सेंचुरी बनाएंगे। लेकिन मुझे एक ऐसा ओपनर चाहिए जो ऑस्ट्रेलिया जाकर उन्हें जवाब दे सके। उनकी तरह खेल सके।' सहवाग ने कहा कि वह रन बनाने में संघर्ष कर रहे थे। यहां तक कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उनसे रन नहीं बन रहे थे। जब उन्हें अनिल कुंबले की ओर से टीम सिलेक्शन का कॉल आया उस समय वह वाकई बहुत खराब फॉर्म में थे। उन्होंने बताया कि उस साल घरेलू सीजन के छह मैचों में उन्होंने सिर्फ 36 रन बनाए थे। मैंने अनिल कुंबले से कहा कि मुझे मौका दो 43 वर्षीय इस पूर्व खिलाड़ी ने कहा कि सीरीज के पहले दो टेस्ट मैचों में वह प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना पाए। हालांकि, मैं अनिल कुंबले के पीछे पड़ा रहा। मुझे लग रहा था कि मेरा बुरा वक्त खत्म होने को है। सहवाग ने कहा, 'अनिल भाई ने मुझे सिर्फ एक चीज बताई। अब तुमने इतना इंतजार किया है तो थोड़ा और सब्र रखो। मुझे दो मैचों के बाद खेलने का मौका मिला। मैंने पर्थ में खेला और अच्छी शुरुआत की। ज्यादा रन नहीं बनाए। सिर्फ 20-30 रन बनाए और दो विकेट लिए। हम मैच जीते। लेकिन शुरुआत अच्छी थी।' सहवाग को हालांकि पर्थ टेस्ट के लिए टीम में शामिल किया गया। वह हालांकि बड़े रन नहीं बना पाए लेकिन उन्होंने दोनों पारियों में टीम को सकारात्मक शुरुआत दी। इसके साथ ही उन्होंने दो विकेट लेकर भारत को मेजबान टीम पर 72 रन की जीत हासिल करने में मदद की। कुंबले का फैसला सही साबित हुआ। ऐडिलेड टेस्ट में पहली पारी में सहवाग ने हाफ सेंचुरी लगाई और इसके बाद अगली पारी में सेंचुरी लगाकर मैच बचाया और भारत को सीरीज ड्रॉ करवाने में मदद की।
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